कटनी

विशेष नवाचार : तीन माह में 116 जगह जंगलों में धधकी आग, वनों को बचाने अब सैटेलाइट से निगरानी

जंगलों में आग पर नियंत्रण के लिए पहली बार नवाचार, आग लगते ही फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया में आता है अलर्ट मैसेज, कटनी के विशाल वन क्षेत्र में वॉच टॉवर और आधुनिक उपकरणों से आग पर काबू पाने की नई रणनीति, कंट्रोल रूम कर रहा निगरानी
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Apr 01, 2026
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ग्रीस के जंगल में लगी भीषण आग। फोटो: एएनआई

कटनी. जिले के व्यापक वन क्षेत्र में हर वर्ष गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे न केवल हजारों हेक्टेयर जंगल प्रभावित होते हैं, बल्कि वन्यजीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाता है। इस वर्ष जनवरी से अब तक 116 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने पहली बार आधुनिक तकनीक और नवाचार के जरिए आग पर नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू की है।
कटनी जिला प्रदेश के उन 23 जिलों में शामिल है, जहां वनाग्नि की घटनाएं अधिक होती हैं। जिले में लगभग 1.10 लाख वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है, जबकि कुंडम प्रोजेक्ट और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन को मिलाकर यह क्षेत्र 1.25 लाख वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है। इतने बड़े क्षेत्र में निगरानी के लिए अब सैटेलाइट सिस्टम का सहारा लिया जा रहा है। इस बार अपनाई गई नई तकनीक और सघन निगरानी व्यवस्था से आगजनी की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।

तत्काल मिलती है सूचना

जंगल के किसी भी स्थान पर आग लगती है तो फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से उसकी लोकेशन सहित अलर्ट संदेश सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचता है। इसके लिए जिला मुख्यालय में विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से तुरंत टीम को मौके पर भेजा जाता है। आम नागरिकों के लिए भी 8817735808 नंबर जारी किया गया है, ताकि वे आग की सूचना तुरंत दे सकें।

सैटेलाइट मॉनिटरिंग सिस्टम लागू

सैटेलाइट मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है। आग लगते ही लोकेशन सहित अलर्ट, त्वरित कार्रवाई संभव हो रही है। जिला मुख्यालय से 24 घंटे निगरानी और टीम की तैनाती की गई है। प्रत्येक रेंज में 6-7 वॉच टॉवर बनाए गए हैं जहां से निगरानी हो रही है। वहीं टीम को हर 4 घंटे में रिपोर्टिंग अनिवार्य किया गया है। फायर लाइन प्रबंधन पर फोकस किया जा रहा है। सूखी घास, पत्तियों व ज्वलनशील पदार्थों को हटाकर आग की रोकथाम के लिए पहल जारी है।

आधुनिक उपकरण कराये मुहैया

वन विभाग द्वारा आगजनी रोकने के लिए कर्मचारियों को फायर बीट मुहैया कराया गया है, ताकि पीट-पीटकर आग को रोक सकें। बैग पंप जैसे संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं तो तेज प्रेशर के साथ आग पर काबू पा सकेंगे। महुआ बीनने वालों को जागरूक कर नियंत्रित तरीके से आग लगाने की सलाह दी जा रही है। ग्रामीणों को वनकर्मी की मौजूदगी में आग लगाने कहा जा रहा है। गांव-गांव मुनादी भी कराई जा रही है।

विशेष बजट का प्रावधान

बता दें कि पहली बार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के तहत 25 लाख रुपए मुहैया कराए गए हैं जिससे संसाधनों का सुदृढ़ीकरण हुआ है। वन विभाग द्वारा कटनी, विजयराघवगढ़, बड़वारा-बरही, ढीमरखेड़ा, बहोरीबंद एवं बांधवगढ़ बफर क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारी-कर्मचारी लगातार क्षेत्र भ्रमण कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि इस बार अपनाई गई तकनीकी व्यवस्था और सामुदायिक सहभागिता से आगजनी की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण संभव होगा। यह पहल न केवल जंगलों को सुरक्षित रखने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी।

वर्जन

आगजनी रोकने के लिए अब सैटेलाइट से निगरानी हो रही है। एफएसआई द्वारा तत्काल कंट्रोल को सूचना मिल रही है। जनवरी माह से अबतक 116 घटनाएं रोकी गई हैं। कर्मचारियों को भी उपकरण मुहैया कराए गए हैं। 6 रेंज में वॉच टॉवर से निगरानी कराई जा रही है। ग्रामीणों को भी लगातार जागरूक किया जा रहा है।

गर्वित गंगवार, डीएफओ।

Updated on:
01 Apr 2026 09:36 am
Published on:
01 Apr 2026 09:36 am