बड़वारा संकुल में 30 शिक्षकों को शासन के नियमों के विपरीत जाकर लाखों रुपये के आर्थिक लाभ पहुंचाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में उत्कृष्ट उमा विद्यालय संकुल के तत्कालीन लेखापाल, तत्कालीन प्राचार्य व तत्कालीन आहरण संवितरण अधिकारी बीइओ ने मिलीभगत कर गलत तरीके से गुरुजियों को लाभ पहुंचाया है। इस मामले में शासन को 90 लाख से अधिक रुपये का भुगतान नियमों के विपरीत किया गया है।
बालमीक पांडेय @ कटनी. बड़वारा संकुल में 30 शिक्षकों को शासन के नियमों के विपरीत जाकर लाखों रुपये के आर्थिक लाभ पहुंचाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ( education) इस मामले में उत्कृष्ट उमा विद्यालय संकुल के तत्कालीन लेखापाल, तत्कालीन प्राचार्य व तत्कालीन आहरण संवितरण अधिकारी बीइओ ने मिलीभगत कर गलत तरीके से गुरुजियों को लाभ पहुंचाया है। (corruption) इस मामले में शासन को 90 लाख से अधिक रुपये का भुगतान नियमों के विपरीत किया गया है। जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में 500 रुपये प्रतिमाह के मान से गुरुजी भर्ती हुए थे। काफी समय बाद गुरुजियों की परीक्षा आयोजित कराकर परीक्षा में पास होने के बाद संविदा शिक्षक बनाया गया। अध्यापक बनाए जाने के बाद 30 अध्यापकों को अध्यापक सवंर्ग के वेतनमान का लाभ दिया जाना था। यह लाभ 10 फरवरी 14 से देना था। लेकिन तत्कालीन लेखापाल नरेंद्र खंताल, तत्कालीन प्राचार्य एसआर महोबिया व आहरण संवितरण अधिकारी बीइओ एसबी सिंह ने अध्यापको को 1 अप्रैल 2007 से लाभ दे दिया गया, जो कि नियमों के विपरीत था। इसके लिए किसी भी सक्षम अधिकारी का आदेश नहीं था। बताया जा रहा है किगुरुजियों को अंधेरे में रखकर लाखों रुपये का खेल कर यह अनैतिक काम किया गया। इस मामने में 4 अध्यापक बसाड़ी, दो देवराकलां, 19 बड़वारा सहित अन्य लोग शामिल हैं।
सेवा पुस्तिका सत्यापन में सामने आया फर्जीवाड़ा
यह बड़वारा फर्जीवाड़ा सेवा पुस्तिकाओं के सत्यापन में सामने आया है। सेवा पुस्तिका सत्यापन के लिए जिला पंचायत गईं हैं, वहां पर लेखा अधिकारियों ने गड़बड़ी पकड़ी है। छठवें वेतन का एरियर्स है अध्यापक संवर्ग के दिए जाने के आदेश दिए गए। इस गड़बड़ी के बाद इन शिक्षकों की सेवा पुस्तिका सत्यापित नहीं हुई। सेवा पुस्तिका भेजी तो उसमें आपत्ति लग गई है। इसमें सक्षम अधिकारी जिला पंचायत सीइओ जगदीशचंद गोमे ने सक्षम अधिकारी के निर्देश प्रस्तुत करने कहा है।
खास-खास:
- सक्षम अधिकारी ने नहीं जारी किए कोई आदेश।
- आयुक्त ने जुलाई में निर्देश जारी किए, 10 फरवरी 14 से दिया लाभ।
- स्कूल में नहीं हैं विभाग के कोई भी आदेश।
- तत्काली प्राचार्य और बीइओ हो गए हैं सेवानिवृत्त।
बड़वारा संकुल के इन शिक्षकों को किया उपकृत
अकेले बड़वारा संकुल के 19 शिक्षक हैं, जिन्हें नियम विरुद्ध तरीके से उपकृत किया गया है। इसमें राकेश सिंह बघेल प्राथमिक शाला ददराटोला पठरा, प्रदीप मिश्रा भमरार टोला बिजोरी, राजाराम सेन बिचपुरा, संतोष कुमार कुशवाहा चांदन, सुरेशपुरी गोस्वामी बिजोरा टोला, मिथलेशपुरी गोस्वामी झिरियाटोला पथवारी, लालजी राय गांधीनगर भजिया, रामप्रसाद राय गांधीनगर भजिया, लल्लूलाल यादव खडखड़़ा, रामकिशोर रजक भुड़सा, सरिता सिंह पठरा, वीरभान बर्मन अतरिया, रविंद्र कुमार राय बरहा टोला सलैया, राजेंद्र प्रसाद राय गोपालगंज भजिया, विजयपुरी गोस्वमी नयाटोला बिजौरी, दिनेश कुमार पांडेय खडखड़़ा, भारतलाल राय बजरवारा, पुष्पा गुप्ता गोपालगंज भजिया, समर सिंह बगिया मोड़ सहित अन्य शिक्षक शामिल हैं।
इनका कहना है
जो भी काम हुआ है आदेश के अनुसार हुआ है। शिक्षकों को ऐसा कोई ऐसा लाभ नहीं मिला है जो गलत हो। यदि कोई गलत या अधिक भुगतान होता है तो शासकीय कर्मचारी अंडरटेकिंग में रहता है। ज्यादा भुगतान की रिकवरी हो सकती है। शिक्षकों के वेतन निर्धारण का मामला चल रहा है। यह नियम सभी पर लागू हो सकता है।
नरेंद्र गुप्ता, लेखापाल बड़वारा ब्लॉक।
बड़वारा संकुल में गुरुजी से अध्यापक बने शिक्षकों को शासन के निर्देशों के विपरीत भुगतान हुआ है। मामला संज्ञान में है। इसमें लेखपाल और तत्कालीन आहरण-संवितरण अधिकारी व संकुल प्राचार्य के द्वारा गड़बड़ी की गई है। इसकी नोटसीट बनाकर जिला पंचायत सीइओ को भेजी गई है। इस मामले में कार्रवाई की जानी है।
आशुतोष खरे, लेखापाल, जिला पंचायत।
नरेंद्र गुप्ता लेखापाल थे। उन्होंने जिन बिलों में हमसे दस्तखत कराते थे हम कर देते थे। लेखापाल द्वारा ही यह गड़बड़ी की गई होगी। हम तो उनके भरोसे में बिलों मं हस्ताक्षर कर देते थे।
एसबी सिंह, तत्कालीन आहरण संवितरण अधिकारी।
में दो साल पहले सेवानिवृत्त हो गया हूं। संकुल में क्या हुआ है क्या नहीं इसकी जानकारी नहीं दे पाऊंगा। अब जो भी बात आपको करनी हो अभी के संकुल प्राचार्य से कर सकते हैं।
एसआर महोबिया, तत्कालीन प्राचार्य एक्सीलेंस स्कूल बड़वारा।