कानपुर

ईराक से जारी फतवे पर वसीम रिजवी का पलटवार, पत्र भेजने वालों पर दर्ज कराऊंगा एफआईआर

मुस्लिम समाज के लोगों ने ईराक के शिया धर्म गुरू आयतुल्ला अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी को पत्र के जरिए मांगा था फतवा, इसी के बाद रिजवी पर रखी शर्त, जिसे उन्होंने मांगने से किया इंकार
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Aug 28, 2018
Waseem Rizvi gave a big statement on fatwa issued from Iraq in kanpur
ईराक से जारी फतवे पर वसीम रिजवी का पलटवार, पत्र भेजने वालों पर दर्ज कराऊंगा एफआईआर

कानपुर। पिछले दिनों यूपी के मुस्लिम समाज के लोगों ने ईमेल के जरिए ईराक के शिया समाज के सर्वोच्च शिया धर्म गुरु आयतुल्ला अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी के पास एक पत्र भेज कर एक प्रश्न का उत्तर मांगा था। जिसका जवाब 25 अगस्त को आ गया। जवाब में धर्म गुरू ने शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी को गैर इस्लामिक करार देते हुए उन्हें अयोध्या मामले से अपने को अलग करने के साथ कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने का फतवा दिया है। यदि वो ऐसा नहीं करते तो उन्हें न शिया माना जाएगा और न ही मुसलमान। इसी के बाद वसीम रिजवी से इस पर उनकी राय मांगी गई तो उन्होंने कहा कि मैं पहले देशभक्त इंसान फिर मुसलमान हूं और ताउम्र रहूंगा। मैं विदेशी ताकतों के सामनें सरेंडर नहीं करूंगा। कोर्ट में दायर याचिका भी वापस नहीं लूंगा। जिन्होंने ईराक के जरिए मेरे खिलाफ फतवा मंगवाया है उनके खिलाफ जल्द एफआईआर दर्ज करवाऊंगा। साथ ऐसे लोगों की जांच के लिए सरकार से मांग भी करूंगा।

क्या है पूरा मामला
मुस्लिम बुद्धिजीवी डॉक्टर मजहर अब्बास नकवी ने बताया कि देश-प्रदेश के शिया धर्म गुरूओं और इस्लाम के जानकारों ने ईराक के सबसे बड़े शिया धार्मिक गुरू को पत्र के जरिए जानकारी मांगी थी। पत्र में लिखा गया था कि, क्या कोई मुसलमान वक्फ संपत्ति को मंदिर या अन्य किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए दे सकता है। इसके जवाब में शिया धर्म गुरु सिस्तानी ने कहा है कि कोई भी शिया संपत्ति किसी दूसरे धर्म के लोगों को नहीं दी जा सकती है। अगर वसीम रिजवी ने ऐसा किया है तो वो सरासर गलत है। धर्म गुरू ने फतवे में लिखा है कि वसीम रिजवी को सर्वोच्च न्यायालय से अपनी याचिका वापस ले लेनी चाहिए। अगर वो ऐसा नहीं करते तो शिया के अलावा उन्हें मुस्निलम समाज से बाहर कर दिया जाएगा। इस मामले शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा हम संविधान के बनाए नियमों के तहत चल रहे हैं और वो विदेशी ताकतों के चलते देश को बांटने में तूले हैं। जब तक हम ऐसे लोग जिंदा हैं, उनके मंसूबो को कभी कामयाब नहीं होने देंगे।

दो ही विकल्प बचे
डॉक्टर मजहर अब्बास ने कहा कि अगर वसीम रिजवी शिया धर्म गुरू के दिए फतवे को नहीं मानते तो तो वह शिया समुदाय से खारिज हो जाएंगे। वसीम रिजवी अपनी याचिका वापस लें। अयोध्या विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिये और बेवजह की बयानबाजी से बचना चाहिए। अगर वसीम रिजवी ऐसा नहीं करते हैं तो न तो उन्हें शिया माना जाएगा और न ही मुसलमान। डॉ. नकवी ने कहा कि इस फतवे के आने के बाद वसीम रिजवी के पास दो ही विकल्प हैं, या तो अपना धर्म परिवर्तन कर लें अन्यथा अपनी याचिका वापस ले लें। उन्होंने कहा कि वसीम रिजवी के खिलाफ सीबीआइ जाच चल रही है, इसलिए खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। डॉथ्टर मजहर ने कहा कि मोहर्रम के बाद रिजवी के खिलाफ पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा और उन्हें मुस्लिम समाज से बाहर किया जाएगा।

फतवा मंगवाने वाले देशद्रोही
शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने इस मामले पर कहा कि ईराक से जारी फतवे के बारे में मुझे जानकारी मिली है। जिन्होंने ईराक के धर्म गुरू के पास पत्र के जरिए हमारे खिलाफ फतवा मांगा है वो देशद्रोही हैं। हम वकीलों से सलाह ले रहे हैं और जल्द इन सबके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। रिजवी ने कहा कि हम एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं और हमारा यह कर्तव्य बनता है कि देश को अमन के रास्ते पर ले जाया जाए। इसी के चलते हम अयोध्या मामले को कोर्ट में लेकर गए। हम चाहते हैं कि वहां भगवान श्रीराम का भव्य ंमदिर बनें और दूसरी जगह देश की सबसे बड़ी मस्जिद को निर्माण हो। इससे दोनों समुदायों के बीच भाई-चारा बढ़ेगा। पर फतवा मांगने वाले लोक आतंकी संगठनों से मिलें हैं और देश को तोड़ना चाहते हैं। इनकी जगह खुले में नहीं, बल्कि सलाखों के पीछे होनी चाहिए और हम जल्द ही ऐसे सभी लोगों को कानून के तहत सजा दिलवाएंगे।

मैं पहले एक इंसान
शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि ईराक के धर्म गुरू ने फतवे में देते वक्त दो शर्ते रखीं है। पर मैं उनकी एक भी शर्त को नहीं मानूंगा। शिया य मुसलमान होने से पहले मैं एक इंसान हूं और मैं इंसान रहना पसंद करूंगा। फतवा मंगवाने वालों से मैं प्रश्न करता हूं कि वे बताएं कि मुस्लिम क्यों शिक्षा से दूर हैं। उन्होंने देश के करीब 22 करोड़ मुसलमानों के लिए अभी तक क्या किया है। हां उन्होंने त्रिपत तलाक के आंड़ में महिलाओं का शोषण किया। हलाला का शिकार बनाया। केंद्र में मोदी और यूपी में योगी सरकार आने के बाद इन लोगों की रोटी-रोजी पर लगाम कस गई है और इसी के चलते अब विदेशी ताकतों का सहारा ले रहे हैं। मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिलेगा, तो वहीं आमसहमति से भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण होगा और इसे कोई रोक नहीं पाएगा।

Published on:
28 Aug 2018 11:50 am