# और ऐसे गणपति बप्पा चले गोद में

गणपति के भजन और गानों पर थिरकते लोगो ने कानपुर शहर को महराष्ट्र राज्य की याद दिला दी। जिसको विसर्जन के लिए भारी वाहन नहीं मिला वो मोटर साइकिल से गणपति बप्पा को गोद में बैठाकर विसर्जन करते जाता दिखाई दिया।

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Sep 12, 2016
Ganesh Mahotsav boom in the city
Ganesh Mahotsav boom in the city
विकास वाजपेयी
कानपुर – शहर में गणपति बप्पा पंड़ाल की होड़ है। कभी महराष्ट्र और खास कर मुम्बई तक सीमत रहने वाले गणपति महोत्सव का जश्न कानपुर के गली और मोहल्लों में धूम मचा रहा है यहां तक कि प्रशासन की सख्ती के बावजूद गांवो में भी कई लोगो ने पहली बार इस महोत्सव की तैयारी की थी।
कानपुर में करीब पांच साल पहले लगभग 200 के करीब पंड़ाल को सजाने का रिवाज रहा है लेकिन इस साल के आकड़ो के मुताबिक एक हजार से अधिक पंड़ालों की स्थापना की गयी। जबकी लगभग 5000 स्थानों पर गणेश महोत्सव पूजा का आयोजन किया गया।
हलांकि शहर में अंतिम विसर्जन का दिन गणेश चतुर्दशी के दिन होना है लेकिन लोगो में नम आखों के बीच गणेश विसर्जन का उत्सव मनाया जाता रहा।

वाहन नहीं तो गोद में बैठकर बप्पा पहुंचे घाट

शहर में आयोजित होने वाली लगभग 5000 गणेश महोत्सव पूजा में सोमवार को गाड़ियों का ताता लगा रहा। जिसको जो साधन मिला उसको लेकर विसर्जित करने पहुंच गया।
सोमवार का कारोबारी दिन होने के बावजूद विसर्जन में भारी सख्या में लोगो की भीड़ सड़को पर नजर आती रही। यहीं नहीं लोगों ने विसर्जन के लिए पहले से ही लोड़र और ट्रक की बुकिंग करा रखी थी।
जिसके पास जो साधन मिल रहा था वो उसी से विसर्जन करने पहुंचता रहा। हलांकि इस बार शहर में एक नये ट्रेंड की शुरुआत भी रही जिसमें भारी संख्या में लोगों ने घर पर ही गणेश प्रतिमा की स्थापना की थी।
सोमवार को सुबह से सड़कों पर गणपति के भजन और गानों पर थिरकते लोगो ने कानपुर शहर को महराष्ट्र राज्य की याद दिला दी। जिसको विसर्जन के लिए भारी वाहन नहीं मिला वो मोटर साइकिल से गणपति बप्पा को गोद में बैठाकर विसर्जन करते जाता दिखाई दिया।

नई स्थापना पर प्रशासन ने लगा रखी थी रोक

नदियों में गणेश विसर्जन पर रोक के कारण शहर के प्रशासन ने कई स्थानों पर घाट बना दिये थे जहां गणेश प्रतिमा को विसर्जित करने की छूट दी गयी है। साथ ही किसी को भी गंगा के अन्दर मूर्ति विसर्जित करने की इजाजत नहीं है।
प्रशासन ने किसी भी नए गणेश पंड़ाल को बनाने की इजाजत नहीं दी थी। साथ ही गांवों तक फैले इस महोत्सव और मूर्ति स्थापित करने वालों को नई मूर्ति स्थापित करने की भी रोक थी।
लोगो में प्रशासन की इस नयी व्यवस्था के खिलाफ काफी रोष भी दिखाई दिया। नर्वल तहसील में पड़ने वाले पाल्हेपुर गांव में मूर्ति की स्थापना को लेकर लोगो में प्रशासन के खिलाफ काफी आक्रोश दिखीई दिया।
पाल्हेपुर गांव के शास्त्री मनमथ दत्त त्रिवेदी के अनुसार ये सभी को मालुम है कि गणेश महोत्सव की शुरुआत महराष्ट्र से हुई है और प्रदेश में गणेश महोत्सव की जो भी व्यवस्था धूम है वो पांच दस सालों से आई है लेकिन प्रशासन का इस तरह से रोकने का रवैया भावनाओं को आहत करने वाला रहा है।

Published on:
12 Sept 2016 11:43 am