करौली

बिन पानी सिमट रहा जगर बांध, अब मानसून से भराव की आस

रीते जगर बांध में पेटा बना सपाट,छह माह से बांध के गेज पर सूखा

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Jun 26, 2021
बिन पानी सिमट रहा जगर बांध, अब मानसून से भराव की आस

हिण्डौनसिटी. चौबीसा क्षेत्र सहित आसपास के गांवों के भूजल स्तर के लिए जीवनदायिनी बना जगर बांध अब खुद प्यासा है। बीते साल कम बारिश होने से बांध का पेटा सपाट मैदान नजर आने लगा है। पाल से दूर पेटे के सूखने से क्षेत्र में भूजल स्तर में गिरावट की चिंता सताने लगी है। बांध की जलराशि रीतने पर अब क्षेत्र के लोग मानसून की मेहरबानी की आस लगा रहे हैं।

तीस फीट की भराव क्षमता के इस बांध में गेज के जीरो निशान पर पानी के बजाए रेत जमा हो गई है। बारिश नहीं होने से दीवारों को छूने वाला पानी अब छोटे दायरे में सिमट गया है। बीते वर्ष मानसून सीजन में जगर बांध में गेज तक महज 9.6 फीट जल भराव हुआ था। जो इस वर्ष के पहले महीने में ही सूख गया है। मानसून सीजन बीतने के दो-तीन माह बाद बांध में डेड स्टॉक (आरक्षित मात्रा) लायक पानी नहीं बचा। ऐसे में चौबीसा क्षेत्र के गांवों में किसानों को नहरों से सिचाई के लिए पानी मिलना तो दूर बांध के सूखने से भूजल स्तर के गिरने की चिंता सताने लगी है।

जलसंसाधन विभाग के अभियंताओं के अनुसार डांग क्षेत्र की कैचमेंट एरिया में बीते वर्ष मानसून सीजन में कम बारिश होने से बांध में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हो सकी। कमोबेश बीते दो वर्ष से बारिश की कमी के कारण पानी बांध की विंगवाल और वेस्टवीयर को छू नहीं सका है। अब सूखे बांध के पेटे में फिर से जल तरंगों की अटखेलियों के लिए क्षेत्र के किसान और विभागीय अधिकारियों को मानसूनी सीजन में अच्छी बारिश का इंतजार है। गर बीते वर्षों की तरह मानसूनी की बेरुखी रही तो आगामी महीनों में पेयजल संकट के हालात और गंभीर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

54 वर्ष पहले चली थी चादर
वर्ष 1957 में 88 वर्ग मील क्षेत्र में मिट्टी की पाल से जगर बांध में आधी सदी से अधिक समय समय पहले पानी की चादर चली थी। उस दौरान बांध की भराव क्षमता 27 फीट थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार वर्ष 1967 में कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश होने से 27 फीट ऊंची बेस्टवीयर बाल(पाल) पर तीन फीट ऊपर पानी की चादर चली थी। ऐसे में वर्ष 2004 में बांध की भराव क्षमता को 27 फीट से ऊंचा कर 30.6 फीट किया गया।

बिना पानी 12 वर्ष से सूखी हैं नहरें-
जगर बांध में पर्याप्त भराव नहीं होने से 12 वर्ष से नहरें सूखी पड़ी हैं। बांध से चौबीसा सहित 26 गांवों को सिंचाई क्षेत्र में शुमार किया हुआ है। इन गांवों में सिंचाई के लिए बांध का पानी पहुंचाने के लिए बांध से मुख्य नहर सहित आठ माइनर नहरों निकल कर रही है। जो बांध से पानी छोडऩे पर 6265 हैक्टेयर भूमि को सिंचित करती हैं। 44 किलोमीटर लम्बी नहर में 18 किलोमीटर मैन कैनाल व 26 किलोमीटर की आठ माइनर कैनाल हैं। बांध से नहरों में अंतिम बार 13 नवम्बर 2008 के बाद पानी छोड़ा गया था।

डेड स्टॉक से रिचार्ज होते नलकूप-
जगर बांध के पास पटपरीपुरा में हिण्डौन शहरी क्षेत्र के जलापूर्ति के लिए दो दर्जन से अधिक नलकूप लगे हैं। जिनसे जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग शहर में पेयजल आपूर्ति करता है। जन स्वास्थ्य अभियात्रिकी विभाग की मांग पर बांध में 8 फीट पानी डेड स्टॉक (आरक्षित) रखा जाता है। बांध में 288.89 एमसीएफटी पानी से आस-पास लगे सरकारी नलकूप रिचार्ज होते हैं। अब छह माह से बांध के सूखे होने नलकूपों के जलोत्पादन में के गिरावट की आशंका बनी है।

चम्बल का पानी आए तो मिले संजीवनी
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि चम्बल नदी का पानी आने पर भी जगर बांध में वर्ष भर जल भराव रह सकता है। बीते कई वर्षों से कम बारिश होने से बांध का गेज दहाई के अंक बमुश्किल छू पा रहा है। ऐेसे बाध में अल्प मात्रा का पानी कुछ माह में रीत जाता है। क्षेत्र के किसान करीब डेढ़ दशक से चम्बल नदी का पानी लिफ्ट परियोजना के जरिए पांचना बांध और फिर जगर बांध में लाने की मांग भी कर रहे हैं।

फैक्ट फाइल: जगर बांध
भराव क्षमता- 30.6 फीट गेज(1640 एमसीएफटी)
कैचमेंट एरिया - 227.80 वर्ग किलोमीटर
नहरों की लम्बाई- 44 किलोमीटर
सिंचाई के गांव- 26
सिंचाई क्षेत्रफल- 6265 हैक्टेयर भूमि

बांध में जल भराव की स्थिति
वर्ष-------- गेज
2016 ------26 फीट 6इंच
2017 ------15 फीट 6 इंच
2018 ------18 फीट 6 इंच
2019 -------11 फीट 2 इंच
2020------- 9 फीट 6 इंच (अब सूखा)

बारिश---वर्ष एमएम
2020--- 554 एममए
2021 ----84 एमएम( 21 जून तक)

इनका कहना है-
बारिश की कमीं से रीता बांध
अच्छी बारिश नहीं होने से बांध में पर्याप्त जल भराव नहीं हो रहा है। बीते मानसून सीजन में कैचमेंच एरिया में कम बारिश हुइ र्थी। गेज के पास पानी नहीं होने से बांध सूखा है। अब मानसून का इंतजार है।
शिवराम मीणा, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग, हिण्डौनसिटी

Updated on:
26 Jun 2021 10:05 am
Published on:
26 Jun 2021 09:58 am
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