कटनी

पुलिस का हाइटेक प्लान: एक क्लिक में खुलेगी अपराधियों की कुंडली, 1500 से अधिक अपराधी हो रहे स्कैन

फिंगरप्रिंट से लेकर चाल-ढाल तक हो रहा रिकॉर्ड, 16 अपराधी हुए डिजिटल, जिले के 17 थानों का डेटा तैयार करने में जुटी पुलिस, जिले में अपराधियों की डिजिटल घेराबंदी, एमसीयू सिस्टम से पुलिस कसेगी शिकंजा

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May 13, 2026
Digital Data on Criminals Being Compiled

कटनी. जिले में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए अब पुलिस पारंपरिक जांच पद्धति से आगे बढकऱ हाईटेक तकनीक का सहारा ले रही है। डकैती, लूट, चोरी, अपहरण, बलात्कार, अवैध हथियारों की तस्करी, शराब और गांजा तस्करी, पशु तस्करी तथा साइबर फ्रॉड जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर अपराधियों का डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। वर्ष 2025 और 2026 में अपराध करने वाले बदमाशों की पूरी कुंडली ऑनलाइन दर्ज की जा रही है।
कटनी पुलिस कंट्रोल रूम में इसके लिए अत्याधुनिक मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (एमसीयू) मशीन स्थापित की गई है। जिले के सभी 17 थानों से जुड़े अपराधों और उनमें शामिल आरोपियों की डिजिटल प्रोफाइलिंग की जा रही है। अब तक 16 शातिर अपराधियों का डेटा सिस्टम में अपलोड किया जा चुका है। लगभग 1500 अपराधियों क डाटा संकलित किया जाना है।

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यह हो रहा रिकॉर्ड

इस डिजिटल रिकॉर्ड में अपराधियों का नाम, पता, फिंगरप्रिंट, पाम प्रिंट, रेटिना स्कैन, फेशियल रीडिंग और शरीर के विभिन्न एंगल से फोटो शामिल किए जा रहे हैं। इसके साथ ही अपराधियों की चाल-ढाल यानी गेट पैटर्न का वीडियो रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई अपराधी नाम बदलकर या चेहरा छिपाकर बचने की कोशिश करेगा, तब भी उसकी पहचान बायोमेट्रिक पैटर्न और चाल के आधार पर संभव होगी। नई तकनीक के जरिए किसी भी संदिग्ध की पहचान कुछ ही सेकंड में की जा सकेगी। फेशियल रिकग्निशन तकनीक और डिजिटल रिकॉर्डिंग जांच एजेंसियों के लिए काफी मददगार साबित होगी।

बड़ी एजेंसियों की भी रहेगी निगरानी

सबसे खास बात यह है कि यह सिस्टम केवल जिले तक सीमित नहीं रहेगा। नई व्यवस्था को केंद्रीय एजेंसियों जैसे सीबीआई, एनआईए, डीआरआई और एटीएस से जोड़ा जा रहा है। इससे अंतरराज्यीय अपराधियों, संगठित गिरोहों और फरार बदमाशों तक पहुंच आसान होगी और विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल टाइम सूचना साझा की जा सकेगी। गिरफ्तार होते ही आरोपी को कंट्रोल रूम भेजकर स्कैन कराया जा रहा है। इस परियोजना के तहत जेलों में बंद विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा। पुलिस मुख्यालय का लक्ष्य हर थाने को इस नेटवर्क से जोडऩा है, ताकि अपराधी कहीं भी छिपे हों, उनकी पहचान तुरंत हो सके।

MP Police (Photo Source: AI Image)

फैक्ट फाइल

  • 9850 साल में हुए हैं जिले में अपराध
  • 4565 बीएनएस के तहत दर्ज हुए हैं प्रकरण
  • 4863 प्रकरण लघु अधिनियम के तहत घटित
  • 07 हैं जिले में हिस्ट्रीशीटर बदमाश
  • 422 प्रकरण 2025 के पहले के हैं लंबित
  • 492 चालान 2025 के मामलों में थे लंबित

यह है जिले में अफराधों का ग्राफ

जिले में हर प्रकार के अपराध हो रहे हैं। 2025 में दो डकैती, 8 झपटमारी, 102 वाहन चोरी, 17 तीन व चार पहिया वाहन चोरी हुए हैं। इसी प्रकार सैकड़ों चोरी की घटनाएं हुई हैं, जिनमें से 63 पर एफआइआर हुई है। इसी तरह 122 गृहभेदन की चोरी की गईं। 1099 मर्ग दर्ज किए गए हैं।

पुलिस कर चुकी है खुलासा

पुलिस अधीक्षक के अनुसार हाल ही में घटित हुए अपराधों में चार बदमाशों को फिंगरप्रिंट के आधार पर दबोचा गया है। माधवनगर थाना क्षेत्र में हुई चोरी के प्रकरण में बदमाश को अलीराजपुर से दबोचा है। इसी प्रकार सचिन पारथी को भोपाल से व बड़वारा में हुई चोरी को सतना से पुलिस ने पकड़ा।

वर्जन

जिले में अपराध नियंत्रण को और प्रभावी बनाने के लिए हाईटेक डिजिटल सिस्टम लागू किया जा रहा है। मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (एमसीयू) के माध्यम से अपराधियों के फिंगरप्रिंट, रेटिना स्कैन, फेशियल रीडिंग और अन्य बायोमेट्रिक डेटा का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। संदिग्धों की पहचान कुछ ही सेकंड में संभव होगी और अंतरराज्यीय अपराधियों तक पहुंच आसान बनेगी। साइबर अपराध, संगठित गिरोह और फरार बदमाशों पर शिकंजा कसने में अहम भूमिका निभाएगी।

अभिनय विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक।

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Updated on:
12 May 2026 07:45 pm
Published on:
13 May 2026 07:30 am
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