
Vineet Manocha Murder Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मनोचा की हत्या की सुपारी देने के आरोप में जेल भेजी गई उनकी बहू शालू के परिवार ने पुलिस की जांच और सामने आ रही खबरों पर सवाल उठाए हैं। शालू के भाई धीरज अरोड़ा ने अपनी बहन को बेगुनाह बताते हुए कहा कि वह इतनी सीधी-सादी थी कि अपना सीवी तक खुद नहीं बना पाती थी। ऐसे में उसके लिए हत्या की साजिश रचने की बात समझ से परे है। शालू के भाई धीरज अरोड़ा, बहन सोनिया मल्होत्रा और परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकांत दीक्षित ने मीडिया से बातचीत में पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार का कहना है कि मामले में अभी तक घटना का सिर्फ एक पहलू सामने आया है, जबकि दूसरा पक्ष सामने आना बाकी है।
धीरज अरोड़ा ने शालू पर लगे हत्या की साजिश के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन बहुत सीधी लड़की है और कई बार अपना सीवी तैयार कराने के लिए उनसे मदद लेती थी। धीरज के मुताबिक, जो लड़की अपना सीवी बनाने के लिए भी भाई की मदद लेती रही हो, उसके बारे में हत्या की योजना बनाने की बात पर परिवार को विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस और प्रशासन पर भरोसा है और उम्मीद है कि मामले की सही व निष्पक्ष जांच होगी।
शालू के भाई और बहन ने बताया कि विनीत के बेटे सुब्रत ने घर के छोटे-मोटे काम कराने के लिए मुख्य हत्यारोपी विशाल का मोबाइल नंबर शालू को दिया था। परिवार के मुताबिक, शालू विशाल को केवल घरेलू कामकाज से संबंधित जरूरतों के लिए फोन करती थी। परिवार ने विशाल को शालू के घर पर काम करने वाले स्टाफ से अधिक महत्व का व्यक्ति होने की बात से इनकार किया। वहीं, शालू पर यह आरोप है कि मामले में फंसने के बाद उसने विशाल से सुब्रत का नाम लेने की बात कही थी। इस पर धीरज ने सवाल उठाया कि अगर शालू ने विशाल से किसी दूसरे व्यक्ति का नाम लेने के लिए कहा था तो फिर विशाल ने शालू का नाम क्यों लिया। उनका कहना है कि यह पुलिस की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
धीरज अरोड़ा ने कहा कि इस पूरी घटना के दो पहलू हैं। उनके मुताबिक, अभी तक मामले का एक पक्ष सामने आया है, जबकि दूसरे पक्ष पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई है। परिवार का दावा है कि शालू किसी की हत्या के बारे में सोच भी नहीं सकती। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पुलिस प्रशासन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करेगा।
शालू की बहन सोनिया ने घटना वाले दिन आयोजित पार्टी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह कोई हाई सोसाइटी पार्टी नहीं थी, बल्कि हर महीने होने वाली सामान्य कपल किटी पार्टी थी। सोनिया के मुताबिक, इस किटी पार्टी में फार्मा क्षेत्र से जुड़े लोग और उनके परिवार शामिल होते थे। बिरहाना रोड स्थित दवा मार्केट के कारोबारी मिलकर इस तरह की किटी पार्टी आयोजित करते हैं।
सोनिया ने बताया कि शनिवार को आयोजित होने वाली किटी पार्टी की मेजबानी शालू और सुब्रत को करनी थी। इसी वजह से दोनों घर से जल्दी निकले थे और तिलक नगर स्थित कॉस्मोजिन लाउंज पहुंचे थे। पार्टी के खर्च या पेमेंट को लेकर परिवार ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। सोनिया के मुताबिक, इस पहलू की भी जांच की जानी चाहिए।
धीरज अरोड़ा ने बताया कि उनके परिवार में दो बहनें सोनिया महरोत्रा और शालू मिनोचा हैं। शालू दोनों बहनों में सबसे छोटी है। परिवार के मुताबिक, शालू ने लखनऊ से बीकॉम और बीएड की पढ़ाई की थी। 23 नवंबर 2020 को उसकी शादी विनीत मिनोचा के साथ नैनीताल में हुई थी। परिवार ने बताया कि यह डेस्टिनेशन वेडिंग थी।
धीरज और सोनिया ने बताया कि परिवार के लोग अब तक जेल में शालू से दो बार मुलाकात कर चुके हैं। उनके मुताबिक, शालू मामले को लेकर परेशान है और अपने बच्चे श्रीजय को लेकर भी चिंतित रहती है। परिवार का कहना है कि शालू को इस बात का भी दुख है कि उसके पति सुब्रत अब तक उससे मिलने जेल नहीं आए हैं।
धीरज के मुताबिक, सुब्रत से जब पहली बार उनकी बात हुई थी तो उसने भी कहा था कि शालू ऐसा नहीं कर सकती। इसके बाद सुब्रत से संपर्क नहीं हो पाया। परिवार को बाद में पता चला कि सुब्रत कथित तौर पर मानसिक आघात की स्थिति से गुजर रहा है। धीरज के मुताबिक, शालू अपने पति और बच्चे को लेकर चिंतित है। परिवार की ओर से कहा जा रहा है कि जो लड़की चींटी नहीं मार सकती है वह हत्या की साजिश कैसे कर सकती है?
सोनिया ने कहा कि शालू ने कभी अपने ससुराल वालों को लेकर परिवार से शिकायत नहीं की थी। उन्होंने कहा कि शालू ने कभी ऐसी कोई बात नहीं बताई, जिससे यह पता चलता हो कि वह अपने ससुराल में परेशान थी। परिवार का कहना है कि शालू के व्यवहार या बातचीत से भी कभी ऐसा संकेत नहीं मिला कि वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है।
सोनिया ने बताया कि शालू के ससुर विनीत मिनोचा शुगर के मरीज थे और शालू उनके खाने-पीने का ध्यान रखती थी। परिवार ने शालू के घरेलू जीवन से जुड़े इस पहलू का जिक्र करते हुए कहा कि वह परिवार की जिम्मेदारियों को निभाती थी और ससुर की देखभाल भी करती थी।
घर में करीब एक महीने पहले कैमरे लगाए जाने के सवाल पर सोनिया ने बताया कि कैमरे दादी की बीमारी के कारण लगवाए गए थे। उनके मुताबिक, यह जानकारी शालू ने उन्हें दी थी। सोनिया ने बताया कि शालू अपने बेटे को लेने स्कूल जाती थी, जबकि सुब्रत बिरहाना रोड स्थित अपनी दुकान संभालने चला जाता था। परिवार के मुताबिक, इसी वजह से घर की निगरानी को लेकर कैमरे लगवाए गए थे।
शालू के परिजनों और परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने पूरे मामले में पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच में मामले के सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए। परिवार का दावा है कि शालू पर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। वहीं, मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। परिवार ने पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।