नो-एंट्री ध्वस्त, ओवरलोडिंग-नशे में ड्राइविंग का चल रहा खेल, गायब नंबर प्लेट से बच निकलते वाहन, हर दिन दांव पर आमजन की जान
कटनी. आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम में बस और डंपर की भीषण टक्कर के बाद लगी आग में 13 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है लेकिन जिले में हालात ऐसे हैं कि मानो इस त्रासदी से भी कोई सबक नहीं लिया गया। यहां रेत परिवहन में लगे हाइवा, टिपर और डंपर सडक़ों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं और प्रशासन की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है। जिले के प्रमुख मार्ग कटनी-जबलपुर, कटनी-बहोरीबंद, कटनी-दमोह, कटनी-बरही, कटनी-उमरिया और शहर के अंदरूनी रास्तों पर भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर शहडोल की ओर से आने वाले मार्ग पर स्थिति सबसे भयावह है। रपटा के पास से मनमाने तरीके से ये वाहन शहर में प्रवेश कर दुर्गा चौक होते हुए तिलक कॉलेज रोड तक पहुंच जाते हैं। इस मार्ग पर स्कूल, कॉलेज और घनी आबादी होने के बावजूद कोई प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आता।
शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध के बावजूद दिन-दहाड़े और रात में ये वाहन बेधडक़ घुसते हैं। कई बार पुलिस की मौजूदगी में भी इन वाहनों का गुजरना स्थानीय लोगों के लिए सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि अगर सख्ती होती, तो इतनी बड़ी संख्या में वाहन शहर में प्रवेश नहीं कर पाते। हाल ही में माधवनगर में एक सफाईकर्मी की मौत भी नोएंट्री में घुसे वाहन की ठोकर से हुई थी।
जिले में चल रहे अधिकांश डंपर और हाइवा बिना नंबर प्लेट के या धुंधले नंबर के साथ चलते हैं। दुर्घटना होने पर यही वाहन आसानी से फरार हो जाते हैं और केस ‘अज्ञात वाहन’ के नाम पर दर्ज हो जाता है। इससे न सिर्फ अपराधी बच निकलते हैं, बल्कि पीडि़त परिवारों को न्याय और मुआवजा पाने में भी भारी दिक्कत होती है।
सूत्रों के अनुसार, कई वाहन ऐसे लोगों के हाथों में हैं जिन्हें भारी वाहन चलाने का पर्याप्त अनुभव नहीं है। कम उम्र के युवक, यहां तक कि क्लीनर तक स्टीयरिंग संभाल रहे हैं। इसके अलावा कई मामलों में ड्राइवरों के नशे में वाहन चलाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसे में सडक़ों पर चलना आम नागरिकों के लिए जोखिम भरा हो गया है।
रेत के अवैध परिवहन की होड़ में वाहन क्षमता से कई गुना अधिक लोड लेकर दौड़ रहे हैं। इससे ब्रेकिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ता है और वाहन का संतुलन बिगड़ जाता है। यही वजह है कि अचानक ब्रेक फेल या नियंत्रण खोने की घटनाएं सामने आती हैं।
तिलक कॉलेज रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर, जहां निजी स्कूलों में सैकड़ों बच्चे आते-जाते हैं, वहीं से भारी वाहन गुजर रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखता। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते रोकथाम नहीं हुई, तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि समय-समय पर पुलिस और प्रशासन कार्रवाई का दावा करते हैं, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रही है। छिटपुट चालानी कार्रवाई या वाहन जब्ती से समस्या का समाधान नहीं निकल रहा।
भारी वाहनों की नोएंट्री की टाइमिंग फिक्स है उसी के अनुसार वाहन संचालित हो रहे हैं। निर्धारित स्थानों पर हमारे जवान तैनात रहते हैं। समय-समय पर चेकिंग अभियान भी चलाया जाता है। यदि किसी तरह की लापरवाही होती है तो कार्रवाई की जाएगी।