आईआईटी कानपुर के नोबेल पुरस्कार विजेता को उनके शोध कार्य के लिए सम्मानित किया गया। नोबेल पुरस्कार विजेता ने जी-प्रोटीन युग्मित रिसेप्टर्स की संरचना कार्यों को समझाने के लिए शोध कार्य किया था। नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर को सम्मानित किए जाने से आईआईटी कानपुर में हर्ष का माहौल है।
नोबेल पुरस्कार विजेता आईआईटी के प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला को उनके शोध कार्य के लिए विज्ञान का प्रतिष्ठित खोसला राष्ट्रीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है। जी-प्रोटीन युग्मित रिसेप्टर की संरचना कार्य, माड्यूलेशन के क्षेत्र में शोध कार्य करने के कारण उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है। अरुण कुमार शुक्ला आईआईटी कानपुर में बायोलॉजिस्ट है। उल्लेखनीय है प्रोफेसर राम कुमार शुक्ला 3 नोबेल पुरस्कार विजेताओं के सानिध्य में रहकर शिक्षा प्राप्त की थी।
अरुण कुमार शुक्ला को आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर एके चतुर्वेदी ने खोसला राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। अरुण कुमार शुक्ला ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर हार्टमट मिशेल के मार्गदर्शन में मैक्स मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ बायो फिजिक्स फ्रैंकफर्ट जर्मनी से पीएचडी की। इसके बाद पोस्ट डॉक्टोरल शोध नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर बाब लेफकोविट्ज और ब्रायन को मिलता के मार्गदर्शन में किया।
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जी-प्रोटीन युग्मित रिसेप्टर क्या है
जी-प्रोटीन युग्मित रिसेप्टर के माध्यम से चिकित्सीय प्रभाव शरीर पर प्रभाव डालती हैं। अपने शोध में प्रोफेसर अरुण शुक्ला ने बताया कि किस प्रकार डॉक्टरों द्वारा दी जाने वाली दवाइयां बीमारियों के साथ किस प्रकार क्रिया करती हैं। आदमी के शरीर में उनके रिसेप्टर को नियंत्रित करती हैं। डॉक्टर अरुण आईआईटी कानपुर में बायो साइंस एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग में जाए गिल चेयर प्रोफेसर हैं। प्रोफेसर की यह उपलब्धि चिकित्सा क्षेत्र में काफी मायने रखती है। आईटीआई रुड़की के निदेशक प्रोफेसर एके चतुर्वेदी ने प्रोफेसर शुक्ला को उनके उपलब्धि के लिए पुरस्कार दिया।