करीब ढाई लाख छात्र काकादेव कोचिंग सेंटरों में करते हैं प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी, आग के बचान के कोई नहीं उपाय, प्रशासन ने कहा होगी कार्रवाई।
कानपुर। सूरत में दिल दहला देने वाले अग्निकाण्ड के बाद उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी कोचिंग मण्डी काकादेव में दहशत का मौहाल है । ये इलाका कानपुर नगर का हिस्सा है। यहां ढाई सौ से अधिक कोचिंग संस्थान एक साथ संचालित हैं और तीन लाख से ज्यादा छात्र व छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती हैं। पत्रिका टीम ने इन कोचिंगों की मौके पर जाकर रियल्टी चेक किया तो कई खामियां मिलीं। कोचिंग संस्थानों के संचालक भविष्य के डॉक्टर, मास्टर, साइंटिस्ट और कलेक्टरों की जान के साथ खिलवाड़ कर अपनी तिजोरी भर रहे है। तो वहीं अग्नि शमन विभाग, नगर निगम और विकास प्राधिकरण के अधिकारी जानकारी होने के बाद भी आंख बंद किए हुए।
पड़ताल में पाई गई खामियां
काकादेव के सत्तर प्रतिशत से अधिक कोचिंग संचालक फायर डिपार्टमेण्ट की एनओसी नहीं दिखा सके। जिनके पास सरकारी कागज मिल वो सिर्फ कागजों में दिखे। संस्थानों में आग लगनें के बाद उससे निपटने के उपाय नहीं थ्रो। सेट बैक, आपातकालीन ़द्धार, धुआ से बचाव के लिए खिड़कियां नहीं पई गई। फायर विभाग की एनओसी में ये सभी सुविधा उपलब्ध होने का प्रमाण पत्र दिया गया है। छात्रों का कहना है कि एक कोंचग संस्थान में दो साल पहले आग लग गई थी। गलीमत रही कि पड़ोसियों ने समय से आग पर पानी के जरिए आग पर काबू पा लिया।
स्थानीय लोग खौफजदा
अधिकतर कोचिंग संस्थान गलियों में चल रही हैं। यदि आग लग जाए तो वहां पर दमकल की गाड़ियां अंदर नहीं पहुंच सकती। स्थानीय निवासी सोनू अवस्थी कहते हैं इन कोचिंग संस्थानों में कानपुर के आपपास जिलों के लाखों छात्र प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के लिए आते हैं। इलाके में किराए का कमरा लेकर रहते हैं। कोचिंगों में उन्हें भूसे की तरह भरा जाता है और डॉक्टर, मास्टर, सांइटिस्ट व कलेक्टर बनने के गुर दिए जाते हैं। कहते हैं कि यदि आग लग जाए तो छात्रों के साथ पड़ोसियों को जान-मल का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सिर्फ एक चिनगारी काफी
डॉक्टर दिलीप गंगवार इंस्टीट्यूट का बेसमेंट स्टेशनरियों से भरा हुआ था। कई ट्रक स्टेशनरी के ढेर लगे थे। निकलनें का रास्ता तक नहीं था। आग से बचाव के लिए कोई उपाय भी नहीं मिले। छात्र जफ़र सिद्दीकी ने बताया कि यदि एक चिनगारी इंस्टीट्यूट को आग के गोले में तब्दील कर सकती है। अभिभावक श्याम कुमार कटियार ने बताया कि हम हमीरपुर में रहते हैं। बेटा आईआईटी की तैयारी करने के लिए काकादेव स्थित कोचिंग में प्रतियोगिता की पढ़ाई कर रहा है। सूरत में आग लगने के बाद हम कोचिंग को देखनें के लिए आए। यहां हमें बचाव के कोई साधन नहीं मिले।
करोड़ों की करते हैं कमाई
डेढ़ दशक पहले काकदेच में चंद कोचिंग सेंटर थे। हर साल कारोड़ों का मुनाफा देख इस सेक्टर में दर्जनों लोग कूद पड़े। इससे पूरा इलाका कोचिंग मंडी में तब्दील हो गया। देखते ही देखते दर्जनों कोचिंग सेंटर तो खुल गए लेकिन कमाई का मूल आधार छात्र-छात्राओं को ही अनदेखा कर दिया गया। डायमंड एकेडमी में प्रवेश का रास्ता काफी सकरा था। साथ ही कमरे ब्लॉकनुमा बने थे। वहीं ओमेगा कोरियर इंस्टीट्यूट के बेंसमेंट में प्रवेश और निकास का केवल एक ही रास्ता था। बेसमेंट के बाहर रोशनी के कोई इंतजाम नहीं थे।
इन मानकों की होती है जरूरत
कोचिंग सेंटरों के लिए फायर विभाग ने कई नियम बनाए हुए हैं। उनके मुताबिक फायर एक्टिव, वैकल्पिक और सीढ़ियों के साथ बेसमेंट में रैंप की व्यवस्था होनी चाहिए। बिलि्ंडग में जरूरत के अनुसार रिफ्यूज एरिया के अलावा प्रस्तावित बिलि्उंग के लिए 12 मीटर से कम चौंड़ा रास्ते होना अनिवार्य पूरे मामले पर चीफ फायर आफीसर, एमपी सिंह ने बताया कि देरशाम काकादेव कोचिंग सेंटरों में जाकर जांच पड़ताल की गई। जहां कईयों में खामियां पाई गई हैं। सभी को नोटिस देकर जवाब मांगा है। साथ ही कईयों को बंद कराया गया है।