कानपुर

एसटीएफ ने कछुआ तस्कर को किया गिरफ्तार, चीन और कोरिया सहित कई देशों में होता था निर्यात

केन्द्रीय वन्य जीव अपराध नियन्त्रण ब्यूरो की सूचना पर एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने साझा इन इलाकों में ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया।

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Mar 31, 2018
kanpur

कानपुर. गंगा और यमुना की तलहटी वाले इलाके टर्टल के अवैध शिकार और अन्तर्राष्ट्रीय तस्करी का केन्द्र बने हुए हैं। यहां बड़े पैमाने पर कछुआ को पकड़ कर उनके खोल को चीन, कोरिया, मलेशिया, बांग्लादेश सहित कई देशों में तस्कर अवैध रूप से बिक्री कर अपनी जेबे गर्म करते थे। केन्द्रीय वन्य जीव अपराध नियन्त्रण ब्यूरो की सूचना पर एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने साझा इन इलाकों में ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया। जहां से टीम ने एक तस्कर को अरेस्ट कर उसके पास बड़ी संख्या में कछुओं के खोल बरामद किये। आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि ये शैली चीन और कोरिया जैसे बौद्ध देशों में मर्दाना शक्तिवर्धक सूप बनाने के लिये सप्लाई किये जाने थे और इसकी कीमत हम लोगों को मुहंमांगी मिलती थी। एसटीएफ की ठीम आरोपी के अन्य साथियों को दबोचने के लिए प्रयास कर रही है।


कछुओं के खोलों की हो रही थी तस्करी
उत्तर प्रदेश में यमुना की तलहटी वाले इलाके टर्टल के अवैध शिकार और अन्तर्राष्ट्रीय तस्करी का केन्द्र बने हुए हैं। देश में कछुओं की 29 प्रजातियॉ पायी जाती हैं जिनमें से 15 प्रजातियॉ अकेले उत्तर प्रदेश में पायी जाती हैं। इन प्रजाति के कछुओं का अवैध व्यापार मास और उनके कठोर कवच यानि शेल को बेचने के लिये किया जाता है। एशिया के कई हिस्सों में कछुओं को पालने या शिकार करने की प्राचीन परम्परा है लेकिन सन् 1970 में ; (the Convention on International Trade in Endangered Species) के तहत कछुए को पालतू बनाने और मारने पर रोक लगा दी गयी। इसके बाद से कछुआ तस्करों के निशाने पर आ गया। देश के डब्लूसीसीबी यानि वन्य जीव अपराध नियन्त्रण ब्यूरो को लगातार खबर मिल रही थी कि कानपुर और आसपास के जिलों में कछुओं को काटकर उनके खोल पश्चिम बंगाल पहुंचाये जा रहे हैं और वहं से अन्तर्राष्टीय तस्कर बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते चीन, हॉगकॉग, मलेशिया आदि देशों में सप्लाई देते हैं।


सेंट्रल रेलवे स्टेशन से धरा गया आरोपी
ब्यूरो की इस सूचना पर एसटीएफ के वाईल्ड लाईफ संरक्षण दस्ते तस्करी की अगली खेप के बारे में जानकारी जुटाई और तस्करों के कुरियर सलीम शेख को कानपुर सेण्ट्रल रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार कर लिया। शेख दो बैग्स में लगभग 27 किलोग्राम वजन के कछुआ खोलों को ब्रह्मपुत्र मेल से ले जाने वाला था। सलीम ये शेल 5000 रूपये किलो की कीमत पर शिकारियों से खरीदता था और आगे मुंहमांगी कीमत पर तस्करों के हवाले करता था। एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि कानपुर के अलावा इटावा, चंबल और गंगा कटरी के इलाकों में तस्कर कछुओं को पकड़ते हैं और उन्हें मारकर कछुओं के खोलों को अंतराष्ट्रीय बाजार में बेच देते हैं। एसटीएफ की टीम पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए लगी हुई है।


माफिया चला रहे करोबार
जानकारों का कहना है कि यमुना और गंगा के किनारे रहने वाले ग्रामीण बड़े पैमाने पर कछुओं को रात में पकड़ते हैं और माफिया उन्हें खरीद कर विदेश सप्लाई करते हैं। माफियाओं ने गांववालों को इस काम के लिए अच्छा पैसा देते हैं। एसटीएफ के पुलिस अधिक्षक ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया है कि कछुआ पकड़ने का कार्य ग्रामीण करते हैं और उनसे कई माफिया खरीदकर हमारे जरिए कोलकाटा पहुंचाते हैं। यहां से इंटरनेशनल तस्कर हमसे डिलेवरी लेकर पैसा देने के बाद माल विदेश भेज देते हैं। अब पूरे प्रकरण पर स्थानीय पुलिस, वन विभाग और एसटीएफ की टीम लग गई हैं और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही हैं।

Published on:
31 Mar 2018 09:00 am