- डीजल की बचत और प्रदूषण को कम करने के लिए रेलवे द्वारा रेल लाइन का तेजी से विद्युतीकरण किया जा रहा है। कटनी से प्रयागराज सेक्शन का भी काम तेजी से चला। मानिकपुर से सतना तक अब ओएचइ लाइन का काम पूरा हो गया है। - हालांकि कटनी से सतना के बीच चलने वाले काम की रफ्तार काफी धीमी है। समय-सीमा पूरी होने के बाद भी काम ठेकेदार द्वारा नहीं किया गया। शुक्रवार को ओएचइ वर्क पूर हो गया है। रीवा-अनंतबिहार एक्सप्रेस से टेस्टिंग भी हो चुकी है। - शीघ्र ही रेलवे का करोड़ों रुपये का डीजल फुंकना बंद हो जाएगा। अभी तक कटनी से मानिकपुर तक 175 किलोमीटर तक यात्री ट्रेनें डीजल इंजन से दौड़ रही थीं।
कटनी. डीजल की बचत और प्रदूषण को कम करने के लिए रेलवे द्वारा रेल लाइन का तेजी से विद्युतीकरण Railway किया जा रहा है। कटनी से प्रयागराज सेक्शन electric locomotive का भी काम तेजी से चला। मानिकपुर से सतना तक अब ओएचइ लाइन का काम पूरा हो गया है। Indian Railways हालांकि कटनी से सतना के बीच चलने वाले काम की रफ्तार काफी धीमी है। समय-सीमा पूरी होने के बाद भी काम ठेकेदार द्वारा नहीं किया गया। शुक्रवार को ओएचइ वर्क पूर हो गया है। रीवा-अनंतबिहार एक्सप्रेस से टेस्टिंग भी हो चुकी है। शीघ्र ही रेलवे का करोड़ों रुपये का डीजल फुंकना बंद हो जाएगा। अभी तक कटनी से मानिकपुर तक 175 किलोमीटर तक यात्री ट्रेनें डीजल इंजन से दौड़ रही थीं। मार्च माह तक मानिकपुर से सतना के एक स्टेशन पहले सगम तक ओएचइ का काम पूरा हो गया था। साढ़े 6 किलोमीटर का काम बकाया था। अब वह भी पूरा हो गया है। अब कटनी से सतना तक ही डीजल पॉवर ट्रेन को लेकर जाएंगे। याने की सतना से मानिकपुर तक 77 किलोमीटर तक प्रतिदिन 80 से 90 ट्रेनों में फुंकने वाले करोड़ों रुपये की डीजल की रेलवे को बचत होगी। खास बात तो यह है कि रेलवे को डीजल की बचत के साथ ही डीजल के जलने से होने वाले प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। कटनी से सतना तक होने वाले काम के जल्द पूरा होते ही कटनी से प्रयाग तक इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनें दौडेंग़ीं। खास बात यह है कि रेलवे को प्रतिदिन अब 50 लाख रुपये से अधिक के डीजल की बचत तो होगी ही साथ ही प्रदूषण में कमी आएगी।
प्रतिदिन औसत 80 से 85 ट्रेनें
कटनी से मानिकपुर लाइन में प्रतिदिन 80 से 85 यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है। बिलासपुर, जबलपुर और बीना की ओर से आने वाली ट्रेन का मुड़वारा और मुख्य रेलवे स्टेशन में इलेक्ट्रिक डीजल को बदलकर मानिकपुर भेजा जा रहा है। अब सिर्फ इलेक्ट्रिक पॉवर के साथ यात्री ट्रेन को डीजल पॉवर मानिकपुर की बजाय सतना तक छोड़कर आएगा और वहां से जो यात्री ट्रेन आ रही होगी कटनी तक लेकर आएगा।
प्रतिदिन होगी 51 लाख रुपए के डीजल की बचत
जैसे ही सतना से मानिकपुर तक इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनें दौडऩे लगेगी उस दिन से 80 ट्रेनों के मान से प्रतिदिन रेलवे को 51 लाख 36 हजार 640 रुपये के डीजल की बचत होगी। उल्लेखनीय है कि यात्री ट्रेनों में 1 किलोमीटर में लगभग 6 लीटर डीजल की खपत होती है। 77 किलोमीटर के डीजल की बचत होगी। ऐसे में 462 लीटर एक ट्रेन में डीजल की बचत होगी। 1 दिन में 32104 लीटर का खर्च बंद हो जाएगा और 30 अगस्त के अनुसार 69 रुपये 49 पैसे प्रति लीटर डीजल के मान से रेलवे को मानिकपुर से सतना तक 80 ट्रेनों के 1 फेरे में 25 लाख 68 हजार 320 रुपये की दोनों फेरी में में 51 लाख 36 हजार 640 रुपये के डीजल की बचत होगी।
इनका कहना है
रीवा-अनंत बिहार एक्सप्रेस से इलेक्ट्रिक इंजन की टेस्टिंग ली गई है। सफलतापूर्वक सतना से मानिकपुर तक ट्रेन को चलाया गया है। इसे नियमित कर दिया गया है। कटनी से सतना तक डीजल इंजन ट्रेन लेकर जाएं और फिर वहां से इलेक्ट्रिक इंजन चलाया जाए, इसके लिए शीघ्र पहल शुरू की जाएगी।
डॉ. मनोज सिंह, डीआरएम।