
कानपुर देहात. कानपुर देहात में एक परिवार ऐसी गम्भीर बीमारी से ग्रसित है जिसकी वजह से उनका जीना दूभर हो गया है| सैरीबिरल-एमेंसिया नामक बीमारी से ग्रसित मोहम्मद इसहाक का परिवार मुफलिसी और गरीबी की वजह से घुट-घुट कर दिन गुजार रहा है| जिले के अकबरपुर क्षेत्र के जगजीवपुर गांव की यह अद्भुत घटना है, जहाँ एक परिवार इस हालात मे गुजर बसर कर रहा है| बताया गया कि ये बीमारी उस परिवार में तीन पीढियों से चली आ रही है और इस बीमारी के कारण इस परिवार के लोग दूसरे ग्रह के प्राणियों की तरह दिखते हैं| बावजूद इसके जिला प्रशासन ने आज तक इनकी खैर खबर लेना भी उचित नहीं समझा| जिसकी वजह से ये पूरा परिवार निराशा के साए में जिन्दगी तलाश रहा है|
बीमारी से ग्रसित इस परिवार को एलियन कहकर बुलाते हैं लोग
सैरीबिरल-एनोसिया बीमारी से ग्रसित इस परिवार को गांव में कोई ऐलियन कहता है तो कोई उन्हें दूसरे ग्रह का प्राणी कहकर बुलाता है| किसी की नजर में वो केकड़े की तरह है तो कोई उन्हें अपाहिज कह कर पुकारता है| वो समाज में
रहकर भी समाज से बहुत दूर हैं| सामान्य लोगों से ये परिवार एक दम जुदा दिखता है| उनके हाथ पैर तो हैं, लेकिन ऊपर वाले ने उन हाथ पैरों को आम लोगों से एकदम जुदा कर दिया है| छोटे-छोटे मासूम बच्चे आम बच्चों के साथ
खेल नहीं सकते, क्योंकि अन्य बच्चों का मानना है कि अगर वो इनके साथ खेलेंगे तो वह भी उन्हीं की तरह बन जाएंगे।
सर्व शिक्षा अभियान भी यहां तोड़ रहा दम-
कुदरत का इस अभिशाप के चलते इस परिवार के मासूम शिक्षा से कोसों दूर हैं| ये आम बच्चों की तरह जिन्दगी गुजारते हैं, लेकिन हाथ पैर खराब होने की वजह से ये कोई काम साधारण बच्चों की तरह नहीं कर सकते हैं|
तीन पीढियों से झेल रहे ये दंश, नहीं आया कोई रहबर-
मेहनत मजदूरी करके अपनी जिन्दगी बसर करने वाला ये परिवार तीन पीढियों से इस बीमारी से ग्रसित है| इन मासूम बच्चों से लेकर इनके दादा तक इस भयावह बीमारी का दंश झेल रहे हैं| अपनी बीमारी की वजह से ये परिवार दूर दराज के गांवों तक मशहूर हो गया है| ताज्जुब इस बात का भी है कि जिल्लत भरी जिंदगी जी रहे इस परिवार की आज तक
जिला प्रशासन ने कोई भी सुध नहीं ली| गरीबी और अज्ञानता से घिरे इस परिवार ने कई बार सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिये खून पसीना एक किया, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के चलते हर जगह नाकामी ही इनके हाथ लगी| इतना ही नहीं, तीन पीढ़ियों से इस बीमारी के चलते अपाहिज होने के बावजूद भी इनका विकलांग सर्टिफिकेट तक नहीं बनाया गया| थक हार कर जैसे-तैसे ये लोग मजदूरी के भरोसे घुट-घुट कर जी रहे हैं|
सैरीबिरल-एनोसिया से ग्रसित है ये परिवार
डा राकेश यादव का कहना है इस बीमारी से ग्रसित लोगों के लिये मेडिकल कॉलेज में एक रिहेप्लीटेशन सेल है, जहां इसी तरह के मरीजों का इलाज किया जाता है| हालांकि ये आनुवंशिक बीमारी है जिसका प्रापर इलाज नहीं है। वही उन्होंने भयावह बीमारी के बारे में बताते हुये कहा कि इस बीमारी को सैरीबिरल-एमेंसिया कहते हैं| जिसे मैन्टेली रिटार्टेड बोला जाता है|