कटनी

पुल धसकने के मामले में मंत्री व मुख्य अभियंता आमने-सामने, मंत्री ने ठेकेदार को किया टर्मिनेट, अफसर ने कहा उसी ठेकेदार से कराएंगे काम

कटनी नदी पुल पर साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पुल के धसकने के मामले में प्रदेश सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा व जांच अधिकारी चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी ब्रिज जोन भोपाल एआर सिंह आमने-सामने नजर आ रहे हैं। इतनी बड़ी लापरवाही पर 24 घंटे के अंदर पीडब्ल्यूडी मंत्री ने सेतु निगम के दोषी अधिकारियों को निलंबित करते हुए ठेकेदार को टर्मिनेट कर दिया है। शुक्रवार को जांच करने पहुंचे अधिकारी ने मंत्री के बयान को आड़े लेते हुए कहा कि अभी तो इसी ठेकेदार (रामसज्जन शुक्ला) से काम कराएंगे।

2 min read
Jul 28, 2019
Disputed statement of Chief Engineer of PWD Department

कटनी. कटनी नदी पुल पर साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पुल के धसकने के मामले में प्रदेश सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा व जांच अधिकारी चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी ब्रिज जोन भोपाल एआर सिंह आमने-सामने नजर आ रहे हैं। इतनी बड़ी लापरवाही पर 24 घंटे के अंदर पीडब्ल्यूडी मंत्री ने सेतु निगम के दोषी अधिकारियों को निलंबित करते हुए ठेकेदार को टर्मिनेट कर दिया है। शुक्रवार को जांच करने पहुंचे अधिकारी ने मंत्री के बयान को आड़े लेते हुए कहा कि अभी तो इसी ठेकेदार (रामसज्जन शुक्ला) से काम कराएंगे। फिर यदि काम ठीक से नहीं होता तो दूसरे ठेकेदार से काम कराने पर विचार किया जाएगा। जांच अधिकारी द्वारा मीडिया को दिए गए इस बयान से पूरी तरह विरोधाभास की स्थिति नजर आ रही है। हैरानी की बात तो यह है कि 2008 से पुल का काम शुरू करने के बाद अबतक 30 फीसदी भी काम पूरा न करने वाले ठेकेदार व पुल धसकने के बाद भी फिर से काम सौंपने का मन बनाए हुए हैं।

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निष्पक्ष जांच पर सवाल
निर्माण कार्य की सतत मॉनीटरिंग न करने व गुणवत्ताविहीन हुए कार्य के कारण पुल के धसकने के मामले में मंत्री ने प्रभारी कार्यपालन यंत्री सेतु संभाग जबलपुर निदेश कौरव, अनुविभागीय अधिकारी योगेश वत्सल, उपयंत्री जेडए दुर्रानी और उपयंत्री राजेश खरे को को निलंबित कर दिया है। हैरानी की बात तो यह रही कि शनिवार को जांच के लिए पहुंची प्रदेश स्तरीय टीम में निलंबित अधिकारी पूरे समय जांच में मौजूद रहे। ऐसे में अधिकारियों की निष्पक्ष जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ठेकेदार ने लगाए आरोप
ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला ने भी विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। उन्होंने कहा कि कार्य करने के लिए विभाग द्वारा दबाव डाला गया था। मुझे वर्ष 2011 में वर्क ऑडर दिया गया। वर्ष 2013 में मुआवजा प्रकरण के निपटारे के बाद निर्माण के लिये साइड मिली थी। वहीं फाउंडेशन व तीन पिलर के स्लैब की स्वीकृति के लिए बनाई ड्राइंग डिजाइन को मंजूर होने में ही दो वर्ष का समय लगा। विभाग द्वारा पहले 90 मीटर का स्लैब बनाने को कहा था चूंकि वह ना तो संभव था ना ही सुरक्षित इसलिए दोबारा डिजाइन दी गई। वर्ष 2017 में समान्तर पुल के लिए एक और पिलर बनाने में एक करोड़ की राशि खर्च हुई, जिसमें उसे सिर्फ 25 लाख ही मिले।

ठेकेदार पर दर्ज हो एफआइआर, बर्खास्तगी हो अधिकारी
इस मामले में कांग्रेस शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश महामंत्री राजा जगवानी का कहना है कि पुल निर्माण ठेकेदार शुक्ला पर एफआइआर दर्ज की जानी चाहिए। ठेकेदार को मौका नहीं देना चाहिए। सेतु निगम के अधिकारियों को निलंबित किया गया उन्हें तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए। कमलनाथ सरकार में ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की जरुरत नहीं है। वहीं भाजपा जिला महामंत्री हरिशंकर गर्ग का कहना है कि कमलनाथ सरकार में कुछ भी संभव है। भ्रष्टाचार का प्रतिरूप है। ठेकेदार पर पैनाल्टी की कार्रवाई हो। पुल बनाने के बाद ब्लैक लिस्टेड किया जाना चाहिए। अधिकारियों को बर्खास्त किया जाना चाहिए। अधिकारियों के घरों में छापे की कार्रवाई होना चाहिए।

Published on:
28 Jul 2019 09:59 pm
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