आधुनिक खेती से किसान को मिलेगा बड़ा फायदा, अतिरिक्त उत्पादन के साथ लागत भी घटी, किसानों के लिए प्रेरणादायक है खेती
कटनी. लगभग 16 लाख से अधिक की आबादी वाला कटनी जिला आज भी विकास की दौड़ में आसपास के जिलों से काफी पीछे खड़ा है। जनप्रतिनिधियों के दावों-वादों सहित बजट भाषणों में विकास की स्क्रिप्ट हर साल पहले से ज्यादा आकर्षक होती जा रही है, जनप्रतिनिधियों के वादे भी दमदार होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिले की मूलभूत समस्याएं, बिजली, पानी, सडक़, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार, आज भी जस की तस बनी हुई हैं। जिस गति से जबलपुर, शहडोल, उमरिया और सतना जैसे जिलों में अधोसंरचना विकसित हो रही है, उसकी तुलना में कटनी कहीं पीछे छूटता नजर आता है।
शहर को रिंगरोड पीर बाबा बाईपास से शहडोल बाईपास को जोडऩे वाली सडक़, सरकारी मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, माइनिंग कॉलेज, हवाई पट्टी, अंतरराज्यीय बस स्टैंड, बड़े खेल मैदान, बेहतर चिकित्सा, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्र जैसी बुनियादी जरूरतें हैं। लेकिन लगातार घोषणाओं के बावजूद ये योजनाएं फाइलों और भाषणों से बाहर नहीं आ पा रहीं। नतीजतन चिकित्सा, शिक्षा, पर्यटन, कृषि और रोजगार हर क्षेत्र में जिला पिछड़ता चला गया है। शहर और उपनगरीय क्षेत्रों में पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहा है। उद्योग इकाइयों की कमी, एमएसएमई सेक्टर को अपेक्षित प्रोत्साहन न मिलना और स्वरोजगार योजनाओं का कमजोर क्रियान्वयन युवाओं को पलायन के लिए मजबूर कर रहा है। यदि शहर में छोटे-बड़े उद्योग, लॉजिस्टिक हब, फूड प्रोसेसिंग और स्टोन आधारित इकाइयां स्थापित हों, तो हजारों युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिल सकता है।
बड़वारा विधानसभा में किसानों के लिए बिजली और सिंचाई सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। नहरों की स्थिति जर्जर है, समय पर मरम्मत नहीं होने से खेती प्रभावित होती है। उद्योग इकाइयां न लगने के कारण बेरोजगारी गंभीर रूप ले चुकी है। बेहतर कृषि तकनीक, सिंचाई सुविधा, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विशेष विकास योजनाओं की सख्त जरूरत है, ताकि क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
विजयराघवगढ़ और कैमोर क्षेत्र आज भी बुनियादी अधोसंरचना का इंतजार कर रहे हैं। महानदी पर पुल की मांग वर्षों से लंबित है। कैमोर और विजयराघवगढ़ में बाईपास न होने से यातायात और व्यापार दोनों प्रभावित होते हैं। कैमोर में संचालित कंपनियों में स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा। सिंचाई, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी यहां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
बहोरीबंद क्षेत्र में जल संकट हर गर्मी में विकराल हो जाता है। नहरों की मरम्मत न होने से किसान परेशान हैं। पत्थर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति कमजोर है। नल-जल योजना और जल जीवन मिशन का क्रियान्वयन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहा। रीठी-सिमरा क्षेत्र में प्रस्तावित लॉजिस्टिक हब अब तक सिर्फ घोषणा बनकर रह गया है। उद्योगों के अभाव में यहां भी युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा। मार्बल उद्योग ठप है, जलाशयों का समय पर काम नहीं हो रहा।
प्रश्र- जिले में धान खरीदी व सुरक्षा की स्थिति, खेल मैदान निर्माण, माधवनगर ऑडिटोरियम, शहरी क्षेत्र में पट्टे, पुनर्वास की जमीन में रह रहे लोगों को पट्टे देने की स्थिति, सीवर लाइन प्रोजेक्ट, नगर निगम में लगे किराये के वाहनों की जानकारी, विभागीय योजनाओं की स्थिति, तिलक कॉलेज में जनभागीदारी के काम, 2024-25 ेंमें स्वीकृत कार्य व वास्तविक स्थिति से संबंधित सवाल पूछे हैं।
प्रश्र- क्षेत्र में सडक़ों के निर्माण, पानी की समस्या, जर्जर स्कूलों के संबंध में, सिहुड़ी व पाली जलाशय के निर्माण की स्थिति, छपरी नहर की मरम्मत, क्षेत्र में चल रहे जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना आदि से संबंधित सवाल पूछे हैं।
प्रश्न- कृषि, आदिम जाति, ऊर्जा, खनिज, खाद्यान, मत्स्य, विद्यालय, जल जीवन मिशन, उद्योग विभाग इन सभी विभागों की कार्य योजना, चल रहे विकास कार्यों की प्रोग्रेस रिपोर्ट, 11 सडक़ों के निर्माण कार्य की जानकारी, सिंचाई की समस्या पर फोकस किया है।
प्रश्न- विजयराघवगढ़ क्षेत्र में हुई धान खरीदी के बाद भंडारण क्षेत्र के वेयरहाउसों में न कराकर मझगवां वेयर हाउस में भंडारित कराने की वजह, क्षेत्र में बिजली, पुल, सडक़ आदि की समस्या को लेकर सवाल पूछे हैं।