कटनी

पैर का चिन्ह और गर्दन का तिल देखते ही मां-पिता-बहन की टूटी आस, अक्षत का शव लेकर लौटे

Delhi PG Collapse : खबर मिलते ही दिल्ली चले गए थे मां पिता और बहन, बेटे का शव देखते ही माता-पिता टूट गए, दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में कटनी के 19 वर्षीय छात्र की मौत
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Updated: 8 Sep 2026, 11:48 AM IST
कटनी के अक्षत यादव का शव आया
कटनी के अक्षत यादव का शव आया : फोटो सोर्स : X @Kamleshwar_INC

PG Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में कटनी के 19 वर्षीय छात्र अक्षत यादव की मौत हो गई। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र थे। अक्षत का अफसर बनने का सपना था जिसके लिए पीजी में यूपीएससी की तैयारी भी कर रहे थे। वे रक्षाबंधन मनाकर हाल में ही दिल्ली लौटे थे। हादसे की खबर कटनी पहुंचते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां, पिता और बहन तुरंत दिल्ली पहुंचे जहां अस्पताल में अक्षत का शव पहचाना। उसके पैर का चिन्ह और गर्दन का तिल देखते ही परिजन रोने लगे। मंगलवार सुबह एंबुलेंस से अक्षत की पार्थिव देह कटनी लाई गई है। अक्षत की टीचर सीमा यादव ने उसे होनहार छात्र बताया। कांग्रेस नेता कमलेश्वर पटेल ने अक्षत यादव के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है।

कटनी के जिस घर में कुछ दिन पहले रक्षाबंधन पर इकलौते बेटे अक्षत के आने से खुशियां थीं, आज उसी घर में मातम पसरा है। दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को इमारत ढहने के हादसे में कटनी के दुबे कॉलोनी- तुलसी नगर निवासी 19 वर्षीय अक्षत यादव की मौत हो गई। अब उनके अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है।

अक्षत के पिता महंता यादव रोजगार के सिलसिले में कोटा में रहते हैं, जबकि मां श्वेता यादव गृहिणी हैं। अक्षत परिवार का इकलौता पुत्र था और उसकी छोटी बहन आदिती सिंह है। परिवार की उम्मीदें अक्षत से जुड़ी थीं। पढ़ाई में मेधावी अक्षत का सपना यूपीएससी की तैयारी कर प्रशासनिक अधिकारी बनने का था। वह परिवार से अक्सर कहता था कि एक दिन अफसर बनकर उनका नाम रोशन करेगा।

अधूरा रह गया अफसर बनने का सपना-

अक्षत की मौत के साथ सिर्फ एक जिंदगी नहीं गई, बल्कि एक परिवार का वह सपना भी टूट गया, जिसे वह सालों से संजोए हुए था। किताबों के बीच बैठकर भविष्य की योजनाएं बनाने वाला अक्षत अब कभी अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाएगा। माता-पिता जिस बेटे को एक दिन अधिकारी के रूप में देखना चाहते थे, आज उसी बेटे के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं। अक्षत के घर पर रिश्तेदारों, पड़ोसियों और परिचितों का पहुंचना जारी है। हर आंख नम है और हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा है। जिस घर से अक्षत अपने सपनों को पूरा करने दिल्ली गया था, अब उसी घर में वह अपने सपनों के साथ नहीं, बल्कि पार्थिव शरीर के रूप में लौटा है।

पैर के चिन्ह और गर्दन के तिल से पहचाना

हादसे की सूचना मिलते ही पिता महंता यादव, मां श्वेता यादव और बहन अदिती सिंह दिल्ली रवाना हो गए। अस्पताल में बेटे का शव देखते ही माता-पिता टूट गए। जिस बेटे के भविष्य को संवारने के लिए परिवार ने तमाम सपने देखे थे, उसकी निर्जीव देह सामने थी। अक्षत को उसके पैर के चिन्ह और गर्दन के तिल से पहचाना।

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8 Sep 2026, 11:48 AM IST
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