
Ayodhya Ram Mandir controversy: राजनीति में जब आस्था और आरोपों का कॉकटेल बनता है, तो हंगामा होना लाजिमी है। कुछ ऐसा ही हंगामा कांग्रेस के कद्दावर नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कैथल के 'ब्रह्म शक्ति सम्मेलन' में खड़ा कर दिया है। सुरजेवाला ने सीधे उस मुद्दे पर उंगली उठा दी है, जिसे भाजपा अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि जिस राम मंदिर के नाम पर करोड़ों देशवासियों ने अपनी गाढ़ी कमाई दान कर दी, वहां चढ़ावे से लेकर ज़मीन तक में भारी खेल हुआ है।
सुरजेवाला ने कहा कि वह यह मुद्दा आज से नहीं, बल्कि साल 2021 से उठा रहे हैं। उन्होंने बाकायदा दस्तावेज भी सामने रखे थे, लेकिन मजाल है कि किसी के कान पर जूं तक रेंगी हो! कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा कि बचपन में एक कहावत सुनी थी 'राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट'… आज ये कहावत सच होती दिख रही है। भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण में जमीन की खरीद-फरोख्त से लेकर हर काम में कथित तौर पर 40 फीसदी तक कमीशन खाने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन सरकार चुप बैठी है।
सुरजेवाला ने उन भावुक भक्तों का ज़िक्र किया, जिन्होंने मंदिर के लिए दिल खोलकर दान दिया था। उन्होंने दावा किया कि देश के गृह सचिव की माता की ओर से दान किए गए सोने के गहने और सिंधी समाज की तरफ से भेंट की गई करीब 200 चांदी की शिलाओं के हिसाब-किताब में भारी गड़बड़ी है। उनका कहना है कि सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि वृंदावन और केदारनाथ जैसे पवित्र धामों से भी ऐसी ही अनियमितताओं की खबरें आ रही हैं। सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि अगर इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह देश की करोड़ों की आस्था का अपमान है और इसकी तुरंत निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इस धार्मिक घेराबंदी के साथ ही सुरजेवाला ने एक बड़ा राजनीतिक दांव भी खेल दिया। उन्होंने सीधे उत्तर प्रदेश की राजनीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने सोची-समझी रणनीति के तहत यूपी में ब्राह्मण नेतृत्व को किनारे लगा दिया है। उन्होंने दावा किया कि आज यूपी का ब्राह्मण समाज अंदर ही अंदर बेहद नाराज है। कुछ लोग डर के मारे खुलकर नहीं बोल पा रहे, तो कुछ बंद कमरों में अपना दर्द बयां कर रहे हैं।