कटनी

होली के रंग बने हर्बल: महिला स्व-सहायता समूहों की पहल से सुरक्षित और स्वदेशी गुलाल तैयार

मां जालपा स्व सहायता समूह की महिलाओं ने फूल-पत्तियों से बनाया केमिकल-फ्री गुलाल, नगर निगम ने किया प्रोत्साहन
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Feb 28, 2026
Harbal gulal
Gulal

कटनी. होली के पर्व पर रंग और गुलाल का विशेष महत्व होता है। लोग उत्साह के साथ रंग खेलते हैं, लेकिन केमिकल युक्त रंगों से त्वचा, आंखों और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर एवं जिले की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा एक सराहनीय पहल की जा रही है। महिलाएं प्राकृतिक फूलों, पत्तियों और घरेलू सामग्री से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है।
शहर के मां जालपा स्व सहायता समूह द्वारा विशेष रूप से पालक के पत्ते, चुकंदर का रस, हल्दी, गेंदा फूल, जासौन फूल सहित अन्य प्राकृतिक स्रोतों से रंग-बिरंगे हर्बल गुलाल बनाए जा रहे हैं। गुलाल को मुलायम और सुरक्षित बनाने के लिए अरारोट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे त्वचा पर किसी भी प्रकार की एलर्जी या दुष्प्रभाव की संभावना नहीं रहती।

सुरक्षित हैं रंग

समिति की महिलाओं ने बताया कि इस हर्बल गुलाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह केमिकल मुक्त है और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए सुरक्षित है। साथ ही, प्राकृतिक रंगों के उपयोग से पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता। होली जैसे बड़े पर्व पर इस प्रकार का गुलाल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का भी माध्यम बन रहा है।

महिलाओं को किया जा रहा प्रेरित

इस पहल को नगर निगम कटनी द्वारा भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। नगर निगम महिलाओं को हर्बल गुलाल निर्माण के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग सुरक्षित रंगों का उपयोग करें। मूह प्रमुख शशि सोनी ने बताया कि समिति द्वारा अन्य महिलाओं को भी हर्बल गुलाल बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे न केवल लोगों को सुरक्षित उत्पाद मिल रहा है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है।

स्वदेशी को मिल रहा बढ़ावा

समिति की महिलाओं ने अपने द्वारा तैयार किए गए हर्बल गुलाल के सैंपल तपस्या परिहर नगर निगम आयुक्त को भी दिखाए हैं। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कुल मिलाकर कटनी में महिला स्व-सहायता समूहों की यह पहल न केवल होली को सुरक्षित और रंगीन बना रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी सोच और पर्यावरण संरक्षण की एक सशक्त मिसाल भी प्रस्तुत कर रही है।

Updated on:
28 Feb 2026 07:36 am
Published on:
28 Feb 2026 07:36 am