समाज कल्याण एवं अधिकारिता मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के नेता रामदास अठावले ने कानपुर में दिया बयान, मायावती एनडीए के साथ मिलकर लड़ें चुनाव तो बना दी जाएंगे उपमुख्यमंत्री, 2022 में बन सकती हैं मुख्यमंत्री ।
कानुपर। समाज कल्याण एवं अधिकारिता मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के नेता रामदास अठावले शुक्रवार को कानपुर पहुंचे और अपने कार्यकर्ताओं के साथ सर्किट हाउस में बैठक की। इस दौरान उन्होंने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से लेकर सीबीआई कांड पर अपनी राय रखी। केंद्रीय मंत्री ने बसपा सुप्रीमो मायावती से कहा कि वो अखिलेश यादव के बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हाथ मिलाएं। 2019 में बीजपी के साथ गठबंधन कर चुनाव के मैदान में उतरें तो उन्हें यूपी का डिप्टी सीएम का पद दिया जाएगा। साथ ही 2022 विधानसभा चुनाव में अगर बीजेपी से ज्यादा सीटें बसपा लाती है तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी भी सौंपी जा सकती है।
एनडीए से करें गठबंधन
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई नेता नहीं हैं। राहुल गांधी के बल पर वो 2019 का चुनाव जीतने के सपने देख रही है, पर पंजे के हाथ सिर्फ 40 से 50 सीटें आ जाएं तो बहुत बड़ी बात होगी। जबकि एनडीए के पास मजबूत नेतृत्व है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश विकास के पथ पर आगे चल रहा है। एनडीए की सरकार सबका-साथ, सबके विकास के फार्मूले के तहत जनता की सेवा कर रही है। अठावले ने कहा कि हम चाहते हैं कि बसपा प्रमुख मायावती भी एनडीए का हिस्सा बनें और मिलकर चुनाव में उतरें। अगर वो ऐसा करती हैं तो उनकी सीटें भी बढ़ेंगी, साथ ही उन्हें प्रदेश के डिप्टी सीएम भी बनाया जा सकता है। जबकि समाजवादियों के साथ रहने पर सिर्फ अपमान ही उन्हें मिलेगा।
जांच के बाद मिलेगी सजा
अठावले ने सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने के मामले में बयान दिया। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सीबीआई सबसे बड़ी एजेंसी है और इस मामले के बाद सीबीआई का नाम खराब हुआ है। सरकार की तरफ से यह सही कदम उठाया गया है। ऐसे मामले के बाद सीबीआई पर विश्वास कहीं न कहीं डगमगाया है। इसलिए अब सीबीआई में अच्छे अधिकारियों की नियुक्ति होना चाहिए। सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए कि सीबीआई में ऐसा मामला पहली बार आया है। उन्होंने कहा, इस पर विपक्ष को राजनीति करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने जो निर्णय लिया है वह हित के लिए लिया है। इस मामले में गंभीरता से दोनों लोगों की जांच होनी चाहिए। सरकार इसकी जांच करेगी और जो दोषी है तो उन्हें सजा भी दी जाएगी।
राहुल गांधी कर रहे सियासत
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आंदोलन के प्रश्न पर अठावले ने कहा कि इस विषय में राहुल गांधी को आंदोलन करने की जरूरत नहीं थी। वे राजनीति कर रहे हैं, उनको सरकार को अच्छे अधिकारियों की पोस्टिंग करने का सुझाव देना था। सरकार ने जो फैसला लिया ठीक है कोर्ट फैसला करेगी। राहुल गांधी जी को केवल राफेल दिख रहा है। इस पर राजनीति की आवश्यकता नहीं है और न ही इससे वे मोदी जी की छवि को धक्का नहीं लगा सकते हैं। राहुल गांधी और उनकी पार्टी को देश की जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है। जनहित के मुद्दे नहीं मिलने से वो कभी रफेल तो कभी माल्या के मामले लेकर बयानबाजी करते रहते हैं और जनता अब इन्हें सुनती भी नहीं है।
विपक्ष के इशारे पर बोल रहे सिंहा
यशवंत सिंह द्वारा सरकार के खिलाफ की गई बयानबाजी पर कहा कि पार्टी की बदनामी कर साजिश करने में सबसे आगे हैं वे। उन्हें अब राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दल के नेता अच्छे लगने लगे हैं और वो उन्हीं के इशारे में बयान देकर सुर्खियों में रहना चाहते हैं। जबकि उनके बेटे मोदी सरकार में मंत्री हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूरा विपक्ष चाहे जितनी कोशिश कर ले, पर वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्षवि कभी खराब नहीं कर पाएगा। इन लोगों ने दलितों के साथ भेदभाव किया। आजादी के बाद दलित तो इन्हें वोट देते रहे पर कांग्रेसियों ने उनका विकास नहीं किया। अब दलित समाज इनके बहकावे पर नहीं आने वाला।