प्रबंधक की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के डाक्टरों पर किडनी निकालने समेत कई आरोप लगाए हैं।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. एक तरफ कोरोना संकट (Corona Crisis) के दौर से पूरा देश गुहार रहा है। वहीं कानपुर में पेट के ऑपरेशन (Stomach Operation) में किडनी (Kidney Case) निकालने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां हमीरपुर जनपद निवासी एक निजी कंपनी के प्रबंधक के पेट की आंत का ऑपरेशन (Intestinal Operation) कानपुर के एक अस्पताल में हुआ। प्रबंधक की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के डाक्टरों पर किडनी निकालने समेत कई आरोप लगाए हैं। मामला प्रकाश में आने पर हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि मामले में अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। परिजनों के अनुसार 17 अप्रैल 2020 को उनके पेट में दर्द हुआ। उनके घर वापस आने पर अगली सुबह इलाज के लिए कानपुर के काकादेव क्षेत्र में एक अस्पताल गए।
उनके साले ब्रजेश कुमार ने बताया कि वहां के डाक्टरों ने उन्हें साकेत नगर क्षेत्र में स्थित एक अस्पताल में अपनी जिम्मेदारी पर भेज दिया। उसी शाम वहां मृतक के पेट का आपरेशन कर दिया गया। पिता रामआसरे ने बताया कि रात करीब आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक ऑपरेशन चला। इसके बाद बेटे को आईसीयू में रखा गया। परिवार के लोग भोजन करके ग्राउंड फ्लोर में आ गए, जबकि बेटा तीसरी मंजिल पर आईसीयू में ही था। भाई छविराम ने बताया कि देर रात करीब ढाई बजे भाई निर्वस्त्र नीचे आया। कहा कि डाक्टरों ने मेरी किडनी निकाल ली है और मुझे भी मार डालेंगे। इसके बाद तड़पते हुए वहीं पर गिरकर मौत हो गई।
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर किडनी निकालने का आरोप लगाते हुए किदवई नगर पुलिस को जानकारी दी। किदवई नगर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल परिजनों ने पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने की मांग की। बताया गया कि उनसे पांच हजार रुपये शुल्क भी जमा कराया गया था। आरोप है कि पुलिस ने 15 से 20 लाख रुपये लेकर मामले को रफा-दफा करने का दबाव भी बनाया। आरोप है कि पोस्टमार्टम के दौरान भी कई फोन आते रहे, जो शायद अस्पताल के थे। वहीं थाना प्रभारी किदवई नगर धनेश कुमार ने बताया कि परिजनों ने अस्पताल के डाक्टरों की लापरवाही से मौत होने के आरोप लगाए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट आते ही मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होगी।