
Kanpur GST Fraud:कानपुर के काकादेव में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीयन कराकर करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) हासिल करने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की जांच में एनआर ट्रेडर्स नाम की फर्म अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिली। आरोप है कि फर्म के पंजीयन के लिए दूसरे पते का बिजली बिल इस्तेमाल किया गया और उसमें भी छेड़छाड़ की गई। विभाग के मुताबिक, फर्म ने 32.64 करोड़ रुपये से अधिक की इनवर्ड सप्लाई दर्शाकर करीब 5.31 करोड़ रुपये की आइटीसी हासिल की। राज्य कर अधिकारी सुरेंद्र सिंह की तहरीर पर काकादेव थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
राज्य कर अधिकारी के मुताबिक, एनआर ट्रेडर्स ने 21 अप्रैल 2024 को स्क्रैप, ब्रास स्क्रैप और रेड ब्रास स्क्रैप की खरीद-बिक्री के लिए जीएसटी पंजीयन कराया था। फर्म के स्वामी के रूप में ताडे नाटम का नाम दर्ज है। पंजीयन में फर्म का पता काकादेव के नवीन नगर स्थित स्टेडियम लेन का दर्ज कराया गया था।राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने नौ अक्टूबर 2026 को घोषित व्यापार स्थल की जांच की। जांच के दौरान पता चला कि संबंधित भवन सुनील कुमार निगम का है, जो करीब 16 साल से वहां रह रहे हैं। जांच में इस पते पर एनआर ट्रेडर्स नाम की फर्म का संचालन नहीं मिला। इससे फर्म के पंजीयन में दिए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए।
जांच में यह भी सामने आया कि पंजीयन के लिए इस्तेमाल किया गया मूल बिजली बिल संतोष कुमार के नाम पर था। यह बिल कल्याणपुर के आवास विकास-एक स्थित पते का बताया गया है। आरोप है कि इस बिजली बिल में छेड़छाड़ कर उसे फर्म के पंजीयन में इस्तेमाल किया गया। विभाग अब इसी आधार पर फर्म के दस्तावेजों और कथित लेनदेन की जांच कर रहा है।
राज्य कर अधिकारी के अनुसार, एनआर ट्रेडर्स ने रिकॉर्ड में 32.64 करोड़ रुपये से अधिक की इनवर्ड सप्लाई दिखाई। इसके आधार पर फर्म ने 4.72 करोड़ रुपये की इंटीग्रेटेड जीएसटी (आइजीएसटी) इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल की। इसके अलावा 29.21 लाख रुपये की सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) और इतनी ही राशि की स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) की आइटीसी भी प्राप्त की गई।इस तरह कुल आइटीसी की राशि करीब 5.30 करोड़ रुपये बैठती है, जिसे विभागीय आरोप में 5.31 करोड़ रुपये बताया गया है। मामले में राज्य कर अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने काकादेव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
वही थाना प्रभारी के मुताबिक, मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस और संबंधित विभाग की जांच में फर्म के पंजीयन, दस्तावेजों और लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।