नामांतरण, बटवारा में कहीं बरती तो नहीं लापरवाही, अब अफसरों की एक लाख रुपये काटने की तैयारी
कटनी. सरकार के एक फरमान ने जिले में राजस्व विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। तहसीलदार, नायब तहसीलदार व एसडीएम सहित राजस्व विभाग अधिकारी, कर्मचारी पता लगा रहे हैं कि उनके स्तर पर अविवादित नामांतरण, बटवारा के कोई प्रकरण पेंडिंग तो नहीं रह गए। दरअसल राजस्व मंत्रालय से कलेक्टर को एक पत्र जारी कर कहा गया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा १५ अगस्त २०१७ को की गई घोषणा के अनुसार किसी व्यक्ति की तीन माह पुरानी यानि १५ मई २०१७ के बाद अविवादित नामांतरण, बटवारा के प्रकरण मिलते हैं तो शिकायतकर्ता को बतौर ईनाम एक लाख रुपये संबंधित अधिकारी व कर्मचारी से वसूल कर दी जाएगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि आवेदक का प्रकरण किस अधिकारी व कर्मचारी के पास रुका था। जिलेभर में अविवादित नामांतरण, बटवारा व फौती नामांतरण के १०४ प्रकरण लंबित हैं। इन प्रकरणों को लेकर विभाग का दावा है कि ज्यादातर प्रकरण एक माह पुरानी है। दूसरी ओर अंदर ही अंदर ऐसे आवेदनों की छटनी करवाई जा रही है। अधीनस्त कर्मचारी से पूछ रहे हैं कि ऐसा कोई आवेदन शेष तो नहीं रह गया जिससे एक लाख रुपये की कटौती हो जाए।
सालभर में राजस्व विभाग के जरुरी प्रकरण:
- अविवादित नामांतरण, बटवारा ११३०४
- सीएमएचओ, जन्म मृत्यु रजिस्टार से प्राप्त फौती नामांतरण २८३७
- नक्शा तरमीम के प्रकरणों का निराकरण १२५८०
- न्यायलयीन आदेशों का राजस्व अभिलेखों में इंद्राज ११४५
- खसरा बी-१ का वितरण ११२११
- नि:शुल्क भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका ५४५८
शिविरों के नाम पर खानापूर्ति
राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिये जिला प्रशासन द्वारा शिविरों के नाम पर भी जमकर खानापूर्ति की गई है। आलम यह रहा कि कई ग्राम पंचायतों में आयोजित शिविरों की लोगों को जानकारी तक नहीं लगी वहीं कई शिविरों से लोगों को बैरंग ही लौटा दिया गया। अविवादित नामांतरण और बंटवारे के लिए हितग्राही अफसरों के चक्कर काटने पर मजबूर हैं।
वर्जन
हमने प्रयास किया है कि ऐसा कोई प्रकरण जिले में लंबित न रहे। फिर भी इस मामले में शासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
विशेष गढ़पाले कलेक्टर