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15 घंटे, एक कारोबारी और अनगिनत सवाल: आखिर हुआ क्या? हत्या, हादसा या साजिश? हर सुराग की परतें खंगाल रही पुलिस

Devesh shukla case: चकरपुर मंडी से लापता हुए आलू कारोबारी देवेश शुक्ला की मौत की जांच में 15 घंटे का रहस्य सबसे बड़ी चुनौती बना है। पुलिस सीसीटीवी, कॉल डिटेल, गवाहों के बयान और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर हादसे, हत्या या साजिश की हर संभावना की जांच कर रही है।
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कानपुर

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Avanish Kumar

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Updated: 6 Aug 2026, 4:15 PM IST

Kanpur News

कारोबारी की फाइल फोटो

Devesh Shukla Death Mystery: कानपुर चकरपुर मंडी से लापता हुए आलू कारोबारी देवेश शुक्ला की मौत अब कानपुर पुलिस के लिए सबसे जटिल मामलों में शामिल हो गई है। दो जुलाई को मंडी से निकलने के बाद तीन जुलाई को पनकी में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिलने तक के करीब 15 घंटे अब भी रहस्य बने हुए हैं। यही वह समय है, जिसे जोड़ने में पुलिस की पांच टीमें लगातार जुटी हैं। सवाल कई हैं—देवेश इस दौरान कहां रहे, किन लोगों के संपर्क में आए, उनके माथे पर गंभीर चोट कैसे लगी और आखिर उनकी मौत हादसे का नतीजा थी या किसी साजिश का हिस्सा?

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के निर्देश पर एसओजी और थाना पुलिस समेत पांच अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। हर टीम को जांच का अलग दायित्व सौंपा गया है। एक टीम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है तो दूसरी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण कर रही है। अन्य टीमें अस्पताल के रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्यों, गवाहों के बयान और घटनास्थल से जुड़े हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं।

15 घंटे की गुत्थी सुलझाने में जुटी पांच टीमें

पुलिस अब तक एंबुलेंस के ईएमटी इंद्रपाल उर्फ अजय कुमार, घटनास्थल के पास चाय की दुकान चलाने वाले व्यक्ति, इलाज करने वाले डॉक्टर समेत एक दर्जन से अधिक लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। इसके अलावा घटनास्थल और आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई है। हालांकि अभी तक ऐसा कोई निर्णायक साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि देवेश की मौत दुर्घटना का परिणाम थी या उनके साथ कोई आपराधिक वारदात हुई।

चाय की दुकान से मिले अहम सुराग

जांच के दौरान एक चाय की दुकान अहम कड़ी बनकर सामने आई है। दुकानदार ने पुलिस को बताया कि तीन जुलाई की दोपहर करीब 12:30 बजे देवेश दुकान पर पहुंचे थे। उन्होंने पानी पिया, कुछ देर बैठे और फिर उठते ही अचानक जमीन पर गिर पड़े। दुकानदार का यह भी कहना है कि उसी दिन सुबह उसने देवेश को पास में खराब खड़े एक ट्रक के आसपास घूमते देखा था।

वहीं कुछ ट्रक चालकों ने भी पुलिस को बताया कि उन्होंने रात करीब 12 से एक बजे के बीच देवेश को उसी स्थान के आसपास पड़े हुए देखा था। इन बयानों के बाद जांच इस सवाल पर केंद्रित हो गई है कि रात से दोपहर तक वह उसी इलाके में क्यों रहे और इस दौरान उनके साथ आखिर क्या हुआ।

मंडी से पनकी तक खंगाला जा रहा पूरा रूट

जांच टीम चकरपुर मंडी से लेकर पनकी स्थित घटनास्थल तक पूरे रास्ते की बारीकी से पड़ताल कर रही है। पेट्रोल पंप, दुकानों, प्रतिष्ठानों और मार्ग में लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मंडी से निकलने के बाद देवेश किस रास्ते से गए और किन लोगों के संपर्क में आए। अब तक कोई ऐसा फुटेज नहीं मिला है, जो पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठा सके।

पुलिस की चूक भी बनी बड़ा सवाल

मामले की जांच के बीच पुलिस की गंभीर लापरवाही भी सामने आई है। पनकी पुलिस ने पंचनामा और पोस्टमार्टम के दौरान पुलिस ग्रुपों में प्रसारित देवेश की तस्वीर का मिलान नहीं किया और शव को अज्ञात मानते हुए अंतिम संस्कार करा दिया। बाद में दिवंगत के भाई अधिवक्ता विकास शुक्ला के फोरेंसिक कार्यालय पहुंचने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ।

इस चूक के बाद चौकी प्रभारी समेत दो दरोगाओं को निलंबित कर दिया गया, जबकि पनकी और सचेंडी थाना प्रभारियों की भूमिका की विभागीय जांच कराई जा रही है। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर, फोरेंसिक रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों को जोड़कर देवेश शुक्ला के आखिरी 15 घंटे की पूरी टाइमलाइन तैयार करने में जुटी है। यही टाइमलाइन तय करेगी कि यह मामला हादसे का था, हत्या का या फिर किसी गहरी साजिश का।