करौली

यहां खेती की सेहत सुधारेंगे जिले के पांच हजार किसान,एक हजार हैक्टेयर में प्रथम चरण में होगी जैविक खेती

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Oct 16, 2018
Five thousand farmers will do organic farming, the group of farmers wi
यहां खेती की सेहत सुधारेंगे जिले के पांच हजार किसान,एक हजार हैक्टेयर में प्रथम चरण में होगी जैविक खेती


करौली. जिले में फसलों के उत्पादन में अंधाधुंध रसायनिक खाद पदार्थों के उपयोग से खराब हो रही खेती की सेहत को सुधारने के लिए कृषि विभाग ने कवायद शुरू की है। इसके तहत पांच हजार किसान जैविक खेती करेंगी, खेती के उत्पादन पर किसानों का समूह निगरानी रखेगा। परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत सरकार ने जैविक खेती की योजना चलाई हुई है। योजना में करौली जिले में एक हजार हैक्टेयर में जैविक खेती होगी। योजना के अनुसार चयनित पांच हजार किसानों से एक-एक हैक्टेयर में परम्परागत तरीके से फसल का उत्पादन करने का अनुबंध किया जाएगा। इसकी निगरानी पहली बार किसानों के समूह को दी जाएगी। समूह में शामिल किसान एक-दूसरे के खेतों पर जाकर देखेंगे कि परम्परागत तरीके से खेती हो रही है। यदि किसी खेत में कीटनाशक दवा का छिडक़ाव मिला तो उसकी शिकायत विभाग के उच्च अधिकारियों को की जाएगी। जांच में कीटनाशक दवा का छिडक़ाव मिलने पर किसान को अनुदान की राशि नहीं दी जाएगी।
इस प्रकार मिलेगा अनुदान
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार परम्परागत खेती करने वाले किसान को बर्मी कम्पोस्ट पर अनुदान पांच हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा। इसी प्रकार अन्य खेतों के रसायन को परम्परागत खेती वाले खेत में आने से रोकने के लिए बफर जोन घोषित कर मेढ़ का निर्माण, जैविक उत्पादन इकाई स्थापना पर पर एक हजार तथा कुल ५० हजार रुपए का अनुदान किसान को एक कलस्टर में जैविक खेती के उत्पादन पर मिलेगा।
उत्पदान के बाद अनुसंधान
परम्परागत खेती से तैयार फसल के खेत से कटने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी जमीन की सेहत की जांच करेंगे, जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जमीन की सेहत में कितना सुधार हो पाया। इसी प्रकार परम्परागत तथा रसायनिक पदार्थों के उपयोग से हो रही खेती में अंतर क्या है। दोनों से जमीन को नुकसान हो रहा है या फायदा। अधिकारी बताते है कि तुलनात्मक रिपोर्ट बनाई जाएगी। अच्छे परिणाम आने पर परम्परागत खेती को अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ावा दिया जाएगा।
रिपोर्ट तैयार करेंगे
परम्परागत खेती पांच हजार किसान करेंगे। खेती के बाद जमीन की सेहत पर अनुसंधान होगा तथा तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
बीडी शर्मा उपनिदेशक कृषि विस्तार करौली।

Updated on:
16 Oct 2018 06:30 pm
Published on:
16 Oct 2018 06:30 pm