
बालघाट. तेज सर्दी में रात के सन्नाटे के बीच खेतों में लहलहाती गेहूं-सरसों की फसल को वन्यजीव नष्ट कर रहे हैं। तेज सर्दी में फसल की रक्षा करना किसानों पर भारी पड़ रहा है। नीलगाय, हिरण, रोजड़े आदि ने किसानों का जीना मुश्किल कर दिया है। फसल को बचाने के लिए किसानों को रातभर जागना पड़ता है। रात के अंधेरे में वन्यजीव किसानों पर हमला भी कर जाते हैं। किसानों ने बताया कि काफी मेहनत से फसल तैयार की थी, लेकिन आवारा जानवर फसल के दुश्मन बने हुए हैं। आवारा जानवरों को भगाने के लिए आतिशबाजी करनी पड़ती है या फिर शोर मचाना पड़ता है। क्षेत्र में आवारा गौवंश की भी भरमार है। जो कि खेतों में भटकता रहता है। खेतों में रात को ठहरने के लिए किसानों ने मचान बनाई है। जिसमें बैठकर वे आवारा जानवरों पर निगरानी
रखते हैं।
जटनंगला. सर्द रातों में कड़ी मेहनत कर अच्छी उपज की उम्मीद संजो रहे धरतीपुत्र की फसल को आवारा मवेशी चौपट कर रहे हैं। आवारा मवेशी के साथ आवारा पशु चौबीसा क्षेत्र के गावों में सैंकड़ों किसानों की हजारों बीघा भूमि पर उगाई गई फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान
हो रहा है। किसान अपने खेतों में खडी गेहूं, चना व सरसों की फसल की सुरक्षा के लिए ठिठुराती ठंड में रात-दिन मेहनत कर रहा है। लेकिन आवारा पशु उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने में कसर नहीं छोड़ रहे।
कई किसानों ने अब खेतों में ही मचान व झोंपडी बनाकर फसल की रखवाली करना शुरु कर दिया है। किसान बलवीर, अमरसिंह, इन्दरसिंह ने बताया कि क्षेत्र के जटनंगला, शेरपुर हाड़ोली, राराशाहपुर, चिनायटा, खीपकापुरा, जगर, खेडी हैवत, ढिंढोरा, खिजूरी, सोमला, सोमली, कारवाडी, खानाका, खरेटा आदि गांवों में आवारा पशु फसलों नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों ने बताया कि आवारा पशु झुंड के रूप में खेतों में घुस फसल खराब कर रहे
हैं। किसानों ने कई बार ग्राम पंचायत सरपंचों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से आवारा जानवरों पर नकेल कसने की मांग की, लेकिन हालात जस के तस बने हैं।