कासगंज

कासगंज हिंसा की Real story जाननी हैं, तो देखें ये वीडियो

26 जनवरी की सुबह कासगंज में क्या हुआ था, जिसकी आग अभी भी शांत नहीं है।

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Jan 30, 2018
kasganj Violence

आगरा। कासगंज हिंसा के आज पाचवें दिन भी कासगंज सुलग रहा है। अब सवाल ये उठता है कि अाखिर 26 जनवरी को ऐसा क्या हुआ कि चंदन गुप्ता की जान चली गई। पूरा शहर दंगे की आग में झुलस उठा। लोग घरों में कैद हो गए। पत्रिका टीम ने उत्तर प्रदेश कासगंज जिले के मोहल्ला बड्डू नगर बिलराम गेट अब्दुल हमीद चौराहे से इस घटना की तह तक जाने का प्रयास किया। इस दौरान सीसीटीवी का एक फुटेज सामने आया, जो हैरान कर देने वाला था। विवाद की जड़ कुछ भी रही हो, लेकिन एक बात साफ है कि इस बस्ती में गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम मनाया जा रहा था। ध्वजारोहण की तैयारी चल रही थी।

यहां से शुरू हुई कहानी
बड्डू नगर निवासी चांद मियां ने बताया कि 26 जनवरी को हर वर्ष की तरह ध्वजारोहण की तैयारी चल रही थी। अब्दुल हमीद चौराहे को तिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था। चौराहे के बीच में राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था। बस्ती के छोटे छोटे बच्चे, बुजुर्ग और नौजवान राष्ट्र के इस पर्व को धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन किसी को नहीं पता था, कि पलभर की ये खुशियां दंगे की आग में सुलग कर राख हो जाएंगी। चांद मियां कहते हैं कि उस समय शायद कोई समझदारी दिखाता। उन्होंने बताया कि तिरंगा यात्रा का ये काफिला इधर से गुजरा। 60 से 70 बाइक थीं। प्रत्येक मोटरसाइकिल पर दो से तीन युवक सवार थे। हाथों में राष्ट्रध्वज के साथ भगवा झंडा भी था।

ऐसे शुरू हुआ विवाद
विवाद शुरू तब हुआ, जब बाइक सवार इन युवकों ने सकरी गली से निकलने का रास्ता मांगा। कार्यक्रम के लिए इस गली को बंद किया गया था। लकड़ी का तख्त वहां रखा हुआ था, जिस पर डीजे साउंड था। देशभक्ति के गाने बज रहे थे। गली से गुजरने वाले अन्य लोग ये कार्यक्रम देख, वहां से अपने वाहर घुमाकर लौटाकर ले जा रहे थे, लेकिन बाइक सवार तिरंगा यात्रा में शामिल युवक जिद पर अड़ गए, रास्ता न देने पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग शुरू कर दिया। विवाद इतना बढ़ गया, कि नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। कुर्सी फेंक दी गईं। बस्ती में भगदड़ मच गई। ये पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। इस बस्ती में सिर्फ विवाद हुआ, फिर आगे की घटना सड़क पर हुई।

Published on:
30 Jan 2018 03:16 pm
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