कटनी

पत्रिका संवाद में बोले एएसपी: महिलाओं की हर क्षेत्र में होगी 50 फीसदी भागीदारी, तभी 2047 तक विकसित होगा भारत

कॉलेज में महिला सशक्तिकरण व सुरक्षा पर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित, अफसरों ने बताए सुरक्षा के उपाय, पत्रिका के संस्थापक कर्पूरचंद्र कुलिशजी की जन्मशती वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने किए बेबाकी से सवाल, पुलिस अफसरों ने दिए जवाब

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Mar 11, 2026
patrika samvad

कटनी. कॉलेज में पत्रिका के संस्थापक कर्पूरचंद्र कुलिशजी की जन्मशती वर्ष के अवसर पर महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा विषय पर संवाद कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को आत्मविश्वास, सुरक्षा और करियर से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए, छात्राओं ने भी खुलकर सवाल पूछे और अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। वक्ताओं ने कुलिशजी की निडर और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता को याद करते हुए पत्रिका की पहल की सराहना की...। पत्रिका के संस्थापक कर्पूरचंद्र कुलिशजी की जन्मशती वर्ष के अवसर पर मंगलवार को गल्र्स कॉलेज में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रभारी एसपी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डेहरिया, सीएसपी नेहा पच्चीसिया, डीएसपी शिवा पाठक और महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने छात्राओं को आत्मविश्वास, जागरूकता और सतर्कता के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाने के सुझाव दिए। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण उपाय भी बताए। इस दौरान छात्राओं ने भी खुलकर सवाल किए, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से जवाब दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं, प्राध्यापक और महाविद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा। इस दौरान डॉ. विमला मिंज, अंजनेय तिवारी, विनीत सोनी, भीम बर्मन, श्रद्धा वर्मा सहित पूरा स्टॉफ मौजूद रहा।

पत्रकारिता के महान व्यक्तित्व थे कुलिशजी

वक्ताओं ने कहा कि कर्पूरचंद्र कुलिश भारतीय पत्रकारिता के महान और प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। वे प्रसिद्ध हिंदी समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका के संस्थापक, संपादक और प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को जनसरोकारों से जोडऩे और उसे मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया गया कि वे निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने हमेशा सत्ता या दबाव से प्रभावित हुए बिना सच्चाई को सामने लाने का कार्य किया। साथ ही उन्होंने आम जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर पत्रकारिता को जनसेवा से जोड़ा। वक्ताओं ने यह भी बताया कि उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली थी, जिससे आम लोग भी आसानी से उनके विचारों को समझ पाते थे, जिसकी आज भी निरंतरता बनी हुई है। वे भारतीय संस्कृति और वेदों के गहरे अध्येता भी थे और इस विषय पर उन्होंने कई लेख और पुस्तकें लिखीं।

वीणापाणि की उपासना से शुरुआत

संवाद कार्यक्रम की शुरुआत मां वीणापाणि की उपासना से हुई। मुख्य वक्ता एएसपी डॉ. संतोष डहेरिया सहित डीएसपी, प्राचार्य व प्राध्यापकों ने दीप प्रज्जवलित कर, तिलक चंदन-वंदन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान तिलक लगाकर वक्ताओं व अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने किया। प्राध्यापक द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।

रील में जीवन व्यतीत नहीं करें, पढकऱ हों सशक्त: एएसपी

संवाद कार्यक्रम में बेटियों को संबोधित करते हुए एएसपी डॉ. संतोष डेहरिया ने कहा कि भारतीय नारी सशक्त तभी मानी जाएगी जब वह अपने निर्णय खुद ले सकेगी, यही वास्तव में सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक व राजनीतिक निर्णय लेने में जब नारी सक्षम हो जाती है तो सशक्त कहलाती है। नारी यदि शसक्त है तो सुरक्षा का मैटर खत्म हो जाता है। उन्होंने डीएसपी शिवा पाठक का उदाहरण देते हुए कहा कि वे इस पायदान हैं कि उन्हें किसी भी प्रकार की असुरक्षा नहीं है। भारत सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का संकल्प लिया है, उसमें देश की आधी आबादी को अपना पूरा योगदान देना होगा। छात्राओं को कहा कि आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, राजनीति, पारिवारिक रूप से सशक्त होना पड़ेगा। अभी महिलाओं का योगदान कम है, बेटियां सशक्त होंगी तो हम बहुत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर आगे बढ़ सकेंगे। उन्होंने संविधान में मिले महिलाओं के अधिकारों की जानकारी दी। जरुरत है बेटियों व महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलकर काम करना होगा। जब आप पढ़लिखकर आगे बढ़ेंगी तो स्वयं निर्णय ले सकेंगी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारत सरकार, प्रदेश सरकार द्वारा नियम-कानून बनाए गए हैं। कानून को पढकऱ सही उपयोग करना है, दुरुपयोग से बचना है। उन्होंने डिजिटल युग में बहुत सजगता से उपयोग करना है। रील में जीवन व्यतीत नहीं करना है, रील के कारण ही बहुत सी घटनाएं हो रही हैं। इससे उनका सामाजिक व शारीरिक हानि करता है। सोशल मीडिया संसाधनों का उपयोग कम करें, बहुत आवश्यक होने पर ही करें। बच्चों को दूर रखें। कई देशों में 18 साल तक के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया है। कर्नाटक में भी बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया गया है। बेटियों को कहा कि अभी आपकी उम्र सिर्फ पढऩे के लिए है। सोशल मीडिया में समय गंवाना मतलब भविष्य को बर्बाद करना है। अभी आप तीन साल मेहनत करेंगी तो पूरे 40 से 50 साल व पूरा जीवन बेहतर होगा।

हर क्षेत्र में बेटियों को बढऩा है आगे: प्राचार्य

प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने कहा कि पत्रिका समाचार पत्र के संस्थापक के जन्मशती वर्ष पर महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, यह बहुत सराहनीय पहल है। सुरक्षा को लेकर क्या-क्या नए सोपान है, उनकी जानकारी मिली। साइबर सुरक्षा पर फोकस किया। सोशल मीडिया के उपयोग में बेहद सावधानी की जरुरत है, ताकि आप डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी से बैंक बैलेंस खाली होने, किसी अप्रिय घटना से बच सकें। ऑनलाइन फ्रॉड से बचना है। बेटियों को इसलिए जागरुक होकर अपने माता-पिता, पड़ोस, रिश्तेदार को भी जागरुक करें। हम सुरक्षित तभी महसूस करते हैं जब सभी पायदानों पर खरे उतरें। सरकार का मुख्य उद्देश्य कानून व्यवस्था व नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना है। युवा छात्राएं आने वाले कल का भविष्य तय करेंगी। जब बेटियां सुरक्षित रहेंगी तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा। नारी आदि-अनादि काल से सुरक्षित रहीं हैं, बीच में ऐसा काल आया जिसने अलग जामा पहना दिया। अब बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढऩा है।

चैलेंज से डरना नहीं आगे बढऩा है: सीएसपी

सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने संवाद कार्यक्रम में छात्राओं से चर्चा करते हुए कहा कि हमें कंफर्ट जोन को छोडकऱ आगे बढऩा होगा। बेटियों के लिए समाज में बंदिशें होती हैं कभी पहनाने को लेकर तो कभी रात में निकलने को लेकर तो कहीं जाने पर, लेकिन आप हार्ड प्रोफेशन चुनें, लडक़ों की तरह ही अपने आप को समझें, कठिन परिश्रम से अपने आप को तपायें और सशक्त बनें। अपने आप को सिर्फ महिला न देखें, अपने आप को पुरुषों के सामान ही समझें। हम कॉलेज स्तर पर आने पर अपने कॅरियर को तय करें। यह तय करें कि हमें अपनी जिंदगी अपने मन की जीना है या फिर पति, ससुर व ससुराल वालें के हिसाब से जीना है यह तय करना होगा। हर क्षेत्र में हाथ आजमायें। अपने आप को पुरुषों से कम न आंकें। दो-तीन वर्ष बहुत खास होते हैं। प्रेमजाल में नहीं पडऩा है, सिर्फ कैरियर देखना है। प्रेमजाल में सिर्फ जिंदगी पर पछताना है। पढऩे की उम्र में लाइफ पार्टनर का चयन करना बिल्कुल गलत है। यह सिर्फ इमेजन की दुनिया है। अपने पैरों पर खड़े होने पर फोकस कें। आपको किस क्षेत्र में जाना है इसका गोल तय करना होगा। लड़ाई आपको अपने लिए हरदम लडऩा है। आप को चैलेंज से डरना नहीं है, उनसे आगे बढऩा है। आपको समाज को अलग रखते हुए आगे बढऩा है। आधी आबादी को डरे हुए सहमे हुए नहीं रहना है, महिलाएं अब अंतरिक्ष तक जा रही हैं, हर क्षेत्र में कमाल कर रही हैं। नकारात्मक नहीं सोचना है। नई शुरुआत में दिक्कत होगी, लेकिन आपको माता-पिता, दादा-दादी, चाचा-चाची आदि को विश्वास दिलाते हुए कैरियर पर आगे बढकऱ कुछ कर दिखाना होगा। महिलाओं का मतलब सिर्फ पति, बच्चे व ससुराल संभालना नहीं बल्कि हर क्षेत्र में प्रतिनिधित्व करना है।

किसी से भी साझा न करें गोपनीय जानकारी: डीएसपी

कार्यक्रम में बेटियों से चर्चा करते हुए डीएसपी शिवा पाठक ने कहा कि पुलिस बेटियों व समाज की सुरक्षा के लिए हर आयामों पर काम करती है। आप छात्राएं उम्र के ऐसे पड़ाव पर हैं, जहां पर आपको बहुत संवेदनशील रहना है, यहां पर अधिक घटनाएं घटती हैं, यदि आप जागरूक हैं तो अपराध शून्य हो जाता है। आवश्यकता है कि हम किसी भी अप्रत्याशित बातों के लिए जागरूक रहें। आपे जीवन के बेहतर आयाम तय करें और आगे बढ़ें। अभी फील्ट का टारगेट तय करें। अपनी सुरक्षा और फोकस के साथ तैयारी करें। डीएसपी ने मुस्कान अभियान, पुलिस दीदी वाहन, हेल्पलाइन नंबर 1090 महिला हेल्पलाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन 112 नेशनल हेल्पलाइन आदि की जानकारी दी, ताकि समय से सहायता मिल सके। उन्होंने अपनी गोपनीय जानकारी किसी को भी साझा न करने की बात कही। डीएसपी ने कहा कि किसी भी घटना पर सामने आयें, माता-पिता व पुलिस को जानकारी दें, ताकि बड़ी घटना को रोका जा सके। अपनी हर एक्टिविटी की जानकारी दें। इस उम्र में कई घटनाओं की आशंका रहती है, समाज के लोग मौके पर तलाश में होते हैं, जिससे वे आपका शोषण कर सकें, इसलिए पूरी सावधानीर रखें। सोशल मीडिया के उपयोग में बहुत सावधानी रखें। साइबर अपराधों से बचें, एपी के फाइल डाउनलोड न करें।

प्राध्यापकों व छात्राओं ने रखे अपने विचार

कार्यक्रम के दौरान संवाद कार्यक्रम में पहुंचे एएसपी, सीएसपी, डीएसपी को कॉलेज प्रबंधन द्वारा सम्मानित किया गया। इस दौरान पत्रिका के द्वारा की गई सराहनीय पहल के लिए भी टीम को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्राध्यापकों व सहायाक प्राध्यापकों को भी सम्मानित किया गया।

डॉ. संजय भारद्वाज।

पत्रिका के संस्थापक कर्पूरचंद्र कुलिशजी की जन्मशती वर्ष पर आयोजित यह संवाद कार्यक्रम अत्यंत सार्थक रहा। इसमें पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को सुरक्षा, आत्मविश्वास और जागरूकता के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। पत्रिका हमेशा से समाज के मुद्दों को सामने लाने वाला जिम्मेदार मंच रहा है।

डॉ. शिल्पी सिंह।

कार्यक्रम में छात्राओं को महिला सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और करियर के प्रति जागरूक किया गया। अधिकारियों ने व्यवहारिक सुझाव देकर बेटियों का आत्मविश्वास बढ़ाया। पत्रिका द्वारा ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित करना सराहनीय पहल है, जिससे छात्राओं को सही दिशा और प्रेरणा मिलती है।

डॉ. रोशनी पांडेय।

यह संवाद कार्यक्रम छात्राओं के लिए प्रेरणादायी रहा। अधिकारियों ने सुरक्षा, कानून और आत्मरक्षा के उपायों पर उपयोगी जानकारी दी। पत्रिका समाज में सकारात्मक बदलाव और जनजागरण के लिए लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जो निश्चित रूप से प्रशंसनीय है।

डॉ. अपर्णा मिश्रा।

पत्रिका द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। छात्राओं ने खुलकर सवाल किए और अधिकारियों से उपयोगी जानकारी प्राप्त की। ऐसे कार्यक्रम युवाओं में जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं।

डॉ. मिथलेश्वरी मरावी।

महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण पर हुआ यह संवाद कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी रहा। अधिकारियों ने छात्राओं को सतर्कता, कानून और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी। पत्रिका हमेशा समाज के हित में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

राजकुमारी सेन, छात्रा।

पत्रिका के जन्मशती वर्ष में आयोजित यह कार्यक्रम छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक रहा। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा और आत्मविश्वास के विषय पर मार्गदर्शन दिया। कुलिश जी की पत्रकारिता जनसरोकारों से जुड़ी रही और पत्रिका आज भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

स्मिता सेन, छात्रा।

इस संवाद कार्यक्रम से हमें महिला सुरक्षा और आत्मरक्षा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। अधिकारियों ने हमें जागरूक और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। पत्रिका द्वारा ऐसा कार्यक्रम आयोजित करना बहुत अच्छी पहल है, जिससे छात्राओं को सही मार्गदर्शन मिला।

रशिका राज।

कार्यक्रम में हमें अपनी सुरक्षा, करियर और आत्मविश्वास से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले। अधिकारियों ने हमारे सवालों का सरल तरीके से जवाब दिया। पत्रिका का यह प्रयास छात्राओं को जागरूक बनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सराहनीय है।

रश्मि सिंह, छात्रा।

खास-खास

- संवाद कार्यक्रम में साइबर फ्रॉड से बचने किया गया जागरूक।
- संवाद कार्यक्रम में महिला संबंधी अपराधों के लिए जागरूक।
- संवाद कार्यक्रम में पुलिस द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा की दी गई जानकारी।
- संवाद कार्यक्रम में बेटियों के अधिकार व कानून की दी गई जानकारी।
- संवाद कार्यक्रम में बेटियां कैसे हों सशक्त फूंका गया यह मंत्र।
- संवाद कार्यक्रम में बेटियों को किस क्षेत्र में बनाना चाहिये कॅरियर यह बताया।

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Published on:
11 Mar 2026 10:12 am
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