
कानपुर,भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने जंगी जहाजों पर एसआरजीएम (सुपर रैपिड गन माउंट) तोप लगाने के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि इस अत्याधुनिक तोप की अहम बैरल अब कानपुर की फील्ड गन फैक्ट्री में तैयार की जा रही है। इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को बड़ी मजबूती मिलने वाली है।
पहले इस तोप की बैरल के लिए भारत को इटली पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब स्वदेशी निर्माण के साथ यह निर्भरता लगभग खत्म हो जाएगी। इससे न सिर्फ लागत कम होगी बल्कि युद्धकाल में आपूर्ति की समस्या भी नहीं रहेगी।
एसआरजीएम तोप अपनी तेज फायरिंग क्षमता के लिए जानी जाती है। यह एक मिनट में करीब 120 गोले दाग सकती है। इतनी तेज गति से फायरिंग होने के कारण दुश्मन के मिसाइल या ड्रोन को प्रतिक्रिया देने का मौका भी नहीं मिलता। भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर इसे लगाने से जहाजों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी। यह आधुनिक तोप समुद्र में मंडराने वाले खतरों को खत्म करने के लिए खास तौर पर डिजाइन की गई है।एसआरजीएम करीब 6 से 7 किलोमीटर दूर से आने वाली दुश्मन की मिसाइल, ड्रोन या एयरक्राफ्ट को हवा में ही मार गिराने में सक्षम है। इसकी अधिकतम मारक क्षमता लगभग 16 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे समुद्री सुरक्षा का दायरा और मजबूत हो जाता है।
कानपुर में बैरल बनने से भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन अभियान को भी बड़ा बल मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में कई अन्य अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण का रास्ता भी खुलेगा।रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह कदम भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ देश की सुरक्षा रणनीति को भी नई मजबूती देगा।