कानपुर से लखनऊ जाने वाली डाउन लाइन पर गंगाघाट स्टेशन के पास बुधवार सुबह ट्रैक चिटक गया. बात सिर्फ यहीं नहीं रुकी, बल्‍कि इस दौरान इसी चिटके ट्रैक से ऊंचाहार एक्सप्रेस पूरी रफ्तार से गुजर गई. अब ज़रा सोचिए कि क्‍या हुआ होगा आगे.
कानपुर। कानपुर से लखनऊ जाने वाली डाउन लाइन पर गंगाघाट स्टेशन के पास बुधवार सुबह ट्रैक चिटक गया. बात सिर्फ यहीं नहीं रुकी, बल्कि इस दौरान इसी चिटके ट्रैक से ऊंचाहार एक्सप्रेस पूरी रफ्तार से गुजर गई. अब ज़रा सोचिए कि क्या हुआ होगा आगे. आइए बताएं.
ऐसी मिली है जानकारी
चिटकी ट्रैक पर से ट्रेन के गुजरते ही ट्रैक पर काम कर रहे ट्रैक मैन की नजर इसपर पड़ गई. इतने में उसने फौरन गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर फोन कर इसकी जानकारी दी. उसके जानकारी देते ही कानपुर से लखनऊ आ रही कई ट्रेनों को जहां का तहां रोक दिया गया. इसके बाद आनन-फानन में ट्रैक की मरम्मत का काम कराया गया.
पूरा हुआ ट्रैक की मरम्मत का काम
घंटे भर तक ट्रैक की मरम्मत का काम हुआ. इसके बाद ट्रेनों का संचालन सामान्य हो सका. उन्नाव के गंगाघाट स्टेशन के नजदीक ऋषि नगर केबिन के पास ट्रैक मैन धीरज ट्रैक चेक कर रहा था. इसी दौरान डाउन लाइन से ऊंचाहार एक्सप्रेस गुजरी. धीरज ट्रैक चेक करते हुए आगे बढ़ा तो एक जगह उसकी नजर चिटके हुए ट्रैक पर पड़ी.
मरम्मत में लगा पूरा 40 मिनट
उसने फौरन गंगाघाट स्टेशन पर फोन किया. इसके बाद कानपुर से लखनऊ आ रही पुष्पक एक्सप्रेस, कोटा-पटना एक्सप्रेस व दो मालगाड़ी को गंगाघाट पुल से लेकर मरे कंपनी और सेंट्रल स्टेशन पर ही रोक दिया गया. मेंटीनेंस टीम की 40 मिनट की मेहनत के बाद ट्रैक सही हुआ. इसके बाद काफी देर तक 20 किमी की स्पीड का कॉशन लेकर ट्रेनों को गुजारा गया.
देना होगा पूरा ध्यान
फिलहाल ट्रैक मैन की सतर्कता से बड़ा रेल हादसा होने से बच गया, लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर ट्रैक मैन ने इसको न देखा होता तो क्या होता. ऐसे में रेल हादसों पर लगाम लगाने के लिए जरूरत है समय-समय पर मेंटिनेंस की. ऐसा न किए जाने पर कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है और चाह कर भी उसको रोका नहीं जा सकता.