Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान के गांवों में पंचायत चुनावों को लेकर माहौल गरमाने लगा है। भावी उम्मीदवारों की धड़कनें तेज हैं, क्योंकि सभी को पंचायत चुनाव की आधिकारिक घोषणा का बेसब्री से इंतजार है।
Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान सहित श्रीमहावीरजी क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की धुरी माने जाने वाले पंचायत चुनाव की घोषणा का इंतजार अब उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए असमंजस का सबब बनता जा रहा है।
करीब एक माह से अधिक समय से चुनाव तारीखों की प्रतीक्षा में बैठे संभावित प्रत्याशी कभी तैयारी को तेज कर रहे हैं तो कभी ठंडी पड़ती नजर आ रही है।
चाय की थड़ियों से लेकर चौपालों तक चुनावी चर्चा का दौर शुरू हो गया है, जहां सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और अन्य प्रतिनिधियों की धड़कनें चुनाव की घोषणा में देरी से बढ़ रही हैं।
पंचायती राज चुनाव पिछले साल जनवरी 2025 में होने थे, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों, आरक्षण प्रक्रिया और कानूनी अड़चनों के चलते इसमें विलंब होता चला गया।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में परिसीमन से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि, ओबीसी आरक्षण, परिसीमन और वोटर लिस्ट फाइनलाइजेशन जैसे मुद्दों पर चल रही खींचतान ने घोषणा में देरी पैदा की है।
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनावों के बाद की राजनीतिक स्थिरता और मौजूदा सरकार की प्राथमिकताओं ने भी इस प्रक्रिया को प्रभावित किया है।
ग्रामीण अंचलों में संभावित उम्मीदवारों में असमंजस की स्थिति साफ नजर आ रही है। कई प्रत्याशी चुनावी तैयारी में जुटे हैं, लेकिन घोषणा न होने से कभी उत्साह बढ़ता है तो कभी ठंडा पड़ जाता है।
करौली जिले के सभी उपखण्ड सहित आसपास के जिलों के ग्रामीण अंचल मे आरक्षण लॉटरी का बेसब्री से इंतजार हो रहा है, जिससे प्रत्याशियों भी जीत की रणनीति बनाने में जुट गए है ।
गांवों की चाय की थड़ियों और चौपालों पर अब चुनावी गपशप का दौर शुरू हो गया है। यहां सरपंच पद के दावेदार और पंचायत समिति के प्रतिनिधि रोजाना जमा होकर तारीखों की अटकलों पर चर्चा करते हैं।
एक स्थानीय निवासी ईश्वर सिंह रूप सिंह, विजय सिंह निसूरा आदि ने बताया, कभी लगता है चुनाव जल्द होंगे, तो तैयारी तेज कर देते हैं। लेकिन देरी से सब ठंडा पड़ जाता है।
धड़कनें तो तेज हैं, क्योंकि एक महीने से ज्यादा हो गया इंतजार करते-करते। इस देरी से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, क्योंकि वर्तमान सरपंचों का कार्यंकाल समाप्त हो चुका है और प्रशासक नियुक्त हैं।