
Rajasthan Patwari Transfer: करौली। राजस्थान में हाल ही में राजस्व विभाग ने पटवारियों की तबादला सूची जारी की थी। इस सूची में एक ऐसी प्रशासनिक चूक सामने आई है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि 10 जुलाई को 924 पटवारियों की तबादला सूची जारी की थी। सूची में उस महिला पटवारी उगंती प्रजापत का नाम भी शामिल कर दिया गया, जिनका 10 दिन पहले निधन हो चुका है। पटवारियों की तबादला सूची में मृतक पटवारी उगंती प्रजापत का नाम दर्ज होने की विभाग की यह चूक अब प्रशासनिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
जानकारी के अनुसार, टोडाभीम क्षेत्र के भनकपुरा हल्के में कार्यरत पटवारी उगंती प्रजापत का 30 जून को निधन हो गया था। बताया जा रहा है कि उनके निधन की जानकारी विभागीय अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को भी थी। इसके बावजूद राजस्व विभाग ने 10 जुलाई को जारी पटवारी स्थानांतरण सूची में उनका नाम शामिल करते हुए उन्हें टोडाभीम से उनके गृह जिले अलवर स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए। इसके बाद यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया।
कर्मचारियों का कहना है कि तबादला सूची जारी करने से पहले सेवा रिकॉर्ड, सेवानिवृत्ति, निधन और वर्तमान पदस्थापन का अंतिम सत्यापन होना चाहिए था। वहीं, राजस्व विभाग का दावा है कि सभी तबादले निर्धारित प्रक्रिया और कर्मचारियों के प्रार्थना-पत्रों के आधार पर किए गए हैं, लेकिन इस मामले ने उस दावे की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
वहीं राजस्व मंडल की तबादला सूची में डीग-कुम्हेर विधायक डॉ. शैलेष दिगम्बर सिंह को पटवारी समझकर उनका तबादला कर दिया। दरअसल, विधायक ने किसी पटवारी के तबादले की सिफारिश भेजी थी, जिसे अधिकारियों ने 'प्रार्थना पत्र' मानकर 10 जुलाई को सूची में शामिल कर लिया। हालांकि, बाद में राजस्व मंडल से जुड़े अधिकारियों ने इसे मानवीय त्रुटि बताया।
गौरतलब है कि राजस्थान में राजस्व विभाग ने बड़े स्तर पर तबादला आदेश जारी किए थे। रेवेन्यू बोर्ड की ओर से प्रदेश के 924 पटवारियों के तबादले किए गए। वहीं, 552 तहसीलदार और 246 नायब तहसीलदार व 165 गिरदावरों को भी इधर से उधर किया गया।