सीसामऊ विधानसभा सीट पर पिछले 20 सालों से बीजेपी को जीत का इंतजार है। 2017 के चुनाव में सपा ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। रैली पर रोक लगने के बाद प्रत्याशी डोर टू डोर जाकर लोगों से वोट मांग रहे हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सीसामऊ के मतदाता जब 20 फरवरी को वोट डालने जाएंगे तो उनके मन में क्या चल रहा होगा। 10 मार्च का रिजल्ट यह बताएगा।
कानपुर महानगर में 10 विधानसभा सीटें हैं जिसमें सीसामऊ विधानसभा सीट हाईप्रोफाइल विधानसभा सीट में गिनी जाती है। यहां से बीजेपी ने सलिल विश्नोई को टिकट दिया है। जबकि समाजवादी पार्टी ने हाजी इरफान सोलंकी और कांग्रेस से हाजी सोहेल अहमद को टिकट दिया है। बहुजन समाज पार्टी ने रजनीश तिवारी को प्रत्याशी बनाया है। निर्वाचन आयोग द्वारा रैलियों पर रोक के बाद यहां पर डोर टू डोर संपर्क करके प्रत्याशी वोट मांग रहे हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सीसामऊ विधानसभा का ऐतिहासिक महत्व है। यहां अति प्राचीन वन खंडेश्वर मंदिर स्थित है। इसके अतिरिक्त अन्य कई मंदिर विधानसभा क्षेत्र में है। जो काफी खराब हालत में है। चर्चा है कि मंदिरों के जीर्णोद्धार को लेकर बीजेपी प्रत्याशी मतदाताओं के बीच जा रहे हैं
मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र
सीसामऊ विधानसभा मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा है। जहां सबसे अधिक मुस्लिम मतदाताओं की संख्या है। दूसरे नंबर पर ब्राह्मण मतदाता है। विधानसभा के जातीय समीकरण पर नजर डाली जाए तो यहां की कुल मतदाता संख्या 271413 है। जिसमें मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक लगभग 80 हजार है। इसी प्रकार ब्राह्मण लगभग 55 हजार, दलित 35 हजार,कायस्थ 20 हजार, वैश्य 15 हजार, यादव 16 हजार, सिंधी पंजाबी 2000 है। इसके अतिरिक्त वोटरों की संख्या लगभग 35 है।
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हाजी इरफान सोलंकी से कड़ा मुकाबला
2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी ने जीत हासिल की थी। 2012 के पूर्व यह सीट आरक्षित श्रेणी में आती थी। नए परिसीमन के बाद सीसामऊ को सामान्य सीट के रूप में चयनित किया गया। 2017 तक हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सबसे अधिक 5 बार जीत हासिल की है जबकि भाजपा को तीन बार सफलता मिली है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने दो बार इस सीट पर जीत हासिल की है। 1996 में बीजेपी ने यहां से जीत हासिल की थी। उसके बाद से उसे जीत का इंतजार है।