nagar nigam katni
कटनी. जब आर्थिक स्थिति ठीक न हो और आप तंग हाल में जी रहे होते हैं तो अत्यंत आवश्यक कार्यों में ही रुपए खर्च करते हैं, सुविधाओं में कटौती करते हैं, सोच-समझकर निर्णय लेते हैं, लेकिन नगर निगम में स्थिति एकदम इतर है। जनता के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को पीछे छोड़ फिजूलखर्ची में ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। मनमानी खरीदी और निर्माण कार्यों में सुर्खियों में रहने वाला नगर निगम एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। नगर निगम आयुक्त का निर्णय कई अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को सोचने पर विवश कर दिया है, कि जब आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो फिर ऐसे निर्णय क्यों लिए जा रहे हैं। नगर निगम में अब एक सोशल मीडिया हैंडलर रखा जा रहा है। इसके तहत नगर निगम सालाना 9 लाख रुपए खर्च करेगी। 75 हजार रुपए प्रतिमाह नगर निगम सोशल मीडिया में जनप्रतिनिधियों व नगर निगम की योजनाओं का प्रचार किया जाएगा। खास बात तो यह है कि यह फाइल स्वीकृति के लिए दो माह से इधर से उधर भटक रही थी। जब एक अधिकारी द्वारा फाइल नहीं की गई तो आयुक्त ने स्वीकृति दे दी है। फाइल स्वीकृत होते ही फिजूलखर्ची चर्चाओं में आ गई है।
बता दें कि नगर निगम की माली हालत बहुत ज्यादा खराब है। स्थिति यहां तक आ बनती है कि समय से अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ जाते हैं। सत्रों की मानें तो पिछले तीन वर्ष में नगर निगम लगभग 35 करोड़ रुपए रुपए की एफडी बैंकों में तोड़ चुका है। जमा पूंजी को वेतन, विकास कार्य आदि में खर्च कर दिया गया है, बावजूद इसके फिजूलखर्ची पर रोक नहीं लगाई जा रही।
नगर निगम की आर्थिक हालत खस्ता है। 45 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों की फाइल सूचीबद्ध है। यह लिस्ट आयुक्त, माहपौर व बाबुओं सहित विभागीय अधिकारियों के पास घूम रहीं हैं। पार्षद भी अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। सडक़, नाली, पेवरब्लॉक, बिजली के पोल सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की वार्डों में नितांत आवश्यकता है, इसके बाद भी इनकी स्वीकृति व एनआइटी जारी न होने की मुख्य वजह बजट न होना है, इसके बाद भी ऐसे मामलों में खर्च करना कई प्रकार के सवाल खड़े कर रहा है।
अब सोशल मीडिया का दौर है। नगर निगम की विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों का सोशल मीडिया में प्रचार-प्रसार कराने के लिए यह निर्णय लिया गया है। प्रचार-प्रसार के लिए बजट में से राशि तय होती है, उसकी के तहत यह निर्णय लिया गया है। सोशल मीडिया हैंडलर रखना फिजूलखर्ची नहीं है।