कटनी

जिला अस्पताल के बेरहम सिस्टम की तस्वीरें: बगैर आधार कार्ड भीषण ठंड में मरीजों को नहीं मिल रहे कंबल

350 बिस्तरों का दावा, लेकिन वार्डों में ठिठुरते मरीज, प्रबंधन की गंभीर लापरवाही उजागर मेडीसिन वार्ड व सर्जिकल वार्ड में खतरनाक स्थिति, मरीज व परिजनों के गिड़गिड़ाने के बाद भी नहीं मिले कंबल, प्रबंधन व प्रशासन नहीं ले रहा सुध

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Jan 03, 2026
jila asptal katni

कटनी. सुबह की पहली किरण के साथ बीमारों की अस्पताल की दौड़ शुरू होती है, मगर इलाज से पहले जिला अस्पताल में संघर्ष मिलता है, रजिस्ट्रेशन से लेकर दवाइयों तक हर कदम पर अव्यवस्था मरीजों की परीक्षा लेती हैं, लाइन में खड़े बुजुर्ग, गोद में तड़पते बच्चे और दर्द से कराहते मरीज इंतजार में टूटते दिखते हैं, कहीं फाइलें भटकती हैं तो कहीं डॉक्टरों का इंतजार खत्म नहीं होता, यहां पर मरीज सिर्फ इलाज नहीं, सिस्टम से जूझने को मजबूर हैं, हर मिनट बढ़ता दर्द, हर घंटे टूटती उम्मीदें साफ झलकती हैं, इलाज से पहले मरीज यहां पर भीषण ठंड से जूझ रहे हैं, 350 बिस्तर के अस्पताल में गिनती के कंबल लाचार मरीजों को ठिठुरने विवश कर रहे हैं…।
भीषण ठंड के बीच जिला अस्पताल अव्यवस्था और संवेदनहीन सिस्टम का जीता-जागता उदाहरण बनता जा रहा है। कहने को यह 350 बिस्तरों वाला सर्वसुविधायुक्त अस्पताल है, जहां 24 घंटे 250 से 300 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं, संख्या अधिक भी हो जाती है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। इलाज में लापरवाही के साथ-साथ ठंड से बचाव तक के इंतजाम न होने से मरीज और उनके परिजन बेहद परेशान हैं।

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यह है हकीकत

पत्रिका टीम की पड़ताल में जिला अस्पताल की गंभीर और शर्मनाक लापरवाही सामने आई है। मेडिसिन वार्ड, सर्जिकल वार्ड, ट्रॉमा सेंटर सहित अन्य विभागों में भर्ती मरीजों को कंबल तक नसीब नहीं हो रहे। बताया गया कि जिन मरीजों के पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें रातभर ठंड में ठिठुरना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा आधार कार्ड के नाम पर कंबल देने से इनकार किया जा रहा है, जो मानवता पर सीधा सवाल खड़ा करता है। हैरानी की बात तो यह है कि अस्पताल के कर्मचारी यह नहीं बता पाए कि उनके पास कितने कंबल हैं। प्रबंधन ने कितने खरीदे हैं और दान में कितने मिले हैं।

यह है आवंटन की स्थिति

जानकारी के अनुसार 50 से 70 मरीजों वाले वार्ड में महज 20 से 22 कंबलों का ही आवंटन है। ऐसे में भीषण ठंड में अधिकांश मरीज बिना कंबल के ठंड से कांपते नजर आए। हालात इतने खराब हैं कि मरीजों के साथ आए तीमारदार भी खुले फर्श और बेंचों पर ठिठुरते हुए रात काटने को मजबूर हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मरीजों और परिजनों के गिड़गिड़ाने के बावजूद नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रबंधन का रवैया पूरी तरह असंवेदनशील नजर आया। ठंड से परेशान मरीज मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा।

दानवीरों के कंबलों का नहीं अता-पता

अस्पताल में दानवीरों और समाजसेवियों द्वारा कंबल वितरण की बातें केवल दिखावा साबित हो रही हैं। कागजों में व्यवस्थाएं भले ही पूरी हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पत्रिका की पड़ताल में रातभर ठंड से जूझते मरीज और उनके परिजन साफ दिखाई दिए, जिसने जिला अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब जिला अस्पताल जैसी प्रमुख स्वास्थ्य संस्था में मरीजों को ठंड से बचाने तक की व्यवस्था नहीं है, तो गरीब और बेसहारा मरीज आखिर कहां जाएं?

यह अस्पताल नहीं, पीड़ा का लंबा गलियारा बन चुका

पत्रिका ने गुरुवार रात जब जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर सर्जिकल वार्ड की पड़ताल की तो यहां पर भी चौकाने वाले हालात रहे। नर्सिंग स्टॉफ ने बताया कि 75 से अधिक मरीज वार्डों में भर्ती हैं, लेकिन कंबल बमुश्किल 15 से 20 ही मिले हैं। नर्सिंग स्टॉफ का कहना था कि इमरजेंसी कोटा भी उनके पास नहीं बचा है। सभी वार्डों की कमोवेश स्थिति देखने को मिली। अस्पताल में अलाव व हीटर की भी कहीं सुविधा नहीं दिखी।

ऐसे समझें मरीजों की गंभीर पीड़ा
केस 01

सुनीता खटीक निवासी जरवाही ग्राम जरवावाही का गुरुवार को निवार क्षेत्र में ही एक्सीडेंट हो गया था। परिजन आनन-फानन में शाम को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां सुनीता को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। वंदना खटीक भाभी ने कंबला मांगा तो नर्सिंग स्टॉफ ने मना कर दिया। परिजन अपनी शॉल आदि से मरीज की ठंड मिटा रहे थे।

केस 02

महिमा कोल निवासी कैमोर को गुरुवार दोपहर 3 बजे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। महिला एनीमियां आदि की शिकार है। शरीर में भयंकर सूजन व समस्या थी। महिला को ब्लड भी चढ़ रहा था, लेकिन रात 9 बजे तक महिला को कम्बल नहीं मिला था। महिला एक शॉल के भरोसे ठिठुर रही थी। परिजनों ने कहा कि स्टॉफ ने कंबल मांगने पर कह दिया था कि अब कंबल नहीं हैं।

केस 03
आधार कार्ड न होने की बेबश

दशरथ काछी निवासी कन्नौर थाना बरही को भी बीमार होने पर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। गुरुवार दोपहर लगभग 3 बजे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। रात में मरीज एक शॉल ओढ़े ठिठुर रहा था। जब पत्रिका टीम ने कंबल न होने की बात पूछी तो मरीज ने कहा कि आधार कार्ड नहीं होने पर नर्सिंग स्टॉफ ने कम्बल देने से मना कर दिया है। वह कई घंटे से ठंड के कारण परेशान है। यही हाल मरीज मंजू सेपरा का भी रहा। अधार कार्ड न होने पर कंबल नहीं दिया गया।

केस 04
तीन दिन में नहीं मिला कंबल

बहोरीबंद क्षेत्र के ग्राम पटना निवासी रामेश्वर लोधी 3 दिन से जिला अस्पताल के मेडीसिन वार्ड में भर्ती हैं। मरीज ने बताया कि उनको अस्पताल द्वारा कंबल नहीं दिया गया। फिर परिजनों से मंगाकर व्यवस्था की है। यही हाल मरीज लक्कड़ बाबा कन्हवारा का रहा, उनको भी अस्पताल के स्टॉफ द्वारा कंबल नहीं दिया गया। जब पत्रिका टीम गुरुवार रात पहुंची तो वे न सिर्फ ठंड से ठिठुरते नजर आये बल्कि सिस्टम को कोसते दिखे।

मेडिसिन वार्ड की भी दुर्दशा

जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में जब पत्रिका टीम पहुंची तो यहां पर पाया कि तीन वार्डों में जिनमें महिला व पुरुष मिलाकर 70 मरीज भर्ती थी। यहां भी मरीज ठंड से ठिठुर रहे थे। परिजनों को मांगने के बाद भी कंबल नहीं मिल रहे थे, इसकी मुख्य वजह यह थी यहां पर सिर्फ 20 कंबलों का ही आवंटन है। यहां पर इमरजेंसी कोटे के भी कंबल नहीं थे।

वर्जन

जिला अस्पताल में कंबल पर्याप्त मात्रा में है। मरीजों को कंबल दिलाए जाएंगे। आधार कार्ड से देने का कोई सिस्टम नहीं है। यदि किसी वार्ड में कंबल कम हैं तो उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

डॉ. यशवंत वर्मा, सिविल सर्जन।

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Published on:
03 Jan 2026 08:00 am
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