कानपुर

पानी के जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया की आसानी से होगी पहचान

आईआईटी के वैज्ञानिक ने बनाया बैक्टीरिया पहचानने वाला सेंसर पेट में जाकर शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है बैक्टीरिया

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Jul 10, 2019
पानी के जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया की आसानी से होगी पहचान

कानपुर। हम जो पानी पी रहे हैं, वह देखने में भले ही साफ लग रहा हो, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह पूरी तरह शुद्ध हो। उसमें जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया भी हो सकता है, जिसकी पहचान करना अभी तक मुश्किल था। लेकिन अब इसका पता लगाया जा सकता है। आईआईटी के एक वैज्ञानिक की नई खोज से बैक्टीरिया की पहचान हो सकेगी। इस खोज से लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

जानलेवा होता है ई-कोलाई
ई-कोलाई बैक्टीरिया का प्रकोप केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों में रहता है। यह शरीर में केवल पेट ही नहीं बल्कि कई अंगों के लिए अक्सर घातक भी साबित हो जाता है। इलाज से बेहतर इसका बचाव हो सकेगा जो जन-जन के लिए फायदेमंद होगा।

बैक्टीरिया पहचानेगा सेंसर
आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ मणी त्रिपाठी ने एक ऑप्टिक बेस्ड बायो सेंसर बनाया है। यह सेंसर पानी में मौजूद ई-कोलाई बैक्टीरिया को पहचान लेगा। ई-कोलाई बैक्टीरिया तमाम रोगों की जड़ है। आमतौर पर यह पता कर पाना मुश्किल होता है कि जिस पानी को हम पी रहे हैं उसमें यह बैक्टीरिया है या नहीं। अब यह मुमकिन हो सका है।

मिला अवार्ड
आईआईटी कानपुर में डॉ. त्रिपाठी फिजिक्स विभाग के हैं और उन्हें इस उपलब्धि के लिए हाल ही में एसएन शेशाद्रि मेमोरियल इंस्ट्रूमेनटेशन अवार्ड 2018 दिया गया है। उनकी इस उपलब्धि से गदगद निदेशक प्रोफेसर अभय करिंदकर ने उन्हें ट्विट कर बधाई दी है। उनकी इस खोज को सराहा है।

कई समस्याओं का निकलेगा हल
ई कोलाई बैक्टीरिया को पहचानने के लिए डॉ. त्रिपाठी ने फाइबर ऑप्टिक बेस्ड एक बायो सेंसर बनाया है जो इतना संवेदनशील है कि ई कोलाई की पानी में मौजूदगी को दर्ज कर लेगा। खासबात यह है कि अलग-अलग तापमान में भी इस बैक्टीरियों की उपस्थिति का पता चल जाएगा। यह जानने के बाद अनेक समस्याओं का हल निकाला जा सकेगा।

Published on:
10 Jul 2019 11:28 am
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