कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती कृष्णा के शरीर पर 50 से ज्यादा घाव थे। जब वह दर्द से चीखता था तब वहां मौजूद नर्सें भी रोने लगती थीं। जब हॉस्पिटल से बच्चे की विदाई हुई तब डॉक्टर से लेकर नर्सों तक की आंखें नम हो गई थीं।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सात महीने के नवजात को मां-बाप ने झाड़ियों में फेंक दिया था। झाड़ियों की वजह से बच्चे के शरीर पर 50 से ज्यादा घाव थे। कुत्तों ने भी नन्ही सी जान को कष्ट पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पर कहते हैं न कि जाको राखे साइयां मार सके न कोई। ये कहावत इस बच्चे पर बिल्कुल फीट बैठती है।
हैलट अस्पताल में बिन मां-पापा का यह बच्चा 31 अगस्त से भर्ती था। बुरी तरह घायल इस बच्चे को सबसे पहले सीएचसी राठ में भर्ती कराया गया, जहां से उसे हमीरपुर जिला अस्पताल और फिर हैलट अस्पताल भेज दिया गया। बच्चे के शरीर पर 50 घाव थे और दो जगह पर कुत्ते ने उसे काट दिया था। बच्चा 26 अगस्त यानी कृष्ण जन्माष्टमी के दिन जन्मा था इसलिए सबने मिलकर उसका नाम कृष्णा रख दिया। बिन मां के इस बच्चे को अस्पताल में न जाने कितनी यशोदा मिल गईं। हैलट की नर्सें उसे लोरी सुनाती, उसके घाव पर फूंक मारकर ठंडक देने की कोशिश करती। जब कृष्णा दर्द से छटपटाता तो नर्सां की आंखों में आंसु आ जाते थे।
डेढ़ महीने बाद जब वह बिल्कुल ठीक हो गया तो नर्सों ने उसे मां की तरह दुलार किया। जुदाई के वक्त अस्पताल के डॉक्टर से लेकर नर्सों तक के आंखों में आंसू आ गए। बच्चे के अच्छे भविष्य के लिए उन्होंने नन्हें कृष्णा को विदा कर दिया। शुक्रवार को बच्चे को राठ पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्यों के हवाले कर दिया गया। हालांकि उन सबको इस बात की खुशी है कि वह ठीक हो गया और अब जहां भी रहेगा, अच्छा जीवन जीएगा।