
शहर के लोगों को दो पल सुकून से बैठने, घूमने के लिए स्वच्छ वातावरण युक्त स्थान, हवा के लिए एक अदद पार्क की आवश्यकता है। वर्तमान में नगर परिषद क्षेत्र में सभी पार्क बदहाली में नजर आ रहे हैं।
हरियाली के अभाव में इन पार्कों में सुबह-शाम सुकृून से दो पल बिताने के लिए बैठने को मन नहीं करता। पार्कों के प्रति नगर परिषद की उदासीनता से महज चारदीवारीयुक्त भूखण्ड बन कर रह गए हैं। यूं तो नगर परिषद ने शहर के विभिन्न इलाकों में आधा दर्जन से अधिक पार्क निर्मित किए हुए हैं। शहर में चौपड़ सर्किल स्थित नेहरू बाल उद्यान, राष्ट्रीय उद्यान, मनीराम राजौरा पार्क, मोहननगर स्थित छोटा पार्क, टंकी वाला पार्क, विवेकानंद पार्क व टेलीफोन एक्सचेंज के पास स्थित आदर्श पार्क सहित आठ पार्क हैं।
कभी शहर का आकर्षण रहे ये पार्क दशकों से रखरखाव नहीं होने से वीरान हो गए हैं। सुविधा और संसाधनों के अभाव के चलते अब लोग पार्कों में जाने से कतराते हैं। स्थिति यह है कि दो वर्ष से सौंदर्यीकरण के लिए एक भी पौधा नहीं रोपा गया। एक पार्क को छोड़ लंबे समय से बरती जा रही अनदेखी से पार्कों में हरी दूब का लॉन तो दूर घास का तिनका तक नहीं हैं। ऐसे में सुबह-शाम भ्रमणार्थियों व पथिकों से आबाद रहने वाले ये पार्क सूने नजर आते हैं। परिषद के पास पार्कों के संभालने के लिए पर्याप्त बागवान व चौकीदार नहीं है। दो बागवान हैं वे पार्कों के बजाय परिषद कार्यालय व अन्य कार्यों में ड्यूटी पूरी कर रहे हैं।
कचरा स्थल बने पार्क: परिषद की अनदेखी के बीच लोगों की उपेक्षा भी पार्कों पर भारी पड़ रही है। आसपास के लोग इनमें कचरा डालने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। राट्रीय पार्क के अलावा अन्य पार्कों की यदाकदा भी सफाई नहीं होती है। मोहन नगर स्थित छोटे पार्क में गंदगी का आलम होने से सफाई कर्मचारी भी पार्क में कचरा डालने लगे हैं।
क्षतिग्रस्त दरवाजा, टूटी चारदीवारी
अधिकांश पार्कों में आवारा जानवरों का जमावड़ा रहता है। यहां जानवरों के प्रवेश को रोकने के लिए चारदीवारी व दरवाजे की व्यवस्था नहीं है। टूटे दरवाजे और चारदीवारी से पार्कों में मवेशी, सूअर प्रवेश कर विचरण करते रहते हैं। चौपड़ स्थित नेहरू पार्क में चारदीवारी तो है, लेकिन दोनों तरफ के दरवाजे टूटे हुए हैं। मोहननगर स्थित छोटे पार्क की चारदीवारी क्षतिग्रस्त है।
लोग उठा रहे बीड़ा
पार्कों की सारसंभाल की जिम्मेदारी भले ही नगर परिषद की हो, लेकिन राष्ट्रीय पार्क की सारसंभाल में पुरानी आबादी के लोग ही खुद बीड़ा संभाले हुए हैं। केशवपुरा निवासी महेश सोनी ने बताया कि पार्क में सुबह मॉर्निग वॉक पर आने वाले लोगों की समिति बनाई हुई। इसी केे तहत पार्क में सफाई व पौधरोपण सहित अनेक कार्यक्रम किए जाते हैं। पार्क में अलसुब्बह 30-40 लोग नियमित घूमने पहुंचते हैं।