
Illegal Bank Transactions: कानपुर में दान और आर्थिक सहयोग दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये के अवैध बैंक लेन-देन को अंजाम देने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का कल्याणपुर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह ने संस्था के संचालक को विश्वास में लेकर उसके मोबाइल में एपीके फाइल इंस्टॉल कर दी। इसके बाद मोबाइल बैंकिंग, ओटीपी और बैंक खाते पर पूरा नियंत्रण हासिल कर करीब 4 करोड़ 93 लाख रुपये का अवैध लेन-देन कर डाला। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज, 48 सिम कार्ड और नकदी भी बरामद हुई है।
पुलिस के अनुसार, नवशील धाम फेज-2 निवासी आशीष कुमार सिंह ने कल्याणपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उनकी संस्था को बड़े दान और आर्थिक सहयोग का भरोसा दिलाया। इसी बहाने उन्हें लखनऊ बुलाया गया, जहां उन्हें दबाव में रखा गया। इसी दौरान संस्था से जुड़े मोबाइल फोन और बैंक खाते का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया। पीड़ित का आरोप है कि बैंक खाते, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, ओटीपी और नेट बैंकिंग का दुरुपयोग कर पूरी रकम अलग-अलग खातों में भेज दी गई।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्होंने पहले पीड़ित का विश्वास जीता और फिर उसके मोबाइल में एपीके फाइल इंस्टॉल कराई। इसके जरिए मोबाइल बैंकिंग का एक्सेस हासिल कर लिया गया। इसके बाद विदेशी हैंडलरों और अपने अन्य साथियों की मदद से संस्था के खाते में आने वाली रकम को आईएमपीएस, एनईएफटी और आरटीजीएस के माध्यम से कई बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था। इसके बाद रकम निकालकर कमीशन के आधार पर बांट दी जाती थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कल्याणपुर पुलिस ने लगातार निगरानी शुरू की। मुखबिर की सूचना पर सोमवार तड़के रावतपुर बस अड्डे से कंपनी बाग जाने वाले मार्ग पर निर्माणाधीन मेट्रो परियोजना के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभेन्द्र प्रकाश मिश्र उर्फ शुभम मिश्रा, राज सिंह और राहुल चौधरी के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक संबंधी दस्तावेज, 48 सिम कार्ड और नकदी बरामद की गई।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि पूछताछ में इमरान, सौरभ वर्मा और सौरभ पांडेय समेत कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, कोई सिम कार्ड की व्यवस्था करता था तो कोई बैंक खाते संचालित कर ओटीपी, नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए धनराशि ट्रांसफर कराने का काम देखता था। वहीं कुछ लोग निकासी और कमीशन का पूरा हिसाब संभालते थे।
पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह है, जिसके तार दूसरे राज्यों और विदेशी हैंडलरों से भी जुड़े होने की आशंका है। पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। जांच पूरी होने के बाद इस साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।