कानपुर

यह मंदिर देता है मौसम की भविष्यवाणी, 21 दिन के बाद हो सकती है तेज बारिश

कानपुर के भीतरगांव स्थित एक प्राचीन मंदिर है, जो सैकड़ों साल से मौसम की भविष्वाणी देता आ रहा है, मंदिर के गुम्मद पर रखे पत्थर में अभी पानी की बूंदे नही

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May 09, 2018

कानपुर। मौसम विभाग पिछले एक सप्ताह से भीषण बारिश और तूफान आने की चेतावनी दे रहा है, जिसके चलते जिला प्रशासन की टीमें प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए 24 घंटे अर्लट पर रहती हैं। लेकिन कानपुर का मानसूनी मंदिर ने इसके विपरीत भविष्यवाणी की है। मंदिर के छत पर ओस की बूंदें नहीं दिखीं, जिससे मंदिर प्रबंधक और ग्रामीणों का कहना है कि मौसम आने में करीब 21 दिन लग सकते हैं। क्योंकि मानूसनी मंदिर के अंदर अभी सिर्फ गर्मी है और छतें पूरी तरह से सूखी हैं। हां गुंबद पर बंदी घंटी थोड़ी-थोड़ी हरकत कर रही है, जिससे कहा जा सकता है कि कानपुर के साथ ही आसपास के जिलों में हल्की ध्रूलभरी आंधी आ सकती है। बतादें कानपुर में पौराणिककाल के जगन्नाथ मन्दिर की छत पर एक अलौलिक पत्थर जुड़ा हुआ है जो मानसून आने की भविष्यवाणी 15 दिन पहले कर देता है।
अभी बरसात की नहीं उम्मीद
पिछले हफ्ते कानपुर के साथ ही देश के कई राज्यों में भीषण तूफान आया था, जिससे करोड़ों रूप्ए की संपत्ति के साथ ही दर्जनों लोगों की मौत हुई थी। इसी के बाद मौसम विभाग ने 7 मई से लेकर 10 मई तक भीषण तूफान के साथ बारिश होने की चेतावनी दी थी। इससे शासन-प्रशासन ने स्कूलों को बंद करा दिया और रेस्क्यू टीमों को अर्लट पर रहने के आदेश दे दिए। लेकिन कानपुर सिथत भीतरगांव के पौराणिककाल के जगन्नाथ मन्दिर, जिसे लोग मानसूनी मंदिर के नाम से पुकारते हैं ने बारिश के अभी कोई संकेत नहीं दिए। मंदिर के पुजारी की मानें तो 1 से लेकर पांच जून तक बारिश होने की संभावना है। इस वर्ष बारिश पिछले साल की तुलना में कम होगी। क्योंकि मंदिर के पत्थर में अभी बूंदें नहीं आई। अगर हल्की सी भी होश दिख जाती तो बारिश शुरू हो जाती। मंदिर के पुजारी ने लोगों से अपील की है कि हल्की धूल भरी आंधी आ सकती है। बरसात की अभी कोई संभावना नहीं है।
हैं।
मानसून की सटीक भविष्यवाणी
कानपुर शहर से करीब 45 किलोमीटर दूर एक इलाका है घाटमपुर तहसील सिथत बेहटा बुजुर्ग गांव में अदभुत और विलक्षण एक मंदिर है, जो मानसून की सटीक भविष्यवाणी के लिए देश व प्रदेश में विख्यात है। मई माह में भीषण गर्मी के चलते आमशहरी परेशान थे, तो वहीं अन्नदाता भी बारिश न होने के चलते निराश थे। सैकड़ों किसान भगवान् जगन्नाथ,सुभद्रा और बलभद्र एक शिलाखंड की प्रतिमा और उसके ठीक ऊपर छत पर लगे चमत्कारी पत्थर पर के पास आकर इसी आस में बैठ जाते थे, कि कब पानी की बूंदे टपगेंगी, और कब बरसात होगी। लेकिन एक से लेकर 9 मई तक मंदिर पर रखे पत्थर पर अभी कोई चहलकदमी नहीं दिखी। पत्थर में ओस की एक भी बूंद नजर नहीं आई। जिससे मंदिर प्रबंधक का मानना है कि इसबार मौसम जून में आएगी और 1 से लेकर 5 जून के बीच बारिश हो सकती है।
चमत्कारी पत्थर
यह अनूठा मंदिर पूरे उत्तर प्रदेश में मानसून की दिशा और दशा बताने वाला मंदिर कहलाता है। मंदिर के अन्दर भगवान् जगन्नाथ जी की प्रतिमा के ठीक ऊपर छत में एक चमत्कारी पत्थर भी है जो उत्तर प्रदेश में मानसून आने की भविष्यवाणी करता है। मंगलवार को मंदिर के अन्दर भगवान् जगन्नाथ,सुभद्रा और बलभद्र एक शिलाखंड की प्रतिमा और उसके ठीक ऊपर छत पर लगे चमत्कारी पत्थर से पानी यी ओश नहीं दिखी। मोतियों की तरह पत्थर पर छलकने वाली पानी की बूंदे अभी दस्तक नहीं दी हैं। किसानों का कहना है कि मंदिर ने अभी मौसम की भविष्यवाणी नहीं की। जिसके चलते खेतों में खड़ी फसल की कटाई आराम से हो जाएगी। पिछले साल मई में बारिश हो गई थी और इस साल भी बुधवार को हल्की बारिश हुई पर मंदिर के पत्थर से बूंदे नहीं टपकी। किसान सुबह और शाम को मंदिर में आकर पूजा-पाठ करते हैं और पत्थ्र की तरफ देखकर मौसम की जानकारी करते हैं।
तो बूंदों का टपकना बंद हो जाता
मंदिर के पुजारी ने बताया कि मोतियों के सामान पानी की बूंदों का टपकना तब तक जारी रहता है जब तक उत्तर प्रदेश में मानसून नहीं आ जाता और जब मानसून आ जाता है तो बूंदों का टपकना बंद हो जाता है । पुजारी के मुताबिक अगर पत्थर से पानी की बूंदें न टपकी तो पूरे प्रदेश में सूखा पड़ेगा और अगर पानी की बूंदों ने अंगड़ाई ली तो क्या मजाल कि मानसून 15 दिन के अन्दर ना आये। यह भविष्यवाणी भगवान् जगन्नाथ महाराज के आदेश पर ही पत्थर से होती है और इसी भविष्यवाणी पर आस पास के 100 गांवों के किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के साथ फसलों और खेतों की सफाई-बुआई की तैयारी शुरू करते हैं। मंदिर की इस भविष्यवाणी पर विश्वास करने वाले लोग आज के वैज्ञानिक युग में मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणियों पर भरोसा नहीं करते और उन्हें इस मंदिर में लगे पत्थर के सामने फेल बताते हैं।
साइंटिस्ट भी नहीं लगा पाए पता
पुरातन काल के इतिहास को संजोये और मौसम विज्ञान और साइंस को चुनौती देता आ रहा है। बहुत सारे साइंटिस्ट आए, लेकिन पानी की बूंदे कहां से आती हैं इसका पता नहीं लगा पाए। पत्थर के आस पास क्या दूर तक कहीं भी पानी का कोई स्रोत नहीं होता फिर भी कडकती धूप में पत्थर से पानी की बूंदे छलकती हैं कोई नहीं जानता कि पानी की यह बूंदे कहां से आती हैं। सीएसए के साथ ही देश के कई साइंटिस्टों ने मंदिर में आकर पानी की बूंदों की खोज की पर पता लगाने में अस्फल रहे। सीएसए के मौसम वैज्ञानिक अनुरूद्ध दुबे भी कहते हैं कि हां जगन्नाथ भगवान के मंदिर का इस रहस्य से आज तक कोई परदा नहीं उठा सका। हम भी कई बार जा चुके है पर पानी की बूंदें कहां से आती हैं इसकी खोज नहीं कर पाए।

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Updated on:
09 May 2018 12:58 pm
Published on:
09 May 2018 04:04 pm
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