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करनाल में मिट्टी खाती मिली थी ब्लाइंड बच्ची, आवाज से की दुष्कर्म आरोपियों की पहचान, हाईकोर्ट ने तीन नाबालिगों को जमानत देने से किया इनकार

Punjab and Haryana High Court: हरियाणा में मिट्टी खाती ब्लाइंड बच्ची से किए दुष्कर्म के मामले में आरोपियों की पहचान बच्ची से आवाज सुनकर करवाई। इस दिल दहला देने वाले मामले में हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

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करनाल

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Pooja Gite

Jun 13, 2026

Punjab and Haryana crime news

photo patrika

Haryana Crime: हरियाणा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां तीन आरोपियों ने मिट्टी खाती ब्लाइंड बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ब्लाइंट और मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में तीनों नाबालिगों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने इस अपराध को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया और इसे न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर देने वाला मामला बताया और चेतावनी दी कि इन आरोपियों की रिहाई से न्याय की हार होगी। जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने इस केस से जुड़े सभी पुनरीक्षण याचिकाओं को खारिज करते हुए 29 मई को यह फैसला सुनाया।

मिट्टी खाते मिली बच्ची

यह मामला तब सामने आया जब करनाल की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उमेश कुमार ने इस असहाय बच्ची को एक झोपड़ी के पास मिट्टी खाते हुए देखा था। बाद में जब बच्ची की मेडिकल जांच कराई गई, तो मासूम बच्ची रिपोर्ट में गर्भवती पाई गई। तब जाकर पूरा खुलासा हुआ। तफ्तीश और अदालती कार्यवाही के दौरान पीड़िता से आरोपियों की पहचान करवाई गई। बाद में ब्लाइंड बच्ची ने आवाज सुनकर आरोपियों की पहचान करवाने में मदद की। जस्टिस नागपाल ने जमानत याचिका खारिज करते हुए पीड़िता के इस बयान को ही अहम माना और इसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की गई। अदालत में गवाही के दौरान पीड़ित बच्ची ने तीनों आरोपियों की आवाजों को पहचानकर अभियोजन पक्ष के दावों की पुष्टि की।

19 में से 4 गवाह दर्ज

करनाल के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और निचली अपीलीय अदालत द्वारा आरोपियों की हिरासत बढ़ाने के फैसले को हाईकोर्ट ने पूरी तरह सही ठहराया। राज्य सरकार ने भी जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया था कि पीड़िता गंभीर रूप से दिव्यांग और नाबालिग है। साथ ही केस में अहम मोड़ आ चुका है क्योंकि अभियोजन पक्ष के 19 गवाहों में से 4 गवाहों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं।

'बच्ची ब्लाइंड और मानसिक रूप से ठीक नहीं'

जानकारी के मुताबिक, सीडब्ल्यूसी के एक अधिकारी ने बच्ची को मिट्टी खाते हुए अलग और असहज हालत में देखा तो पूछताछ की। बच्ची की मां ने बताया कि लड़की अंधी और मानसिक रूप से विकलांग है और किसी ने इसके साथ गलत भी किया है। एक आरोपी ने शिकायत न करवाने की धमकी भी दी थी। इसके अलावा जांच में ये भी सामने आया कि बच्ची के पास न तो आधार कार्ड है, न ही जन्म प्रमाण पत्र और न ही वह कभी स्कूल गई।