सोशल मीडिया पर शिकायत पर लगा दिया सिर्फ हजार रुपए जुर्माना, हर दिन हजारों यात्रियों से मनमानी वसूली, रेलवे स्टेशन में यात्रियों की जेब पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है
कटनी. रेलवे स्टेशन में यात्रियों की जेब पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है। प्लेटफॉर्मों पर संचालित खानपान और पैक्ड सामग्री के स्टॉलों में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूली जा रही है, लेकिन रेलवे प्रशासन की कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित दिखाई दे रही है। हालत यह है कि 30 रुपए की कोल्डड्रिंक 40 रुपए में और 14 रुपए की पानी की बोतल 20 रुपए तक में बेची जा रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि यात्रियों को सामान खरीदने के बाद बिल तक नहीं दिया जा रहा, जबकि रेलवे का स्पष्ट नियम है कि पहले बिल दिया जाए और उसके बाद ही भुगतान लिया जाए। कटनी स्टेशन में यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग या तो अनजान बने हुए हैं या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल प्रतीकात्मक जुर्माना लगाकर मामला शांत कर दिया जाता है।
हाल ही में रेल यात्री सत्यम सोनी ने स्टेशन के एक स्टॉल से मिल्क प्रोडक्ट खरीदा। पैकेट पर कीमत 30 रुपए अंकित थी, लेकिन स्टॉल संचालक ने उनसे 40 रुपए वसूल लिए। यात्री ने इसकी शिकायत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रेलवे से की। शिकायत वायरल होने के बाद संबंधित स्टॉल संचालक पर मात्र एक हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। यात्रियों का कहना है कि हजार-दो हजार रुपए के जुर्माने से स्टॉल संचालकों पर कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि प्रतिदिन हजारों यात्रियों से अतिरिक्त वसूली कर उससे कई गुना अधिक कमाई की जा रही है। लोगों का सवाल है कि यदि बार-बार शिकायतें सामने आ रही हैं तो फिर लाइसेंस निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
इन दिनों गर्मी और शादी सीजन के चलते ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ है। कटनी जंक्शन से गुजरने वाली अधिकांश ट्रेनें पहले से ही खचाखच भरी हुई पहुंच रही हैं। प्लेटफॉर्म पर ट्रेन रुकते ही यात्री पानी, कोल्डड्रिंक, दूध, नाश्ता और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए दौड़ पड़ते हैं। इसी अफरा-तफरी और जल्दबाजी का फायदा स्टॉल संचालक उठा रहे हैं। यात्रियों को ट्रेन छूटने का डर रहता है, इसलिए वे कीमत पूछने या बहस करने की बजाय मजबूरी में सामान लेकर ट्रेन में चढ़ जाते हैं। कई बार जब कोई यात्री एमआरपी से ज्यादा कीमत पर सवाल उठाता है तो स्टॉल कर्मचारी उलझने लगते हैं। विवाद की आशंका के चलते अधिकांश यात्री चुप रहना ही बेहतर समझते हैं।
रेलवे बोर्ड ने करीब दो साल पहले देशभर के रेलवे स्टेशनों पर स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि किसी भी स्टॉल पर बिक्री से पहले ग्राहक को बिल दिया जाएगा और उसके बाद भुगतान लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को ओवरचार्जिंग से बचाना और बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना था लेकिन कटनी स्टेशन में यह नियम पूरी तरह दम तोड़ चुका है। प्लेटफॉर्मों पर संचालित अधिकांश स्टॉलों में बिलिंग मशीन या बिल बुक तक मौजूद नहीं है। यात्री सामान खरीदते हैं, भुगतान करते हैं और बिना बिल के ही रवाना हो जाते हैं। पानी की बोतल हो, पैकेट बंद खाद्य सामग्री, चाय-नाश्ता या अन्य कोई उत्पाद किसी भी वस्तु का बिल यात्रियों को नहीं दिया जा रहा। इससे न केवल रेलवे के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि टैक्स चोरी और राजस्व नुकसान की आशंका भी बढ़ रही है।
रेलवे ने नो बिल, नो पे व्यवस्था लागू तो कर दी, लेकिन स्टेशन परिसर में यात्रियों को इसकी जानकारी देने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखाई देती। प्लेटफॉर्मों या स्टॉलों के आसपास कहीं भी बड़े सूचना बोर्ड नजर नहीं आते, जिनमें लिखा हो कि बिल लिए बिना भुगतान न करें। यही वजह है कि अधिकांश यात्रियों को इस नियम की जानकारी ही नहीं है। सतना निवासी शशिदीप मिश्रा ने बताया कि वे कई बार स्टेशन से पानी और खाने-पीने का सामान खरीद चुके हैं, लेकिन कभी किसी स्टॉल संचालक ने बिल नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बिल मांगने पर कई बार विवाद जैसी स्थिति बन जाती है, इसलिए लोग चुपचाप सामान लेकर चले जाते हैं। वहीं जबलपुर के तुलसीनगर निवासी मनीष कुमार ने बताया कि उन्हें पहली बार जानकारी मिली है कि रेलवे स्टेशन के स्टॉलों में पहले बिल दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि रेलवे ने नियम बनाया है तो उसका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है।
कटनी रेलवे स्टेशन पश्चिम मध्य रेलवे का महत्वपूर्ण जंक्शन माना जाता है। यहां से पांच दिशाओं में ट्रेनों का संचालन होता है और प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक यात्री ट्रेनें स्टेशन से होकर गुजरती हैं। स्टेशन के छह प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों की सुविधा के लिए खानपान, पैक्ड फूड, पानी, दूध, चाय, स्नैक्स और अन्य सामग्री के दर्जनों स्टॉल संचालित किए जा रहे हैं। रोजाना हजारों यात्री इन स्टॉलों से खरीदारी करते हैं। ऐसे में यदि प्रत्येक यात्री से पांच से दस रुपए अतिरिक्त भी वसूले जाएं तो प्रतिदिन लाखों रुपए की अवैध कमाई का अनुमान लगाया जा सकता है। यही कारण है कि छोटे जुर्माने के बावजूद यह खेल लगातार जारी है।
रेलवे प्रशासन और रेलवे सुरक्षा बल द्वारा समय-समय पर स्टेशन के स्टॉलों की जांच के अभियान चलाए जाते हैं। इन अभियानों में साफ-सफाई, लाइसेंस और खाद्य गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर तो कार्रवाई दिखाई देती है, लेकिन ओवरचार्जिंग और बिलिंग व्यवस्था की गंभीर जांच शायद ही कभी होती हो। सूत्रों के अनुसार कई बार जांच की सूचना पहले ही स्टॉल संचालकों तक पहुंच जाती है, जिसके चलते कुछ समय के लिए नियमों का पालन दिखाया जाता है और फिर पुरानी स्थिति लौट आती है। पिछले दो वर्षों में ऐसा कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया, जिसमें लगातार शिकायतों के बाद किसी स्टॉल का लाइसेंस निरस्त किया गया हो। यही वजह है कि यात्रियों को राहत नहीं मिल पा रही और स्टेशन परिसर में मनमानी का सिलसिला लगातार जारी है।
स्टेशनों पर लगातार अभियान चलाकर जांच की जा रही है। हम ऐसे स्टॉल को चिन्हित कर रहे है जिन्हें ओवरचार्जिंग में पकड़ा गया है और जुर्माने की कार्रवाई की गई है। जल्द है ऐसे स्टॉल के लाइसेंसी का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।