महाराणा प्रताप वार्ड के पुराने एनएच-7 पर स्थित है जमीन, 4.26 करोड़ की जमीन दो टुकड़े कर 96 लाख में खरीदने का है आरोप, चार दिन के अंतराल में कराई रजिस्ट्री, न्यायालय कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने शुरू की जांच
कटनी. प्रदेश के सबसे अमीर विधायक व खनन कारोबारी संजय पाठक की पत्नी निधि पाठक पर जमीन खरीदने के दौरान स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क की कथित चोरी करने का आरोप लगा है। शासन को मिलने राजस्व बचाने के लिए करोड़ों मूल्य की एक चक जमीन को दो भागों में विभाजित कर दो विक्रय पत्रों के माध्यम से चार दिन के अंतराल में खरीदा गया है। इस शिकायत के बाद न्यायालय कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने जांच शुरू कर दी है और विधायक पत्नी निधि पाठक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जानकारी के अनुसार नगरनिगम सीमा अंतर्गत महाराणा प्रताप वार्ड के होटल अरिंदम के सामने वंदना सरावगी पति सतीश सरावगी निवासी हनुमानगंज वार्ड की खसरा नंबर 289/8 के रकवा 0.02 हेक्टेयर अर्थात 2125 वर्गफीट, खसरा 289/9 के रकवा 0.04 हेक्टेयर अर्थात 4150 वर्गफीट, खसरा नंबर 289/23 0.02 हेक्टेयर अर्थात 2075 वर्गफीट कुल क्षेत्रफल 10400 वर्गफीट एक चक भूमि स्थित है। भूमि स्वामी वंदना से यह जमीन निधि पति संजय पाठक निवासी पाठक वार्ड ने दो विक्रय पत्रों 20 दिसंबर 2021 व 24 दिसंबर 2024 के जरिए 1050 वर्गफीट एवं 9350 वर्गफीट में बांटकर खरीदी गई है। शिकायतकर्ता राजू गुप्ता का आरोप है कि एक चक की जमीन को दो टुकड़ों में इसलिए खरीदा गया है, जिससे मुख्य रोड की कलेक्टर गाइडलाइन से बचकर स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क बचाया जा सके।
10400 वर्गफीट एक चक भूमि में से सबसे पहले पिछले हिस्से 9350 वर्गफीट को 21 दिसंबर 2021 को खरीदा गया। यहां तत्कालीन कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से 6600 रुपए प्रति वर्गमीटर मूल्यांकन किया गया। जबकि ठीक चार दिन बाद आगे का हिस्सा 1050 वर्गफीट खरीदा गया। यहां तत्कालीन कलेक्टर गाइडलाइन प्रति वर्गमीटर 40 हजार रुपए थी। इस प्रकार दोनों ही जमीनों के सौदे 57 लाख 35 हजार 70 व 39 लाख 3 हजार 200 में निष्पादित कराए गए जबकि डबल रोड की जमीन होने के कारण यह सौदा 4.26 करोड़ में होना था। पंजीयन में चौहद्दी भी गलत दर्शा दी गई।
शिकायत की जांच करते हुए न्यायालय कलेक्टर ऑफ स्टाम्प द्वारा विक्रेता वंदना सरावगी पति सतीश सरावगी व खरीददार निधि पति संजय पाठक को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि 16 जनवरी तक लिखित जवाब प्रस्तुत करें। यदि जवाब नहीं आता है तो भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 40 के तहत मुद्रांक शुल्क एवं शास्ति वसूली की कार्रवाई की जाएगी।