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सुरक्षा से खिलावाड़: बगैर कैमिस्ट की मौजूदगी में फिल्टर प्लांट में हो रहा पानी का सोधन, निजी कंपनी के हाथों में लाखों लोगों को पानी पिलाने की जिम्मेदारी

शनिवार को द्वारिका सिटी में सामने आई मटमैले पानी की समस्या, शहर के 25 स्थानों पर लिए गए सेम्पल

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 04, 2026

Water supply katni

Water supply katni

कटनी. इंदौर में खराब पेयजल सप्लाई के बाद भी शहर में हालात नहीं सुधरे हैं। कदम-कदम पर फैली लापरवाही कभी भी शहरवासियों को बीमार कर सकती है, इसकी मुख्य वजह यह है कि शहर की पेयजल सप्लाई की लाइन 25 साल पुरानी तो है ही साथ नाली और नालियों के बीच से गुजरी है, जिसमें लीकेज के कारण आयेदिन समस्या जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। लोगों की जिंदगी से जुड़े मामले की कमान नगर निगम ने निजी कंपनी के हाथों में सौंपी है। पानी फिल्टर कर सप्लाई करने का काम इंडियन ह्यूम पाइप कंपनी कर रही है। फिल्टर प्लांट बैराज में सुरक्षा व सोधन में जमकर बेपरवाही हो रही है।
पत्रिका टीम शनिवार दोपहर फिल्टर प्लांट पहुंची, लगभग आधेघंटे से अधिक समय तक कर्मचारियों से बातचीत की, फिल्टर होने वाले पानी का जायजा लिया। यहां पर दो कर्मचारी आग तापते हुए मिले। सोधन संयंत्र में एक भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। मशीनें ऑटोमेटिक चल रहीं थीं। पानी फिल्टर हो रहा था। अंदाज में एलम, ब्लीचिंग आदि कर्मचारी डाल चुके थे।

केमिस्ट का नहीं था पता

हैरानी की बात तो यह रही कि सोधन संयंत्र में केमिस्ट का अता-पता नहीं था, जबकि केमिस्ट की मौजूदगी में ही जांच होनी चाहिए। कर्मचारियों ने कहा कि केमिस्ट फील्ड में गए हुए हैं। ऐसे में पानी के सोधन से खिलवाड़ गंभीर लापरवाही है। नगर निगम में पानी सप्लाई का काम इंडियन ह्यूम पाइप कंपनी संभाल रही है। कंपनी के पास सुधांशु नामक केमिस्ट के द्वारा पानी की जांच की जा रही थी, लेकिन एक सप्ताह पहले नए केमिस्ट को रखा गया है, जिनके द्वारा जांच की जा रही है। पत्रिका टीम जब शनिवार दोपहर फिल्टर प्लांट की पड़ताल करने पहुंची तो यहां पर सिर्फ दो कर्मचारी मिले। केमिस्ट मौजूद नहीं थी। कर्मचारी फील्ड पर होना बता रहे थे, जबकि उनकी निगरानी में ही पानी का शोधन होना चाहिए।

इस योजना से होना है शहर का उद्धार

उल्लेखनीय है कि अमृत-2 में 121 किलोमीटर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, 38 किमी टंकियों को भरने वाली लाइन, 2 किलोमीटर इंटक वेल से फिल्टर प्लांट तक आने वाली लाइन का काम 52.53 करोड़ रुपए से स्वीकृत हुआ है। संविदाकार द्वारा ड्राइंग डिजाइन दी गई है, जिसका परीक्षण पीडीएमसी द्वारा किया जा रहा है, शासन से स्वीकृति की कार्रवाई चल रही है। पुरानी पाइप लाइन 74 किलोमीटर व उनके कनेक्शन सहित अमृत-2 से शेष बची 12 किलोमीटर लाइन का 23.57 करोड़ से ठीक होनी है। जिसका प्रस्ताव अर्बन चैलेंज फंड में प्रस्ताव भेजा गया है।

यह है पानी की जांच व मानक

पीएच: इसका मान 6.5 से 8.5 तक होना चाहिए, पीएच का मान कम नहीं होना चाहिए। यदि पीएच कम होगा तो एसिडिक पानी हो जाता है, इससे पेट संबंधी विकार बढ़ जाएंगे। बैक्टीरिया बढ़ जाएंगे।

टीडीएस: इसका का मान पानी में 500 से 2000 तक होना चाहिए। फिल्टर का पानी का टीडीएस 200 से 250 होता है, आरओ का टीडीएस 100 से कम होता है, नलकूप का 500 से 600 टीडीएस मान होता है जो पीने योग्य है। जो वॉटर सप्लाई हो रही है उसकी 249 से अधिक रहती है। नलकूप का 400 से अधिक होता है।

टर्बीडिटी: पानी में मटमैला पन की रेंज बताता है। 5 के नीचे टर्बीडिटी होना चाहिए, यदि पांच से अधिक है तो बहुत नुकसान दायक है, बैक्टीरिया बढ़े होते हैं और हॉमफुल होता है।

ब्लीचिंग: इसका उपयोग पानी को साफ करने के लिए किया जा रहा है, इससे पानी के वैक्टीरिया, कीड़े, फंगस को खत्म कर देता है। 2 पीपीएम तक डोज देने पर सूक्ष्मजीव नहीं रहते।

एलम: इसका का उपयोग पानी को साफ करने होता है। नदी से आने वाली मिट्टी आदि पानी में रख दिया जाता है तो इसके पार्टीकल मिट्टी व गंदगी को अपने में चिपकाता है नीचे खींचता है ऊपर पानी को साफ रखता है। कटनी नदी के पानी की टीर्बीडिटी 8 से 10 मान में है, फिल्टर के बाद 1.2 टर्बीडिटी का पानी दिया जा रहा है।

द्वारका सिटी में एक माह से गंदे पानी की समस्या

शहर की हाईप्रोफाइल सोसायटी मानी जाने वाली द्वारका सिटी में बीते लगभग एक माह से गंदे पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। कॉलोनीवासियों के घरों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे कभी भी संस्र5मण फैलने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या को लेकर वे कई बार सोसायटी की देखरेख करने वाले जिम्मेदारों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। यह उल्लेखनीय है कि द्वारका सिटी कॉलोनी में कटनी नगर निगम द्वारा जल सप्लाई नहीं की जाती। यहां कॉलोनीवासियों को द्वारका सिटी प्रबंध समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई पानी की टंकी एवं अन्य वैकल्पिक माध्यमों से जलापूर्ति की जाती है। ऐसे में स्थानीय लोग पूरी तरह सोसायटी की जल व्यवस्था पर निर्भर हैं। पानी लंबे समय से गंदा आ रहा है। स्थिति यह है कि जिन लोगों ने अपने निजी बोर करा रखे हैं, उनके बोर से भी ऐसा पानी निकल रहा है जिसे पीने योग्य नहीं कहा जा सकता। इससे कॉलोनीवासियों में भय और असंतोष का माहौल है।

45 वार्डों में हुई औचक जांच

शनिवार को नगर निगम द्वारा शहर के 45 वार्डों में औचक जांच कराई गई। राइजिंग लाइन के पानी को टेस्ट किया गया, टंकियों के पानी के साथ उपभोक्ताओं के यहां भी की जाने वाली सप्लाई की जांच कराई गई। 25 स्थानों पर जांच कराई गई, जांच में सभी स्थानों का पानी पीने योग्य पाया गया है। लॉरेंस लाइन में जो मटमैला पानी आ रहा है उसकी भी जांच की गई। शनिवार को पानी की जांच कराई गई ते सही सप्लाई पाई गई है।

फैक्ट फाइल

- 5.25 एमसीएम है नदी बैराज मुख्य स्रोत।
- 271 शहर में हैं पेयजल सप्लाई के लिए नलकूप।
- 896 हैंडपंप के माध्यम से हो रही जलापूर्ति।
- 162 अनुपयोगी व बंद पड़े हैं हैंडपंप, आ रहा खराब पानी।
- 51 एमएलडी के तीन हैं जल सोधन संयंत्र।
- 32 ओवरहेड टैंक से शहर में हो रही सप्लाई।

वर्जन

द्वारिका सिटी में खराब पानी के सप्लाई की बात सामने आई है। यहां पर कॉलोनाइज द्वारा पानी की सप्लाई की जाती है। इसकी जांच कराई जाएगी। शहर में शनिवार को 25 स्थानों के सेम्पल लिए गए हैं, सभी जगह पीने योग्य पानी पाया गया है। पुरानी लाइन को बदलने व नई लाइन के विस्तार की योजना प्रक्रिया में है।

मृदुल श्रीवास्तव, उपयंत्री नगर निगम।