कानपुर

19 साल बाद पहली बार बोली कानपुर की खुशी-थैंक्यू योगी जी, पुलिस अफसर बनने का मन

कानपुर की खुशी ने योगी आदित्यनाथ को थैंक्यू बोला है। अब वह पढ़ाई कर पुलिस अफसर बनना चाहती है।

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Feb 03, 2026
कानपुर की खुशी ने सबको रुला दिया Source- X

Khushi Gupta Say Thank you Yogi ji: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बहुत ही भावुक कहानी सामने आई है। 19 साल की खुशी गुप्ता, जो जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थथी, अब पहली बार आवाज निकाल पा रही है। उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे- "थैंक्यू योगी जी"। यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मदद से संभव हुआ है। खुशी ने सीएम योगी की कुछ खूबसूरत पेंटिंग्स भी बनाई हैं, जिन्हें वह खुद उन्हें सौंपना चाहती है।

खुशी का जन्म और परिवार

खुशी गुप्ता कानपुर के ग्वालटोली क्षेत्र में रहती है। वह जन्म से ही बोल या सुन नहीं सकती थी। उसके पिता कल्लू गुप्ता और मां गीता ने हमेशा उसकी देखभाल की, लेकिन इलाज के लिए ज्यादा संसाधन नहीं थे। खुशी कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन वह बहुत मेहनती और प्रतिभाशाली है। वह टीवी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखकर उनकी तस्वीरें बनाती रहती थी। उसे "बाबा जी" बहुत पसंद हैं।

90 किलोमीटर पैदल सफर पर निकली खुशी

20 नवंबर 2025 को खुशी ने बिना किसी को बताए घर से निकलकर लखनऊ की ओर पैदल चलना शुरू किया। उसका एक ही मकसद था- मुख्यमंत्री योगी से मिलना और उन्हें अपनी बनाई पेंटिंग्स देना। रास्ते में उसे बहुत मुश्किलें आईं। पैरों में छाले पड़ गए, भूख-प्यास लगी, लेकिन उसका हौसला नहीं टूटा। 90 किलोमीटर चलकर वह 22 नवंबर को लखनऊ पहुंची। सीएम आवास के बाहर रोती हुई मिली, तो पुलिस ने उसे थाने ले जाकर सुरक्षित रखा।

पुलिस और सीएम योगी की मुलाकात

पुलिस ने इशारों और स्क्रैच आर्ट से समझा कि खुशी योगी जी से मिलना चाहती है। जब यह बात मुख्यमंत्री योगी तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत खुशी को बुलाने के आदेश दिए। 26 नवंबर 2025 को सरकारी गाड़ी से खुशी और उसके परिवार वाले मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। सीएम योगी ने खुशी से बात की, उसकी बनाई पेंटिंग्स लीं और बहुत प्यार से आशीर्वाद दिया। उन्होंने खुशी की पढ़ाई, इलाज और परिवार के लिए आवास की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि उसकी सुनने की समस्या का इलाज कराया जाएगा।

इलाज की शुरुआत और ऑपरेशन

मुलाकात के बाद खुशी का इलाज शुरू हुआ। पहले 5 दिसंबर 2025 को एक कान का ऑपरेशन हुआ, लेकिन फायदा नहीं हुआ। फिर कानपुर के मल्होत्रा अस्पताल के डॉक्टर रोहित मल्होत्रा ने जांच की। उन्होंने बताया कि खुशी को कोक्लियर इम्प्लांट की जरूरत है, जिसकी लागत 6-7 लाख रुपये है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आयुष्मान भारत योजना, दिव्यांगजन विभाग और फाउंडेशन की मदद से 26 जनवरी 2026 को खुशी का सफल कोक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन हुआ।

ऑपरेशन के बाद खुशी की जिंदगी बदली

ऑपरेशन के बाद खुशी अब सुनने लगी है। वह छोटे-छोटे शब्द बोल पा रही है। पहले शब्द "थैंक्यू योगी जी" थे। अभी वह टूटे-फूटे शब्दों में बात करती है, जैसे "मम्मी, खाना" या "बाबा जी के पास जाना है"। डॉक्टर स्पीच थेरेपी दे रहे हैं। उनका कहना है कि 3 महीने में वह अच्छे से बोलने लगेगी और एक साल में सामान्य बच्चों की तरह बात कर पाएगी।

परिवार की खुशी और आभार

पिता कल्लू गुप्ता ने बताया कि बेटी अब सुन और बोल रही है, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं। वह टीवी पर योगी जी देखकर उनकी तस्वीरें बनाती है। एक पेंटिंग में उन्होंने वह पल दिखाया है, जब सीएम ने उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था। खुशी कहती है कि यह तस्वीर खुद योगी जी को देकर मिलना है। मां गीता ने कहा कि ऑपरेशन के बाद बेटी बोलकर अपनी बात कह पाती है। पहले सिर्फ इशारे करती थी। अब वह खाना मांगती है, "बाबा जी के पास ले चलो" कहती है। परिवार को कभी उम्मीद नहीं थी कि बेटी सुन-बोल पाएगी। आज उनका भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है। वे योगी जी, डॉक्टरों और सरकार के बहुत आभारी हैं।

खुशी का सपना

खुशी अब पुलिस अफसर बनना चाहती है। वह पढ़ाई शुरू करने वाली है। विशेष स्कूल में दाखिला होगा। लोगों का कहना है कि एक बेटी का सपना मुख्यमंत्री की करुणा से पूरा हुआ। खुशी की जिंदगी अब नई रोशनी से भर गई है।

Updated on:
03 Feb 2026 03:17 pm
Published on:
03 Feb 2026 03:16 pm
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