कानपुर

इस नेता ने सीएम योगी को बताया दलित विरोधी, बीजेपी-कांग्रेस से अच्छे अखिलेश-मायावती

रावण पुतला दहन के खिलाफ सड़क पर उतरे पैंथर पार्टी के कार्यकर्ता, लंकेश्वर को बताया ज्ञानी

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Oct 21, 2018
statement given by dhaniram panther is anti-dalit CM yogi adityanath
इस नेता ने सीएम योगी को बताया दलित विरोधी, बीजेपी-कांग्रेस से अच्छे अखिलेश-मायावती

कानपुर। राष्ट्रीय दलित पैंथर के प्रदेश अध्यक्ष धनीराम पैंथर ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर जमकर जुबानी हमला बोला। कहा, महंत व संत होने के बावजूद वो खुद छुआछूत और भेदभाव करते हैं। कहा, जब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मकान खाली होता है तो उसे गोमूत्र से शुद्ध किया जाता है। साफ जाहिर है कि अभी भी समाज में छुआछूत और भेदभाव का बोल बाला है, जिसे रोकने में बीजेपी पूरी तरह से असफल रही है। कांग्रेस-बीजेपी ने दलितों को वोटबैंक की तरह इस्तेमाल करा। दलित अब अखिलेश-मायावती की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। यदि दोनों नेताओं ने देश में बौद्ध धर्म और रावण को महानायक का दर्जा दिलाए जाने की बात करते हैं तो समाज 2019 लोकसभा में इन्हें वोट करेगा।

हमें जागरूक होना होगा
धनीराम पैंथर ने कहा कि कि अपने अधिकारों को पाने के लिए समाज को एकजुट रहकर संघर्ष करना पड़ेगा। कहा कि बहुजन समाज पार्टी को कांशीराम की विचारधारा पर चलना चाहिए। देश में रावण के पुतला दहन के लिए मायावती को अब खुलकर हमारा साथ देना चाहिए। दलित समाज को मायावती और अखिलेश से बहुत उम्मीद हैं और उनसे हम मांग करते हैं कि महाज्ञानी रावण को इतिहास के पन्नों में खलनायक के बजाए नायक के तौर उनका नाम दर्ज कराए।ं कहा, रावण महाज्ञानी, बलवान और वैज्ञानिक था। पर इतिहासकारों ने उसे वो सम्मान नहीं दिया, जो मिलना चाहिए। पर अब ऐसा नहीं होगा। हमारा समाज लंकापति को खलनायक के बजाए महानायक के रूप में देश-विदेश में पहचान दिलवाएंगे और दशहर के दिन पुतला दहन करने वालों के खिलाफ आंदोलन करेंगे।

रावण का हो सम्मान
धनीराम पैंथर ने बताया कि, सम्राट अशोक ने विजयादशमी के दिन ही बौद्ध धर्म अपनाया था। डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने भी इसी दिन बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। इसलिए दहशरा पर्व पर लंकेश्वर का पुतला दहन करने के बजाए उनका अन्य महानायकों की तरह से सम्मान करना चाहिए। पर योगी सरकार के कार्यकाल के द्धारा होना असंभव है। क्योंकि वो आज भी रावण को खलनायक की तरह मानते हैं, वहीं श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं। पर अब ऐसा नहीं होगा। बौद्ध को मानने वाले लोग इसके खिलाफ आर-पार की जंग करेंगे और महानायक को सम्मान दिलाकर रहेंगे।

सपने दिखाए, पर पूरे नहीं किए
धनीराम पैंथर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के दलित समाज ने अपना नेता माना और वोट दिया। उन्होंने सपने दिखाए पर उन्हें पूरे नहीं किए। बीजेपी व कांग्रेस ने दलितों को छला है। इसी के कारण पंजा यूपी के साथ देश से धीरे-धीरे की गुम हो गया और बीजेपी की बारी है। हम रावण को मानते हैं और अपने वचन के पक्के होते हैं। धनीराम ने कहा कि अभी हमारा संगठन ज्यादा से ज्यादा दलितों को जागरूक कर रहा है और रावण के बताए रास्ते पर चल रहा है। हमें हमारा हक चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो समाज आंदोलन करेगा और अपनी रोटी सरकार से छीनेगा।

उसकी तरक्की हुई
धनीराव बौद्ध ने कहा कि बौद्ध धर्म दया, करुणा, मैत्री और विश्वबंधुत्व की शिक्षा देता है। भगवान बुद्ध के दर्शन का जिस देश या व्यक्ति ने अनुशरण किया, उसकी तरक्की हो गई। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने भी बौद्ध धर्म के अनुरूप ही अपनी विचारधारा से समाज को प्रेरित किया। उन्होंने अंधविश्वास से छुटकारा दिलाया और सम्मान व स्वाभिमान से जीना सिखाया। बौद्ध भिक्षु और पंचशील पाठ के बाद मौजूद लोगों को बौद्ध धम्म की दीक्षा देकर धम्म संस्कार संपन्न कराया। बौद्ध भिक्षु ने बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाओं की शपथ दिलाई। कहा कि दशहरा के दिन सम्राट अशोक ने युद्ध न कर बौद्ध मत अंगीकार किया था। हिंसा पर अहिंसा की विजय के कारण ही इस दिन को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है।

Published on:
21 Oct 2018 02:36 pm