चार महीने में 108 एक्सीडेंट, 62 मौत, 102 हुए घायल, ये है यातायात व्यवस्था
कासगंज। सुप्रीम कोर्ट से लेकर राज्य सरकार सड़क हादसों को लेकर गंभीर बनी हुई है और यातायात जागरूकता के अभाव में करोडों रूपये पानी की तरह खर्च कर रहीं हैं, इसके बावजूद हादसे दर हादसे हो रहे हैं। यातायात पुलिस विभाग से मिले आकांड़ों के अनुसार कासगंज जिले भर में बीते चार माह में 108 सड़क हादसों में 62 लोगों की जान चली गई, जबकि 102 लोगों के घायल होने के मामले दर्ज हैं, लेकिन इन बढ़ती दुर्घटनाओं पर किस तरह से रोक लगेगी। यह जबाव कानून के रखवालों के पास भी नहीं है।
इन माह के हैं ये आकड़े
जनवरी से अप्रैल तक यातायात विभाग में दर्ज माह बार हुए आकांड़ों पर गौर किया जाए, तो जनवरी माह में 21 हादसे हुए थे। जिनमें पांच लोगों की मौत हो गई, 13 लोग घायल हुए।फरवरी माह में 25 हादसे हुए थे, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 लोग घायल हुए थे। मार्च माह में भी 25 हादसे हुए। जिनमें 13 लोगों की जाने चली गई, जबकि 14 लोग घायल हुए। अप्रैल माह में 27 सड़क हादसे हुए। जिसमें 13 लोगों की जानें चली गईं, 15 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि मई माह के 15 दिन के अंतराल में दस सड़क हादसे हुए, जिनमें 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
नियमों का पालन न करना, हादसों का कारण
आपको बता दें कि अभी जितने भी सड़क हादसे घटित हुए हैं, उन सभी में यातायात नियमों का पालन न करना घटना के मुख्य कारण होते है। दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के यात्रा करने में अपनी शान समझते हैं, जिसमें अधिकांश वाहन चालक एक एक बाइक पर पांच पांच लोगों को बिठाकर यात्रा करते हैं। खस्ता हाल सड़को पर तेज रफ्तार और शराब पीकर, मोबाइल पर वार्तालाप कर वाहन चलाना भी हादसों का कारण बनते हैं, अगर वाहन चालक अपनी जान की परवाह करते हुए यातायात नियमों का पूरी तरह से पालन करें, तो सड़क हादसों में काफी हद तक गिरावट आ सकती है।
भ्रष्ट कार्यशैली पर सवाल
यातायात नियमों का पालन कराने में शासन प्रशासन अहम भूमिका निभाता है, इसके लिए समय समय पर जागरूकता अभियान भी संचालित कर यातायात नियमों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी जाती है, लेकिन यातायात प्रभारी की भ्रष्ट कार्यशैली हादसे का मुख्य कारण बनती है, क्योंकि चंद पैसों की खातिर यातायात कर्मी नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों को अनदेखा करते हैं। अगर यातायात भ्रष्ट कार्यशैली पर यदि अंकुश लगाया जाए, तो हादसों में कमी आना लाजिमी है।