
चुनाव से पहले सरकारी बजट हजम करने का खेल | फोटो सोर्स- patrika.com
UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव आने वाले हैं, लेकिन उससे पहले ही कुछ गांवों में सरकारी बजट को ठिकाने लगाने का मामला सामने आया है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल अब कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए जाते-जाते सरकारी तिजोरी को खाली करने की होड़ मच गई है। कासगंज जिले में ऐसा ही एक बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है, जहां दो ग्राम प्रधानों ने सरकारी पैसा सीधे अपने रिश्तेदारों के पर्सनल बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया। इस पर कड़ा एक्शन लेते हुए दोनों प्रधानों को तुरंत पद से बर्खास्त कर दिया गया है।
कासगंज के सहावर इलाके की अलादीनपुर ग्राम पंचायत और सिढ़पुरा की अजीत नगर ग्राम पंचायत में यह पूरा खेल चल रहा था। प्रधानों को अच्छी तरह मालूम था कि कुछ दिन बाद कुर्सी हाथ से चली जाएगी, इसलिए उन्होंने नियम-कानून को ताक पर रखकर सरकारी फंड से लाखों रुपये अपने सगे-संबंधियों के खातों में भेज दिए। जब प्रशासनिक अफसरों ने इस धांधली पर जवाब मांगा, तो दोनों ही प्रधान कोई भी सबूत नहीं दे पाएं।
सहावर के अलादीनपुर गांव में हुए इस खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब वहां के निवासी ब्रजेंद्र सिंह की शिकायत पर जिला पूर्ति अधिकारी ने जांच शुरू की। जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ग्राम प्रधान पप्पू सिंह ने ग्राम सचिव के साथ मिलकर नियम-विरुद्ध तरीके से 7,54,165 रुपये की भारी-भरकम राशि अपने करीबियों के निजी खातों में ट्रांसफर कर दी। जब प्रधान जी से पूछा गया कि यह पैसा किस काम के लिए भेजा गया तो वो कोई सबूत नहीं दे पाए, जिसके चलते डीएम ने उन्हें सीधे पद से हटा दिया।
दूसरा मामला और भी दिलचस्प है जो सिढ़पुरा के अजीत नगर गांव का है। यहां की महिला प्रधान प्रीति पर गांव के ही शैलेंद्र कुमार ने विकास कार्यों में घोटाले का आरोप लगाया था। जब जिलाधिकारी के निर्देश पर ऑडिट टीम ने इस मामले की जांच की, तो पता चला कि प्रधान जी ने अपने पद का फायदा उठाते हुए पूरे परिवार का बैंक अकाउंट सरकारी पैसे से भर दिया था। उन्होंने अपने पति संजीव कुमार के खाते में 1,44,200 रुपये, देवर आशीष के खाते में 6,75,000 रुपये और अपनी देवरानी नेहा के खाते में 1,98,400 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस तरह प्रधान प्रीति ने लगभग 10,17,600 रुपये अपने ही परिवार में बांट दिए, जिसके बाद डीएम ने उन्हें भी सस्पेंड कर घर बैठा दिया है।
इस बड़े खुलासे के बाद जिला प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहा है। डीएम के आदेश पर दोनों गांवों के सचिवों को भी इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है और लापरवाही साबित होने पर उनकी नौकरी पर भी गाज गिर सकती है। वहीं दूसरी ओर, जिला पंचायत राज अधिकारी ने साफ किया है कि प्रधानों के हटने से गांवों के विकास कार्य नहीं रुकेंगे और इसके लिए तीन सदस्यों की एक नई संचालन कमेटी बना दी गई है, जो अब इन पंचायतों का कामकाज संभालेगी।
Updated on:
20 May 2026 12:40 pm
Published on:
20 May 2026 12:40 pm
