कानपुर

Kanpur News:“12 बार कॉल, फिर भी जवाब नहीं!”—विधायक का फूटा गुस्सा, डीएम बोले ‘खेद है, अब निजी नंबर पर करें सीधे बात’

Kanpur MLA complaint: सीसामऊ विधायक नसीम सोलंकी ने आरोप लगाया कि कानपुर के अधिकारी उनके फोन नहीं उठाते, जिससे जनता की समस्याएं प्रभावित हो रही हैं। डीएम ने खेद जताते हुए निजी नंबर साझा किया और भविष्य में बेहतर समन्वय का आश्वासन दिया है।

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Mar 19, 2026

कानपुर में जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच तालमेल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सीसामऊ से विधायक नसीम सोलंकी ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को पत्र लिखकर जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कमिश्नर, डीएम और नगर आयुक्त जैसे जिम्मेदार अधिकारी उनके फोन तक नहीं उठाते, जिससे क्षेत्र की जनता की समस्याओं का समाधान प्रभावित हो रहा है। वही एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें विधायक ने जिलाधिकारी पर फोन ना उठाने का आरोप लगाया है।

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नहीं की जा रही है कॉल रिसीव

विधायक सोलंकी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि पिछले एक महीने से वह लगातार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनकी कॉल रिसीव नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कभी स्टाफ फोन उठाता भी है, तो अधिकारी से बात नहीं कराई जाती और न ही बाद में कोई कॉल बैक आता है। उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान और जिम्मेदारी दोनों के खिलाफ बताया। इस मुद्दे को और गंभीर बनाते हुए सोलंकी ने एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसमें उन्होंने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। वीडियो में उन्होंने कहा कि विधानसभा के पिछले बजट सत्र में अध्यक्ष सतीश महाना ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे विधायकों और जनप्रतिनिधियों के फोन जरूर उठाएं, लेकिन इसके बावजूद हालात नहीं बदले।

12 से 15 बार फोन किया

गंगा बैराज क्षेत्र में हाल ही में हुए एक हादसे का जिक्र करते हुए सोलंकी ने बताया कि उन्होंने रात के समय डीएम को 12 से 15 बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि पीआरओ ने फोन तो उठाया, लेकिन न तो डीएम तक संदेश पहुंचाया और न ही कोई प्रतिक्रिया दी गई। नगर आयुक्त पर भी उन्होंने फोन न उठाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसा लगता है कि कोई भी अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। विधायक ने अपने पत्र में विधानसभा अध्यक्ष से इस पूरे मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं के समाधान में सहयोग मिल सके। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी ही संवाद से बचेंगे, तो जनता की आवाज प्रशासन तक कैसे पहुंचेगी।

बात कर असुविधा के लिए जताया है खेद

हालांकि, इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर जनप्रतिनिधियों के फोन उठाए जाते हैं, लेकिन कभी-कभी मीटिंग या अन्य व्यस्तताओं के कारण कॉल रिसीव नहीं हो पाती। डीएम ने बताया कि उन्होंने स्वयं विधायक सोलंकी से बात कर असुविधा के लिए खेद जताया है और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए अपना निजी नंबर भी साझा किया है।

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