Hundred years old Umardoli Dam
कटनी. 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। एक ऐसा दिन जब विकास में इंजीनियर्स के योगदान को याद किया जाता है। विकास में योगदान देने वाले इंजीनियर्स की इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना जिले के रीठी तहसील के बकलेहटा और चरगवां गांव के बीच प्रदेश के इकलौता सौ वर्ष पुराने आर्च डैम ऊमरडोली के रूप में स्थित है। बारिश के मौसम में इस डैम की सुंदरता देखते ही बनती है। यहां के आस-पास का मनोरम दृश्य और डैम से पानी के ओवरफ्लो का विहंगम नजारा देख लोग सम्मोहित हो जाते हैं । इसके आस-पास बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक प्राकृतिक स्थल हैं।
जानकारी के अनुसार बेजोड़ इंजीनियरिंग, 10 साल की कड़ी मेहनत और पत्थरों को तराशकर तैयार कराए गए ऊमरडोली डेम की खूबसूरती और इंजीनियरिंग को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। ऊमरडोली जलाशय अपने तरह का प्रदेश का इकलौता आर्च डेम है।इसे बनाने में 25.75 लाख क्यूबिक फीट पत्थरों का उपयोग किया गया है। दो पहाड़ों को जोडकऱ बनाए गए बोरीना जलाशय का निर्माण वर्ष 1914 में प्रारंभ हुआ था। ऊमरडोली जलाशय का कैचमेंट एरिया 14.4 वर्ग मील है। पहाड़ों के पत्थरों को काटकर और तराशकर डेम को बनाने में 10 साल का समय लगा। 1520 फीट लंबे और 74 फीट ऊंचे जलाशय की कारीगरी और प्राकृतिक स्थल को देखने के साथ ही परिवार सहित लोग पिकनिक मनाने इस स्थान पर पहुंचते हैं। आर्च डेम ऊमरडोली से लगा जंगल है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इतना ही नहीं अपने तरह का ऊमरडोली जलाशय प्रदेश का इकलौता आर्च डेम है। जलभराव बढऩे पर दीवारों को नुकसान न हो, इसको ध्यान में रखकर इसे सर्पाकार तरीके से बनाया गया है।
बुझाता है 400 हेक्टेयर जमीन की प्यास
ऊमरडोली जलाशय से लगे चार गांव की खेती उसकी नहरों के माध्यम से सिंचित होती है। डेम से लगे चरगवां, बकलेहटा, तिघराकलां, बरजी गांव की 405 हेक्टेयर भूमि को रबी व खरीफ के सीजन में बोरीना जलाशय सिंचित करता है। पहाड़ों के बीच बने इस डेम की खूबसूरती को देखने के अलावा ट्रेकिंग करने भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।