कानपुर

कानपुर हिंसाः विवादों की स्क्रिप्ट रचने में माहिर हयात जफर, इससे पहले भी दे चुका है ये अंजाम

Kanpur Violence Accused: कानपुर हिंसा का मुख्य आरोपी हयात जफर हाशमी गिरफ्तार हो गया। पुलिस के अनुसार हयात इससे पहले भी कई घटनाओं को अंजाम देने में शामिल रहा है।

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Jun 05, 2022
Kanpur Violence Accused Hayat Zafar Hashmi involved in Many cases

कानपुर हिंसा के आरोपी मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी का हमेशा विवादों से नाता रहा है। नई सड़क बवाल के बाद मास्टरमाइंड के रूप में गिरफ्तार किए हयात के लिए यह पहला अवसर नहीं है जब उसने ऐसे हिंसक विरोध की स्क्रिप्ट लिखी हो। सामाजिक कार्यों के बीच कई बार धार्मिक संवेदनशील मुद्दों को लेकर उसने ऐसा माहौल बनाया जिससे शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता था। प्रेम नगर में रहने वाले हयात के माता-पिता कांग्रेस में थे। पारिवारिक विवाद के कारण उसकी परवरिश ननिहाल में हुई। इस बीच पिता की मृत्यु हो गई। एक मकान खाली कराने के विवाद में 23 अक्तूबर 2012 को हयात मां और बहन को लेकर विरोध करने कलेक्ट्रेट पहुंचा। मां और बहन ने अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। अस्पताल में दोनों की मौत हो गई।

जौहर एसोसिएशन का किया गठन

हयात ने 28 फरवरी 2007 को जौहर फैंस एसोसिएशन का गठन किया। इसका काम सामाजिक सरोकारों को उठाना और जनसेवा करना था। संगठन ने कोविड काल के अलावा अन्य अवसरों पर यह काम किया भी। हयात कई बार संवेदनशील धार्मिक मुद्दों पर मुखर हुआ और तब स्थिति बेहद नाजुक हो गई। बिल्हौर में एक नेता ने मोहम्मद साहब पर टिप्पणी की तो हयात ने 10 अक्तूबर 2020 को बैनर लेकर प्रदर्शन किया। 12 मई 2019 को एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के ऐसे ही बयान का खुलकर विरोध किया। बाद में यतीमखाना चौराहा पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। वर्ष 2019 में एनआरसी के मुद्दे पर खुला विरोध किया। अक्तूबर वर्ष 2021 में जब जुलूस-ए-मोहम्मदी पर रोक थी तब प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए हयात जफर हाशमी ने जुलूस निकालने की कॉल दे दी। जुलूस निकाल भी दिया गया जिसमें लाखों लोगों को नियंत्रित करना पुलिस प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ। हयात की गिरफ्तारी भी हुई थी। हयात ने जाजमऊ में एक मुद्दे पर गिरफ्तारी की कॉल दी।

बजार बंदी की कॉल देकर भड़काया

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम शहर में होने के बावजूद 03 जून को कारोबार बंदी और 05 को सुनहरी मस्जिद से गिरफ्तारी की घोषणा कर आम जनता को संवेदनशील मुद्दे पर भड़का दिया। गुरुवार रात बंदी की कॉल वापस ली लेकिन शुक्रवार को दुकानें खुलवाने या कॉल वापसी का संदेश देने में नाकाम रहे। सुनहरी मस्जिद के निकट एकत्रित हुई भीड़ के कारण हिंसा हुई।

Updated on:
05 Jun 2022 10:30 am
Published on:
05 Jun 2022 10:28 am
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